“बिल्व निमंत्रण 2026” दुर्गा पूजा के पावन उत्सव की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक है। वर्ष 2026 में, यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान 16 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हर वर्ष की तरह, शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि को “बिल्व निमन्त्रण” का महापर्व मनाया जाता है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे की कथा भी उतनी ही रोचक और प्रेरणादायक है। 2026 में भी, यह शुभ अनुष्ठान (auspicious ritual) बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। इस ब्लॉग में हम बिल्व निमन्त्रण की अद्भुत कथा, इसका महत्व और इसे क्यों इतना शुभ माना जाता है, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
बिल्व निमन्त्रण क्या है?
बिल्व निमन्त्रण का अर्थ है, देवी दुर्गा को उनकी पूजा के लिए आमंत्रित करना। नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा मुख्य रूप से नौ दिनों तक की जाती है, जिसकी शुरुआत घटस्थापना से होती है। लेकिन, शारदीय नवरात्रि की पूजा का विशेष महत्व बिल्व निमन्त्रण से जुड़ा है, जो षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन, देवी दुर्गा की मूर्ति या कलश को बेल के पेड़ के पास स्थापित किया जाता है और उन्हें आमंत्रित किया जाता है कि वे उस मूर्ति में विराजमान होकर भक्तों की पूजा स्वीकार करें।
बिल्व निमन्त्रण की अद्भुत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बिल्व निमन्त्रण की परंपरा का सीधा संबंध भगवान राम और रावण के युद्ध से है। यह कथा बताती है कि जब भगवान राम को रावण पर विजय प्राप्त करनी थी, तो उन्होंने देवी दुर्गा की पूजा करने का निर्णय लिया। भगवान राम ने देवी को प्रसन्न करने के लिए शतचंडी यज्ञ (a special ritual) का आयोजन किया।
यज्ञ के दौरान, उन्हें पता चला कि देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए 108 कमल के फूल अर्पित करने होंगे। भगवान राम ने सभी कमल के फूल एकत्रित किए, लेकिन जब वे अंतिम फूल अर्पित करने वाले थे, तो वह गायब हो गया। यह एक प्रकार की दैवीय परीक्षा थी। भगवान राम ने संकल्प लिया था कि वे पूजा को अधूरा नहीं छोड़ेंगे।
तब उन्हें याद आया कि उनके नयन (आंखें) कमल के समान हैं। उन्होंने अपनी एक आंख निकालकर देवी को अर्पित करने का निर्णय लिया। जैसे ही वे ऐसा करने वाले थे, देवी दुर्गा स्वयं प्रकट हुईं और उन्हें रोक दिया। देवी ने भगवान राम की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
देवी ने राम से कहा कि रावण का वध करने के लिए उन्हें अपनी शक्ति का आवाहन करना होगा। उन्होंने भगवान राम को शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि को बिल्व वृक्ष के नीचे आकर उनकी पूजा करने का आदेश दिया। देवी ने कहा कि वे बेल के पेड़ में ही वास करती हैं और राम की पूजा स्वीकार करेंगी।
इसी आदेश का पालन करते हुए, भगवान राम ने बेल के पेड़ के पास जाकर देवी की पूजा की और उन्हें रावण पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मिला। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि नवरात्रि की षष्ठी को बिल्व निमन्त्रण किया जाता है।
बिल्व निमन्त्रण क्यों माना जाता है शुभ?
बिल्व निमन्त्रण को अत्यंत शुभ (highly auspicious) माना जाता है, जिसके कई कारण हैं:
- यह अनुष्ठान देवी दुर्गा को पृथ्वी पर आने और भक्तों की पूजा स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करने का एक तरीका है। ऐसा माना जाता है कि इस अनुष्ठान के बिना, नवरात्रि की पूजा अधूरी रह जाती है।
- यह अनुष्ठान भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है। बिल्व निमन्त्रण करने से भक्तों को जीवन की बाधाओं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है।
- बिल्व वृक्ष को साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। बिल्व निमन्त्रण करने से घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन होता है।
- यह अनुष्ठान परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ लाता है। बिल्व निमन्त्रण के दिन सभी लोग मिलकर पूजा करते हैं, जिससे पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है।
बिल्व निमन्त्रण 2026 कैसे करें?
बिल्व निमन्त्रण का अनुष्ठान बहुत ही सरल और पवित्र होता है। इसे निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है:
- सबसे पहले, अपने घर के पास या मंदिर में स्थित एक बेल के पेड़ का चुनाव करें। यदि पेड़ न हो तो बेल के पत्तों और टहनी को भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- जिस स्थान पर बिल्व निमन्त्रण करना है, उस स्थान की अच्छी तरह से सफाई करें। वहां रंगोली बनाएं और फूलों से सजावट करें।
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि धूप, दीप, अगरबत्ती, फूल, प्रसाद, अक्षत, रोली, चंदन और लाल चुनरी तैयार रखें।
- मंत्रों का जाप करते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें। देवी से प्रार्थना करें कि वे आपके घर में आकर वास करें और आपकी पूजा स्वीकार करें।
- अंत में, देवी की आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।
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