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नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली ब्रह्मचारिणी माता कौन हैं? जानें पूजा विधि और महत्व (Navratri Day 2 – Maa Brahmacharini? Learn the Puja Vidhi and Significance)

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नवरात्रि, नौ दिनों का एक पवित्र पर्व (holy festival) है जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में से प्रत्येक दिन एक विशिष्ट देवी को समर्पित होता है, और दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन है। यह दिन न केवल आध्यात्मिक महत्व (spiritual significance) रखता है, बल्कि हमें जीवन के उन मूल्यों की याद भी दिलाता है जो एक सफल और सार्थक जीवन के लिए आवश्यक हैं। इस ब्लॉग में, हम जानेंगे कि देवी ब्रह्मचारिणी कौन हैं, उनकी पूजा विधि क्या है, और इस दिन का क्या महत्व है।

ब्रह्मचारिणी माता कौन हैं?

“ब्रह्मचारिणी” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: “ब्रह्म” (अर्थात तपस्या) और “चारिणी” (अर्थात आचरण करने वाली)। इस प्रकार, ब्रह्मचारिणी का अर्थ है “वह जो तपस्या का आचरण करती है”। देवी ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा रूप हैं और उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।

यह रूप देवी पार्वती का ही है, जिन्होंने नारद मुनि की सलाह पर भगवान शिव को पाने के लिए हजारों वर्षों तक बिना अन्न-जल के तपस्या की। उनकी तपस्या इतनी कठोर थी कि उनका शरीर एकदम दुर्बल हो गया था। इस तपस्या के दौरान, उन्होंने केवल बेलपत्र, सूखे पत्ते और जल ही ग्रहण किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

ब्रह्मचारिणी माता के रूप का वर्णन इस प्रकार है:

  • स्वरूप – उनके दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल (Kamandala) होता है।
  • वस्त्र – वह सफेद वस्त्र धारण करती हैं।
  • प्रतीक – वह त्याग, तपस्या, वैराग्य (detachment), और पवित्रता का प्रतीक हैं।

नवरात्रि के दूसरे दिन का महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम, धैर्य (patience), और तपस्या (austerity) की आवश्यकता होती है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि आत्म-नियंत्रण (self-control) और त्याग ही हमें हमारे लक्ष्यों तक पहुंचा सकते हैं।

ब्रह्मचारिणी माता की पूजा करने से हमें एकाग्रता (concentration) और आत्मविश्वास (self-confidence) प्राप्त होता है। यह हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है।

पूजा विधि (Puja Vidhi)

नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माता की पूजा निम्नलिखित विधि से की जाती है:

  • ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta) में उठें, स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। अपने पूजा घर को साफ करें।
  • देवी ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
  • पूजा शुरू करने से पहले देवी के सामने हाथ जोड़कर संकल्प लें।
  • पूजा सामग्री – लाल फूल, चंदन, धूप-दीप, कुमकुम, अक्षत (चावल), मिश्री (sugar candy), फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल का मिश्रण) ।
  • देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें। ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः (Om Devi Brahmacharinyai Namah), दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
  • देवी ब्रह्मचारिणी की कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में देवी की आरती करें। मिश्री और फल का भोग लगाएं और भक्तों में प्रसाद बांटें।

ब्रह्मचारिणी माता का मंत्र

देवी ब्रह्मचारिणी का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है: या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ यह मंत्र हमें याद दिलाता है कि देवी ब्रह्मचारिणी सभी प्राणियों में विद्यमान हैं।

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