वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ संपन्न होगा। यह नौ दिन माँ दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की आराधना के लिए समर्पित होंगे।
नवरात्रि का पावन पर्व, जो मां दुर्गा (Maa Durga) की आराधना का प्रतीक है, जल्द ही आने वाला है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का विशेष महत्व होता है, और इसकी शुरुआत घटस्थापना (Ghatasthapana) से होती है। घटस्थापना को कलश स्थापना (Kalash Sthapana) भी कहते हैं, और इसे नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह ब्लॉग आपको घटस्थापना की संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त (Auspicious Muhurat), और कुछ विशेष टिप्स (special tips) बताएगा, ताकि आप अपनी नवरात्रि की शुरुआत सही और शुभ तरीके से कर सकें।
घटस्थापना क्यों है महत्वपूर्ण? (Why is Ghatasthapana important?)
घटस्थापना, जिसे कलश स्थापना के नाम से भी जाना जाता है, देवी दुर्गा का आह्वान करने और उन्हें अपने घर में आमंत्रित करने का एक तरीका है। यह ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पंचतत्व) – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक है। कलश में रखा जल, जौ और अन्य सामग्री समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसा माना जाता है कि घटस्थापना करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
घटस्थापना की तैयारी – जरूरी सामग्री (Ghatasthapana Preparation: Essential Items)
घटस्थापना के लिए आपको इन सामग्रियों की आवश्यकता होगी:
- मिट्टी का कलश (Clay pot)
- गंगाजल या साफ पानी (Ganga Jal or clean water)
- जौ (Barley)
- हल्दी की गांठ (Turmeric root)
- सुपारी (Betel nut)
- सिक्का (Coin)
- अक्षत (चावल) (Akshat – rice)
- आम या अशोक के पत्ते (Mango or Ashoka leaves)
- नारियल (Coconut)
- लाल कपड़ा (Red cloth)
- मिट्टी (Clean soil)
- मिट्टी का ढक्कन (Lid for the pot)
- फूल, माला (Flowers, garlands)
- रोली, मौली (Roli, Mauli)
घटस्थापना की विधि
- सबसे पहले, घर में एक साफ-सुथरा और शांत स्थान चुनें। इसे अच्छी तरह से साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें।
- एक चौड़ी मिट्टी की परत लें और उसमें साफ मिट्टी डालें। अब इसमें जौ के दाने (Barley seeds) बिखेर दें। इस परत को थोड़ा गीला रखें। यह जौ 9 दिनों तक बढ़ेंगे, जो आपकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
- अब कलश लें और उस पर मौली बांधें। कलश के अंदर थोड़ा गंगाजल, अक्षत, सुपारी, हल्दी की गांठ और एक सिक्का डालें।
- कलश को जौ वाली परत के बीच में रखें। इसे स्थापित करने से पहले, कलश पर स्वास्तिक (Swastika) बनाएं और रोली से तिलक करें।
- एक नारियल लें और उसे लाल कपड़े में लपेट दें। नारियल पर मौली बांधें।
- कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें। फिर इन पत्तों के ऊपर नारियल को रखें, जिसका मुख आपकी तरफ हो।
- अब, देवी दुर्गा का ध्यान करें और उन्हें अपने घर में पधारने के लिए आमंत्रित करें। मंत्रों का जाप करें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- घटस्थापना के बाद, देवी दुर्गा की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2026
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2026 के बारे में जानकारी के लिए, आपको पंचांग (Panchang) देखना होगा। घटस्थापना हमेशा प्रतिपदा तिथि (Pratipada Tithi) को ही होती है। इस वर्ष (This year) 2026 में, नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर 2026 को शुरू हो रहा है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
- प्रतिपदा तिथि आरंभ – अक्टूबर 10, 2026 को 09:19 पी एम बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त – अक्टूबर 11, 2026 को 09:30 पी एम बजे
- शुभ मुहूर्त – 06:19 AM से 10:12 AM
कुछ महत्वपूर्ण बातें
- राहुकाल (Rahukal) में घटस्थापना नहीं करनी चाहिए।
- अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat) घटस्थापना के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
- आप चाहें तो अपने पुरोहित (Priest) से भी शुभ मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।
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