कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha) PDF हिन्दी
Misc ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha) हिन्दी Lyrics
कारदाइयन नोम्बू मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह व्रत मासी महीने के अंत और पंगुनी महीने की शुरुआत के संगम पर मनाया जाता है।
इस व्रत का मूल आधार देवी सावित्री की अपने पति सत्यवान के प्रति अटूट निष्ठा और यमराज से उनके प्राण वापस लाने की पौराणिक कथा है।
|| कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा ||
प्राचीन काल में मद्र देश के राजा अश्वपति की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए देवी सावित्री की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें एक पुत्री का वरदान दिया। पुत्री का नाम सावित्री रखा गया। जब सावित्री विवाह योग्य हुई, तो उसने अपने जीवनसाथी के रूप में सत्यवान को चुना।
सत्यवान राजा द्युमत्सेन के पुत्र थे, जो अपना राज्य खोने के बाद वन में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे। हालांकि, देवर्षि नारद ने सावित्री को चेतावनी दी कि सत्यवान की आयु कम है और विवाह के ठीक एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। इस चेतावनी के बावजूद, सावित्री ने अपने निर्णय को नहीं बदला और सत्यवान से विवाह कर लिया।
विवाह के बाद सावित्री अपने पति और सास-ससुर के साथ वन में रहने लगी। जैसे-जैसे वह निर्णायक दिन करीब आया, सावित्री ने कठोर तप और उपवास शुरू कर दिया। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु तय थी, वह उनके साथ लकड़ी काटने वन में चली गई।
दोपहर के समय, सत्यवान को अचानक सिर में तेज दर्द महसूस हुआ और उन्होंने सावित्री की गोद में अपना सिर रखकर प्राण त्याग दिए। उसी क्षण, मृत्यु के देवता यमराज सत्यवान के प्राण लेने पहुंचे।
जब यमराज सत्यवान की आत्मा लेकर दक्षिण दिशा की ओर जाने लगे, तो सावित्री उनके पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने उसे वापस लौटने को कहा, लेकिन सावित्री ने अपनी विद्वत्ता और पतिव्रत धर्म की शक्ति से ऐसे तर्क दिए कि यमराज प्रभावित हो गए।
यमराज ने सावित्री को पति के प्राणों के अलावा कोई भी तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने चतुराई से निम्नलिखित वरदान मांगे:
- अपने ससुर की आँखों की रोशनी वापस मिल जाए।
- उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल जाए।
- वह स्वयं सौ पुत्रों की माता बने।
यमराज ने “तथास्तु” कह दिया। तभी सावित्री ने उन्हें याद दिलाया कि एक पतिव्रता स्त्री के लिए अपने पति के बिना पुत्रवती होना संभव नहीं है। अपनी ही बात के जाल में फंसकर और सावित्री के अटूट प्रेम से द्रवित होकर, यमराज ने सत्यवान के प्राण वापस कर दिए।
|| पूजन विधि और ‘अडई’ का महत्व ||
इस व्रत में महिलाएं “कारदाइ” (चावल के आटे और लोबिया से बना एक विशेष पकवान) तैयार करती हैं। कथा के अनुसार, जब सावित्री ने यह व्रत किया था, तब उनके पास वन में देने के लिए कोई विशेष पकवान नहीं था, इसलिए उन्होंने कच्चे चावल और चने के आटे से नैवेद्य तैयार किया था।
- पीला धागा (मंजल सरडु) – पूजा के बाद महिलाएं अपने गले में एक पीला धागा बांधती हैं, जिसमें एक छोटी सी गांठ और हल्दी लगी होती है। यह धागा पति की लंबी आयु और सुरक्षा का प्रतीक है।
- प्रार्थना मंत्र – पूजा के दौरान महिलाएं यह प्रार्थना करती हैं – “उरुगाड़ा वेन्नयम ओरु अडइयम नन वैत्तेन, ओरु कालम एन कण्णन प्रियमल इरुक्का वेणुम।” (अर्थ – मैं पिघला हुआ मक्खन और यह ‘अडई’ अर्पित करती हूँ, हे प्रभु, मेरे पति मुझसे कभी अलग न हों।)
Join HinduNidhi WhatsApp Channel
Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!
Join Nowकारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha)
READ
कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha)
on HinduNidhi Android App
DOWNLOAD ONCE, READ ANYTIME
Your PDF download will start in 15 seconds
CLOSE THIS
