Shani Dev

शनि त्रयोदशी व्रत कथा

Shani Trayodashi Vrat Katha Hindi

Shani DevVrat Katha (व्रत कथा संग्रह)हिन्दी
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शनि त्रयोदशी (जिसे शनि प्रदोष भी कहा जाता है) की कथा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह व्रत भगवान शिव और शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष है। यहाँ शनि त्रयोदशी की पौराणिक कथा दी गई है:

|| शनि त्रयोदशी व्रत कथा ||

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था जिसकी मृत्यु के बाद उसकी पत्नी अत्यंत दरिद्र हो गई। वह अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवन यापन करती थी। वह ब्राह्मणी भगवान शिव की परम भक्त थी और प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) का पालन पूरी श्रद्धा से करती थी।

एक दिन जब वह भिक्षा मांगकर लौट रही थी, तो उसे नदी किनारे एक बालक मिला जो विदर्भ देश का राजकुमार था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर राज्य छीन लिया था और वह असहाय भटक रहा था। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई और वह उसे अपने घर ले आई और अपने पुत्र के समान पालने लगी।

कुछ समय बाद, ब्राह्मणी दोनों बालकों को लेकर ऋषि शाण्डिल्य के आश्रम गई। वहाँ ऋषि ने उन्हें शनि प्रदोष व्रत की महिमा सुनाई और विधि-विधान बताया। ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने नियमपूर्वक यह व्रत करना शुरू किया।

एक बार राजकुमार वन में विहार कर रहा था, जहाँ उसकी भेंट ‘अंशुमती’ नामक गंधर्व कन्या से हुई। वे एक-दूसरे पर मोहित हो गए। गंधर्व कन्या के पिता ने जब देखा कि बालक विदर्भ का राजकुमार है, तो उन्होंने भगवान शिव की प्रेरणा से अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया।

राजकुमार ने गंधर्व सेना की सहायता से अपने शत्रुओं पर आक्रमण किया और अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त कर लिया। उसने उस गरीब ब्राह्मणी और उसके पुत्र को ससम्मान महल में बुलाकर मंत्री पद और सुख-सुविधाएं दीं।

जैसे ब्राह्मणी और राजकुमार के दिन फिरे, वैसे ही शनि त्रयोदशी का व्रत करने वाले और कथा सुनने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और शनि देव व महादेव की कृपा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

|| शनि त्रयोदशी व्रत के लाभ ||

  • शनि दोष से मुक्ति – साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं।
  • संतान सुख – इस व्रत को करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
  • कार्य सिद्धि – रुके हुए काम और व्यापार में प्रगति होती है।

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, काले तिल का दान करें और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शाम के समय (प्रदोष काल) में भगवान शिव का अभिषेक करना सर्वोत्तम माना जाता है।

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