भारत के किसी भी गांव या शहर के मंदिर के पास जाइए, आपको एक पेड़ जरूर मिलेगा जिसके तने पर लाल धागे (Kalawa) बंधे होंगे, नीचे दीये जल रहे होंगे और लोग सिर झुकाकर प्रार्थना कर रहे होंगे। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं पीपल के पेड़ (Peepal Tree) की।
बचपन से हम सुनते आए हैं कि “पीपल को काटना पाप है” या “शनिवार को पीपल के नीचे दीया जलाना चाहिए।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल में हजारों किस्म के पेड़ हैं, फिर हमारे ऋषियों और पूर्वजों (Ancestors) ने सिर्फ पीपल को ही इतना महत्व (Importance) क्यों दिया? क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान (Science) छिपा है?
चलिए, आज इस ‘ऑक्सीजन के भंडार’ यानी पीपल के पेड़ की महिमा को धर्म और विज्ञान, दोनों चश्मों से देखते हैं।
धार्मिक मान्यताएं – जहाँ बसते हैं तीनों देव (Religious Beliefs)
भारतीय संस्कृति में पीपल को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि ‘देवता’ का दर्जा मिला हुआ है। इसे ‘अश्वत्थ’ (Ashvattha) भी कहा जाता है।
- त्रिदेवों का वास – शास्त्रों के अनुसार, पीपल एकमात्र ऐसा पेड़ है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों का वास माना जाता है। कहा जाता है कि इसकी जड़ (Root) में ब्रह्मा, तने (Trunk) में विष्णु और पत्तों (Leaves) में भगवान शिव रहते हैं। इसलिए पीपल की पूजा करने का मतलब है, एक साथ तीनों देवताओं की आराधना करना।
- श्री कृष्ण का स्वरूप – भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने स्वयं कहा है, “वृक्षों में मैं पीपल हूँ।” (Among trees, I am the Ashvattha). जब भगवान खुद अपनी तुलना इस पेड़ से कर रहे हों, तो इसका महत्व अपने आप बढ़ जाता है।
- शनि दोष और पूर्वज – माना जाता है कि शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाने से शनि देव (Shani Dev) प्रसन्न होते हैं। साथ ही, पितृ पक्ष में पूर्वजों की शांति के लिए पीपल को जल चढ़ाना सबसे पुण्य का काम माना जाता है।
विज्ञान क्या कहता है? (The Scientific Logic)
अब आते हैं उस पहलू पर जो आज की जनरेशन (Generation) को सबसे ज्यादा अपील करता है – लॉजिक और साइंस। हमारे पूर्वजों को शायद ‘फोटोसिंथेसिस’ (Photosynthesis) शब्द नहीं पता था, लेकिन उन्हें पेड़ की तासीर की पूरी जानकारी थी।
24 घंटे ऑक्सीजन की फैक्ट्री (The Oxygen Bank)
ज्यादातर पेड़-पौधे दिन में ऑक्सीजन देते हैं और रात में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) छोड़ते हैं। लेकिन पीपल उन गिने-चुने पेड़ों में से एक है जो रात में भी ऑक्सीजन (Oxygen) छोड़ने की क्षमता रखता है।
लॉजिक – इसे वैज्ञानिक भाषा में Crassulacean Acid Metabolism (CAM) कहते हैं। चूंकि यह पेड़ हमें 24×7 प्राणवायु (Life-giving air) देता है, इसलिए ऋषियों ने इसे ‘पूजनीय’ घोषित कर दिया ताकि लोग इसे काटने की गलती न करें और पर्यावरण (Environment) सुरक्षित रहे।
बीमारियों का रामबाण इलाज (Ayurvedic Benefits)
आयुर्वेद (Ayurveda) में पीपल को ‘औषधालय’ माना जाता है। इसके पत्ते, छाल और जड़ का उपयोग अस्थमा, त्वचा रोग (Skin diseases) और पेट की समस्याओं को ठीक करने में किया जाता है।
तर्क – जो पेड़ इंसानों की जान बचा सकता है और उन्हें स्वस्थ रख सकता है, उसे सम्मान देना तो बनता है।
ठंडक और मानसिक शांति (Mental Peace)
पीपल की छांव (Shade) अन्य पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ठंडी होती है। जब हवा पीपल के पत्तों से टकराती है, तो एक विशेष ध्वनि (Sound) उत्पन्न होती है और हवा शुद्ध होकर बहती है। यह वातावरण मानसिक तनाव (Stress) को कम करता है और दिमाग को शांत करता है। शायद इसीलिए बुद्ध को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान (Enlightenment) प्राप्त हुआ था।
रात में पीपल के पास जाने से क्यों डरते हैं लोग? (The Ghost Myth)
आपने अक्सर सुना होगा, “रात को पीपल के नीचे मत जाना, वहां भूत रहते हैं!” इस डर के पीछे भी एक व्यावहारिक कारण (Practical Reason) था। भले ही पीपल थोड़ी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ता है, लेकिन रात के समय घने पेड़ों के नीचे कार्बन डाइऑक्साइड का घनत्व (Density) बढ़ सकता है या वहां हवा का भारीपन महसूस हो सकता है।
पुराने समय में बिजली नहीं होती थी, और पीपल का पेड़ बहुत विशाल और घना होता है। रात के अंधेरे में जंगली जानवरों या साँपों के छिपने के लिए यह आदर्श जगह थी। लोगों की सुरक्षा (Safety) के लिए हमारे बड़ों ने ‘भूत’ का डर पैदा किया ताकि लोग रात में वहां न जाएं और सुरक्षित रहें।
हमारी जिम्मेदारी – पूजा के साथ संरक्षण
तो अगली बार जब आप किसी को पीपल की पूजा करते देखें, तो उन्हें अंधविश्वासी समझने की गलती न करें। वे अनजाने में ही सही, लेकिन धरती के सबसे बड़े ‘इको-फ्रेंडली’ (Eco-friendly) साथी का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
पीपल की पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति (Nature) का सम्मान करना ही सच्चा धर्म है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि हम पेड़ों के बिना अधूरे हैं। हमारे पूर्वजों ने आस्था के जरिए हमें पर्यावरण संरक्षण (Conservation) का जो पाठ पढ़ाया है, वह आज के ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के दौर में और भी जरूरी हो गया है। इसलिए, पीपल के आगे सिर्फ सिर न झुकाएं, बल्कि मौका मिले तो एक पीपल का पौधा (Sapling) जरूर लगाएं। यही सच्ची पूजा होगी।
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