“विद्यारम्भम्” (विद्यारंभ संस्कार) हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है, जो बच्चे की शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह संस्कार विशेष रूप से 4 मार्च, बुधवार (विजयादशमी या वसंत पंचमी जैसे अवसरों के समीप) और अन्य शुभ मुहूर्तों में मनाया जाएगा।
भारतीय संस्कृति में विद्यारम्भ संस्कार (Vidyarambha Samskara) का एक विशेष स्थान है। यह वह पवित्र क्षण है जब एक बच्चा औपचारिक रूप से ज्ञान की दुनिया में अपना पहला कदम रखता है। यह संस्कार सिर्फ पढ़ाई शुरू करने का एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान की देवी माँ सरस्वती (Goddess Saraswati) का आह्वान करने और बच्चे के जीवन में शिक्षा के महत्व को स्थापित करने का एक शुभ कार्य है। साल 2026 में, आपके लाडले या लाडली के लिए यह शुभ यात्रा कब शुरू होगी, आइए जानते हैं।
विद्यारम्भ संस्कार – क्या और क्यों?
विद्यारम्भ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘विद्या’ जिसका अर्थ है ज्ञान या शिक्षा, और ‘आरम्भ’ जिसका अर्थ है शुरुआत। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस संस्कार को एक निश्चित आयु (आमतौर पर 3 से 5 वर्ष के बीच) और शुभ मुहूर्त (Auspicious Time) में किया जाना चाहिए ताकि बच्चे का मन पढ़ाई में लगे और उसे माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो।
- उद्देश्य – इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य बच्चे को अक्षर-ज्ञान (Initial Learning of Alphabets) कराना, उसकी बौद्धिक क्षमताओं को विकसित करना और उसे जीवन में सफल होने के लिए प्रेरित करना है।
- महत्व – शुभ मुहूर्त में किया गया यह संस्कार बच्चे के भावी शैक्षणिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और उसे एकाग्रता, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करता है।
सरस्वती पूजन और अक्षर-अभ्यास का महत्व
विद्यारम्भ के दिन माँ सरस्वती का पूजन (Saraswati Pujan) किया जाता है। उन्हें ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है।
- सरस्वती पूजन – इस दिन बच्चे की किताबें, कॉपियाँ, पेन और संगीत वाद्य यंत्रों को माँ सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर के सामने रखा जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि बच्चा अपनी शिक्षा की यात्रा देवी के चरणों में समर्पित कर रहा है।
- अक्षर-अभ्यास – पूजन के बाद, गुरु या परिवार का कोई बड़ा सदस्य बच्चे की उंगली पकड़कर स्लेट या चावलों पर ‘ॐ’ (Om) या ‘श्री’ (Shree) जैसे पवित्र अक्षर लिखवाता है। इसे ही अक्षर-अभ्यास (Akshar-Abhyas) कहते हैं। यह अक्षर-अभ्यास बच्चे के मन में ज्ञान के प्रति एक गहरा सम्मान पैदा करता है।
विद्यारम्भम् 2026 के कुछ महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त
विद्यारम्भ के लिए बसंत पंचमी (22 फरवरी 2026) को सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। इसके अतिरिक्त, वर्ष के दौरान अन्य तिथियाँ भी शुभ हैं:
- जनवरी-फरवरी – उत्तरायण के दौरान शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया और पंचमी तिथियाँ श्रेष्ठ हैं।
- मई-जून – अक्षय तृतीया के आसपास के मुहूर्त विशेष फलदायी होते हैं।
- सितंबर-अक्टूबर – विजयदशमी (दशहरा) को भी स्वयं-सिद्ध मुहूर्त माना जाता है।
विद्यारम्भ संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री (Puja Samagri)
इस शुभ कार्य को विधि-पूर्वक करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
- माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र।
- हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल)।
- फूल (विशेषकर पीले या सफेद), माला।
- एक नई स्लेट या पाटी, खड़िया (Chalk) या कलम (Pen)।
- बच्चे की पहली नई किताब/कॉपी।
- मिठाई और फल (नैवेद्य)।
- गंगाजल और शुद्ध जल, दीपक और धूप।
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