दक्षिण भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से तमिल समुदाय के लिए ‘थाई पूसम’ (Thai Pusam) केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र, भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की विजय और शक्ति को समर्पित है। अगर आप साल 2026 में थाई पूसम की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक पूर्ण मार्गदर्शक (Complete Guide) साबित होगा।
थाई पूसम 2026 – कब है? तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर और तमिल पंचांग के अनुसार, थाई पूसम का पर्व ‘थाई’ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जब ‘पुष्य’ नक्षत्र (Pusam Star) प्रबल होता है।
- थाई पूसम तिथि – 1 फरवरी, 2026 (रविवार)
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 31 जनवरी 2026 को दोपहर से।
- पूर्णिमा तिथि समाप्त – 1 फरवरी 2026 की शाम तक।
- नक्षत्र – पुष्य नक्षत्र का संयोग इस दिन को बेहद शुभ और फलदायी बना रहा है।
- नोट – स्थानीय सूर्योदय और पंचांग भेद के कारण समय में मामूली अंतर हो सकता है, इसलिए उदय तिथि के अनुसार 1 फरवरी को ही मुख्य उत्सव मनाया जाएगा।
थाई पूसम का आध्यात्मिक महत्व
थाई पूसम का इतिहास बुराई पर अच्छाई की जीत से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने भगवान मुरुगन को ‘वेल’ (दिव्य भाला) प्रदान किया था ताकि वे असुर तारकासुर और उसके भाइयों का वध कर सकें।
यह दिन साहस, पवित्रता और बाधाओं के विनाश का प्रतीक है। भक्त इस दिन अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और कष्टों से मुक्ति के लिए भगवान मुरुगन की शरण में जाते हैं।
भगवान मुरुगन की पूजा विधि
यदि आप घर पर या मंदिर में मुरुगन स्वामी की पूजा करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें:
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदियों के जल का उपयोग करें।
- इस दिन पीले और नारंगी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग मुरुगन स्वामी को प्रिय है।
- भगवान मुरुगन की प्रतिमा या चित्र को एक चौकी पर स्थापित करें। उनके ‘वेल’ (भाले) की पूजा विशेष रूप से करें।
- मुरुगन स्वामी को पंचामृत, दूध और शहद से अभिषेक कराएं।
- भगवान को पीले रंग के फल, मिश्री, पंचामृत और मीठा पोंगल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान “ॐ शरवण भवाय नमः” (Om Sharavana Bhavaya Namaha) का 108 बार जाप करें।
थाई पूसम के विशेष अनुष्ठान और परंपराएं
थाई पूसम अपनी कठिन तपस्या और अनूठे रीति-रिवाजों के लिए दुनिया भर में मशहूर है:
- कावड़ी अट्टम (Kavadi Attam) – भक्त अपने कंधों पर लकड़ी का ढांचा (कावड़ी) उठाते हैं, जिसे फूलों और मोर पंखों से सजाया जाता है। यह भगवान के प्रति समर्पण का भार ढोने का प्रतीक है।
- पाल कुडम (Paal Kudam) – महिलाएं और पुरुष सिर पर दूध के कलश (Milk Pots) रखकर मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं। इस दूध का उपयोग बाद में भगवान के अभिषेक के लिए किया जाता है।
- शरीर पर छेद करवाना (Piercing) – कई श्रद्धालु अपनी जीभ या गालों पर छोटा ‘वेल’ (भाला) चुभवाते हैं। यह मौन व्रत और असीम सहनशक्ति का प्रदर्शन होता है।
साल 2026 में सुख-समृद्धि के लिए विशेष उपाय
अगर आप जीवन में प्रगति चाहते हैं, तो इस दिन ये उपाय जरूर करें:
- कर्ज से मुक्ति – भगवान मुरुगन को 6 मुखी दीपक (घी का) अर्पित करें।
- संतान सुख – स्कंद षष्ठी कवच का पाठ करें और छोटे बच्चों को फल बांटें।
- नौकरी/व्यवसाय – मंदिर में मोर पंख भेंट करें और “वेल” का ध्यान करें।
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