स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा PDF हिन्दी
Download PDF of Swaminarayan Jayanti Prakatya Katha Hindi
Misc ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा हिन्दी Lyrics
भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) के दिन हुआ था। यह पावन अवसर स्वामीनारायण जयंती के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यहाँ स्वामीनारायण भगवान के प्राकट्य की पावन कथा दी गई है:
|| स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा ||
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, जब समाज में अधर्म, अंधविश्वास और कुरीतियाँ बढ़ रही थीं, तब स्वयं नारायण ने पृथ्वी पर अवतार लेने का संकल्प लिया। उत्तर प्रदेश के अयोध्या के पास छपिया नामक गाँव में धर्मदेव और उनकी पत्नी भक्तिमाता निवास करते थे। वे अत्यंत धार्मिक और सरल हृदय के थे।
विक्रम संवत 1837 (सन् 1781 ई.) के चैत्र शुक्ल नवमी की रात्रि को, जब पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न का शुभ योग था, तब भक्तिमाता के आंगन में स्वयं साक्षात ब्रह्म ने अवतार लिया। रात्रि के लगभग 10:10 बजे।
बालक का मुखमंडल चंद्रमा के समान तेजस्वी था। मार्कंडेय ऋषि ने बालक के लक्षणों को देखकर उनके तीन नाम रखे हरि, कृष्ण और हरिकृष्ण। प्यार से लोग उन्हें घनश्याम पुकारते थे। बाल्यकाल में ही घनश्याम ने अपनी दिव्य लीलाओं से सबको चकित कर दिया।
एक बार उनके पिता ने उनके सामने एक सोने का सिक्का, एक तलवार और एक पोथी (शास्त्र) रखी। बालक घनश्याम ने शास्त्र को चुना, जो यह दर्शाता था कि वे ज्ञान और धर्म की स्थापना करने आए हैं। उन्होंने बचपन में ही कई राक्षसों का उद्धार किया और अपने मित्रों व परिजनों को दिव्य समाधि के दर्शन कराए।
11 वर्ष की अल्पायु में, माता-पिता के धाम गमन के बाद, घनश्याम ने जन-कल्याण के लिए गृहत्याग कर दिया। वे केवल एक लंगोटी और हाथ में कमंडल लेकर निकल पड़े। इस यात्रा के दौरान उन्हें नीलकंठ वर्णी के नाम से जाना गया। उन्होंने पूरे भारत की पैदल यात्रा (वन-विचरण) की और अंततः गुजरात के लोज गाँव में पहुंचे।
लोज में उनकी भेंट रामानंद स्वामी के शिष्यों से हुई। बाद में रामानंद स्वामी ने उन्हें दीक्षा दी और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने नीलकंठ वर्णी को दो नाम दिए सहजानंद स्वामी और नारायण मुनि।
रामानंद स्वामी के अंतर्ध्यान होने के बाद, सहजानंद स्वामी ने फरेणी गाँव में पहली बार ‘स्वामीनारायण’ महामंत्र दिया। तब से उन्हें भगवान स्वामीनारायण के रूप में पूजा जाने लगा।
|| स्वामीनारायण भगवान के मुख्य उपदेश ||
भगवान स्वामीनारायण ने समाज को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए:
- शिक्षापत्री – उन्होंने जीवन जीने के आदर्श नियमों की संहिता ‘शिक्षापत्री’ लिखी।
- कुप्रथाओं का अंत – उन्होंने सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और पशु बलि जैसी बुराइयों को समाप्त किया।
- अहिंसा और शुचिता – उन्होंने शुद्ध शाकाहार, नशा मुक्ति और सादगी पर बल दिया।
Join HinduNidhi WhatsApp Channel
Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!
Join Nowस्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा
READ
स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा
on HinduNidhi Android App
DOWNLOAD ONCE, READ ANYTIME
Your PDF download will start in 15 seconds
CLOSE THIS
