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भुवनेश्वरी जयंती 2026 – शक्ति की अधीश्वरी देवी का जन्मोत्सव, जानें पूजा विधि और रहस्य, क्यों यह तिथि तांत्रिक साधकों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है

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भुवनेश्वरी जयंती का पर्व माँ भुवनेश्वरी को समर्पित है, जो दस महाविद्याओं में चौथी शक्ति मानी जाती हैं। वर्ष 2026 में, भुवनेश्वरी जयंती 22 सितंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी (पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल द्वादशी)।

माँ भुवनेश्वरी को “ब्रह्मांड की रानी” माना जाता है। उनकी साधना से साधक को ऐश्वर्य, ज्ञान और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे संपूर्ण सृष्टि का आधार हैं और उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य एवं ममतामयी है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और सुख-समृद्धि के लिए माँ का विशेष पूजन व बीज मंत्रों का जाप करते हैं।

हर साल की तरह, 2026 में भी भुवनेश्वरी जयंती का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह दिन माँ भुवनेश्वरी के जन्मोत्सव का प्रतीक है, जो दस महाविद्याओं में से चौथी महाविद्या मानी जाती हैं। अपनी अलौकिक शक्ति और सौंदर्य के लिए विख्यात, माँ भुवनेश्वरी ब्रह्मांड की संरक्षिका और सर्वोच्च सत्ता का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस विशेष दिन पर उनकी उपासना से भक्तों को असीम सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भुवनेश्वरी जयंती 2026 कब है?

भुवनेश्वरी जयंती भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में, यह शुभ तिथि 22 सितंबर, मंगलवार को पड़ेगी। यह दिन माँ भुवनेश्वरी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

माँ भुवनेश्वरी – ब्रह्मांड की अधीश्वरी

“भुवनेश्वरी” नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – “भुवन” जिसका अर्थ है ब्रह्मांड और “ईश्वरी” जिसका अर्थ है स्वामिनी। इस प्रकार, माँ भुवनेश्वरी ब्रह्मांड की स्वामिनी हैं, जो सृष्टि, स्थिति और संहार तीनों कार्यों को नियंत्रित करती हैं। उन्हें ‘राज राजेश्वरी’ और ‘जगतधात्री’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • स्वरूप – माँ भुवनेश्वरी का स्वरूप अत्यंत तेजोमय और भव्य है। वे चार भुजाओं वाली हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे पाश और अंकुश धारण करती हैं, जो संसार के बंधनों और नियंत्रण का प्रतीक हैं। शेष दो भुजाएँ वरद और अभय मुद्रा में होती हैं, जो भक्तों को आशीर्वाद और निर्भयता प्रदान करती हैं। उनका वर्ण सिंदूरी होता है और वे कमल के आसन पर विराजमान होती हैं।
  • महत्व – माँ भुवनेश्वरी की उपासना से भक्तों को भौतिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। वे ज्ञान, धन, संतान और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति भयमुक्त होता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति पाता है।

भुवनेश्वरी जयंती 2026 का महत्व और पूजा विधि

भुवनेश्वरी जयंती के दिन भक्तगण विधि-विधान से माँ भुवनेश्वरी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन व्रत रखने और माँ के मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है।

  • जयंती के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प लें और माँ भुवनेश्वरी का आह्वान करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें और एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ भुवनेश्वरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • माँ को लाल पुष्प, रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य (खीर, हलवा, फल) अर्पित करें।
  • माँ भुवनेश्वरी के बीज मंत्र “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं भुवनेश्वर्यै नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। आप “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भुवनेश्वर्यै नमः” का भी जाप कर सकते हैं।
  • पूजा के अंत में माँ भुवनेश्वरी की आरती करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद सभी में वितरित करें।
  • इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

यह तिथि तांत्रिक साधकों के लिए अत्यंत शुभ क्यों मानी जाती है?

भुवनेश्वरी जयंती का दिन तांत्रिक साधकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके पीछे कई गूढ़ रहस्य और कारण हैं:

  • महाविद्या स्वरूप – माँ भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जो तांत्रिक साधनाओं का केंद्रबिंदु हैं। इन महाविद्याओं की उपासना से विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
  • सृष्टि की अधिष्ठात्री – माँ भुवनेश्वरी ब्रह्मांड की सृजनकर्ता और नियंत्रक हैं। तांत्रिक साधक सृष्टि के रहस्यों को जानने और उस पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए उनकी उपासना करते हैं। इस दिन उनकी ऊर्जा ब्रह्मांड में अपने चरम पर होती है, जिससे साधकों को उच्चतर अनुभूतियाँ प्राप्त होती हैं।
  • वाक् सिद्धि – माँ भुवनेश्वरी ‘वाक् शक्ति’ की देवी भी मानी जाती हैं। तांत्रिक साधक वाक् सिद्धि प्राप्त करने के लिए उनकी विशेष साधना करते हैं, जिससे उनके वचन सिद्ध होते हैं।
  • राज राजेश्वरी – उन्हें ‘राज राजेश्वरी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है राजाओं की अधिष्ठात्री। तांत्रिक साधक लौकिक और अलौकिक दोनों प्रकार की शक्तियों पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए उनकी साधना करते हैं।
  • मोक्ष और मुक्ति – तांत्रिक साधना का अंतिम लक्ष्य मोक्ष और मुक्ति की प्राप्ति है। माँ भुवनेश्वरी की कृपा से साधक सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
  • कुंडलिनी जागरण – यह माना जाता है कि भुवनेश्वरी जयंती पर की गई साधना से कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने में मदद मिलती है, जिससे साधक आध्यात्मिक उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच सकता है।

कुछ रहस्य और मान्यताएँ

  • माना जाता है कि भुवनेश्वरी जयंती पर माँ भुवनेश्वरी अपने भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन भी देती हैं, यदि साधक की भक्ति सच्ची और एकाग्र हो।
  • इस दिन कुछ विशेष तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनसे असाध्य रोगों से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
  • माँ भुवनेश्वरी की उपासना से व्यक्ति का ओज और तेज बढ़ता है, जिससे वह समाज में मान-सम्मान प्राप्त करता है।

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