बड़ी देर भाई नंदलाला

|| बड़ी देर भाई नंदलाला || बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला । बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला । ग्वाल-बाल इक-इक से पूछे कहाँ है मुरली वाला रे बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला । कोई ना जाए कुञ्ज गलिन में, तुझ बिन कलियाँ चुनने को । तुझ…

श्री गोवर्धन महाराज

|| श्री गोवर्धन महाराज || श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ । श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ । तोपे* पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार । श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ । तेरे गले में कंठा साज…

लहर लहर लहरा गई रे मेरी मां की चुनरिया

|| लहर लहर लहरा गई रे मेरी मां की चुनरिया || लहर लहर लहरा गई रे, मेरी माँ की चुनरियाँ, माँ की चुनरियाँ, मेरी माँ की चुनरियाँ, लहर लहर लहरा गयी रे, मेरी माँ की चुनरियाँ ॥ उड़के चुनरिया बरसाने को पहुंची, उड़के चुनरिया बरसाने में पहुंची, राधा जी के मन को भा गई रे,…

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

|| नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे || नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम् । महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ॥१॥ प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्रांगभूता इमे सादरं त्वां नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम् शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये । अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम् सुशीलं जगद् येन नम्रं भवेत् श्रुतं चैव यत् कण्टकाकीर्णमार्गम् स्वयं स्वीकृतं…

वृन्दावन में हुकुम चले

|| वृन्दावन में हुकुम चले || वृन्दावन में हुकुम चले, बरसाने वाली का, कान्हा भी दिवाना है, श्री राधे रानी का ॥वहां डाली डाली पर, वहां पत्ते पत्ते पर, राज राधे का चलता, गांव के हर रस्ते पर, चारो तरफ़ डंका बजता, वृषभानु दुलारी का, कान्हा भी दिवाना है, श्री राधे रानी का ॥ कोई…

ललिता पंचमी व्रत कथा

|| ललिता पंचमी व्रत कथा || शारदीय नवरात्रि के समय, आश्विन शुक्ल पंचमी को ललिता पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व देवी ललिता को समर्पित है, जो माता सती पार्वती का ही एक रूप मानी जाती हैं। इस दिन भक्त ललिता पंचमी व्रत रखते हैं। देवी ललिता को ‘त्रिपुर सुंदरी’ भी कहा जाता…

ज्वाला माता की कथा एवं पूजा विधि

|| श्री ज्वाला देवी की पूजा के विधान || माता श्री ज्वाला देवी की पूजा तीन तरह से होती है- पंचोपचार विधि– पंचोपचार विधि से पूजन करने के लिए गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि मां की सेवा में प्रस्तुत करें और निवेदन करें कि हे माता! मैं अज्ञानी मूर्ख प्राणी हूं। मुझे पूजा पाठ…

जिस भजन में राम का नाम ना हो

|| जिस भजन में राम का नाम ना हो || जिस भजन में राम का नाम ना हो, उस भजन को गाना ना चाहिए ॥ चाहे बेटा कितना प्यारा हो, उसे सिर पे चढ़ाना ना चाहिए, चाहे बेटी कितनी लाडली हो, घर घर ने घुमाना ना चाहिए, जिस भजन में राम का नाम न हों,…

मैं तो आरती उतारूँ रे

|| मैं तो आरती उतारूँ रे || मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की । मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की । जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥ जय जय संतोषी माता जय जय माँ जय जय संतोषी माता जय जय माँ बड़ी ममता है बड़ा प्यार माँ की आँखों मे।…

सारे तीर्थ धाम आपके चरणो में

|| सारे तीर्थ धाम आपके चरणो में || सारे तीर्थ धाम आपके चरणो में । हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में । हृदय में माँ गौरी लक्ष्मी, कंठ शारदा माता है । जो भी मुख से वचन कहें, वो वचन सिद्ध हो जाता है । हैं गुरु ब्रह्मा, हैं गुरु विष्णु, हैं शंकर भगवान आपके…

तेरी मंद-मंद मुस्कनिया

|| तेरी मंद-मंद मुस्कनिया || तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे, बलिहार संवारे जू । तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे, बलिहार संवारे जू । तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे, बलिहार संवारे जू ॥ तेरे बाल बड़े घुंगराले, बादल जो कारे कारे । तेरी मोर मुकट लटकनिया पे, बलिहार संवारे जू । तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे, बलिहार संवारे जू ॥…

दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी

|| दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी || दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से आँखड़ली चुराकर बाबा, जासी कठे मेरे से आँखड़ली चुराकर बाबा, जासी कठे मेरे से दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से आँखड़ली चुराकर बाबा, जासी कठे मेरे से खाटू वाले श्याम तेरी शरण में…

राम कहानी सुनो रे राम कहानी

|| राम कहानी सुनो रे राम कहानी || राम कहानी सुनो रे राम कहानी । कहत सुनत आवे आँखों में पानी । श्री राम, जय राम, जय-जय राम ॥ दशरथ के राज दुलारे, कौशल्या की आँख के तारे । वे सूर्य वंश के सूरज, वे रघुकुल के उज्जयारे । राजीव नयन बोलें मधुभरी वाणी। ॥…

चली जा रही है उमर धीरे धीरे

|| चली जा रही है उमर धीरे धीरे || चली जा रही है उमर धीरे धीरे, पल पल यूँ आठों पहर धीरे धीरे, चली जा रही हैं उमर धीरे धीरे, जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे, मिल जाएगा वो सजन धीरे धीरे ॥ बचपन भी जाए जवानी भी जाए, बुढ़ापे का होगा असर धीरे धीरे,…

जुग जुग जियसु ललनवा

|| जुग जुग जियसु ललनवा || जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो, ललना लाल होइहे, कुलवा के दीपक मनवा में, आस लागल हो ॥ आज के दिनवा सुहावन, रतिया लुभावन हो, ललना दिदिया के होरिला जनमले, होरिलवा बडा सुन्दर हो ॥ नकिया तहवे जैसे बाबुजी के, अंखिया ह माई के हो ललन…

नगर मे जोगी आया

|| नगर मे जोगी आया || नगर मे जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया। ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे, ऊँचा है तेरा धाम, हे कैलाश के वासी भोले, हम करते है तुझे प्रणाम ॥ नगर मे जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया, अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ ना पाया, यशोदा के घर…

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने

|| रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने || रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है, जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है…

नटवर नागर नंदा

|| नटवर नागर नंदा || नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नन्दा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा ॥ तू ही नटवर तू ही नागर, तू ही नटवर तू ही नागर, तू ही बालमुकुन्दा, भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नन्दा, भजो…

जय जय सुरनायक

|| जय जय सुरनायक || जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता । गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता ॥ पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई । जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई ॥ जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा । अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा…

श्री विद्या कवचम्

॥ श्री विद्या कवचम् ॥ ॥ देव्युवाच ॥ देवदेव महादेव भक्तानां प्रीतिवर्धनम् । सूचितं यन्महादेव्याः कवचं कथयस्व मे ॥ ॥ महादेव उवाच ॥ श्रुणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं देवदुर्लभम् । न प्रकाश्यं परं गुह्यं साधकाभीष्टसिद्धिदम् ॥ कवचस्य ऋषिर्देवि दक्षिणामूर्तिरव्ययः । छन्दः पङ्क्तिः समुद्दिष्टं देवी त्रिपुरसुन्दरी ॥ धर्मार्थकाममोक्षाणां विनियोगस्तु साधने । वाग्भवः कामराजश्च शक्तिर्बीजं सुरेश्वरि ॥ ऐं…

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो

|| तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो || तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥ तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥ तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे । कोई ना अपना सिवा तुम्हारे ॥ तुम ही हो साथी, तुम…

श्री नवग्रह कवचम्

॥ श्री नवग्रह कवचम् ॥ ॥ ब्रह्मोवाच ॥ शिरो मे पातु मार्ताण्डो कपालं रोहिणीपतिः । मुखमङ्गारकः पातु कण्ठश्च शशिनन्दनः । बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनन्दनः । जठरञ्च शनिः पातु जिह्वां मे दितिनन्दनः । पादौ केतुः सदा पातु वाराः सर्वाङ्गमेव च । तिथयोऽष्टौ दिशः पान्तु नक्षत्राणि वपुः सदा । अंसौ राशिः सदा पातु योगाश्च स्थैर्यमेव…

जय जय श्री महाकाल

|| जय जय श्री महाकाल || नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥ भारत मध्ये स्वयंभू ज्योतिर्लिंग यजामहे हे परब्रह्म परमेश्वर शिव शंभू दयामहे शिप्रा के तट पे अवंतिका उज्जैनी नगरी महादेव के मनन में है मगन सगरी माँ हर सिद्धि पीठ का लिखा विराजे शिव शिव जापे आठ…

वैष्णव जन तो तेने कहिये भजन

|| वैष्णव जन तो तेने कहिये भजन || वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे । पर दुःखे उपकार करे तो ये, मन अभिमान न आणे रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे । सकल लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे । वाच काछ मन…

श्यामा आन बसों वृन्दावन में

|| श्यामा आन बसों वृन्दावन में || श्यामा आन बसों वृन्दावन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में । श्यामा रसते में बाग लगा जाना, फुल बीनुगी तेरी माला के लिए । तेरी बाट निहारूं कुंजन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में ॥ श्यामा आन बसों वृन्दावन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में…

श्री मातंगी कवच

॥ श्री मातङ्गी कवचम् ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ देवदेव महादेव सृष्टिसंहारकारक । मातङ्ग्याः कवचं ब्रूहि यदि स्नेहोऽस्ति ते मयि ॥ ॥ शिव उवाच ॥ अत्यन्तगोपनं गुह्यं कवचं सर्वकामदम् । तव प्रीत्या मयाऽऽख्यातं नान्येषु कथ्यते शुभे ॥ शपथं कुरु मे देवि यदि किञ्चित्प्रकाशसे । अनया सदृशी विद्या न भूता न भविष्यति ॥ शवासनां रक्तवस्त्रां युवतीं सर्वसिद्धिदाम्…

श्री मंगल कवचम्

॥ श्री मङ्गल कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ अस्य श्रीअङ्गारककवचस्तोत्रमन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, अङ्गारको देवता, भौमप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः । रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी चतुर्भुजो मेषगमो गदाभृत् । धरासुत शक्तिधरश्च शूली सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्त॥ अङ्गारकः शिरो रक्षेन्मुखं वै धरणीसुतः । श्रवौ रक्ताम्बरः पातु नेत्रे मे रक्तलोचनः ॥ नासां शक्तिधरः पातु मुखं मे…

श्री बृहस्पति कवचम्

॥ श्री बृहस्पति कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ अस्य श्रीबृहस्पतिकवचस्तोत्रमन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, गुरुर्देवता, गं बीजं, श्रीशक्तिः, क्लीं कीलकं, गुरुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः। अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञं सुरपूजितम् । अक्षमालाधरं शान्तं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥ बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः । कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मेऽभीष्टदायकः ॥ जिह्वां पातु सुराचार्यो नासां मे…

श्री चन्द्र कवचम्

॥ श्री चन्द्र कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ अस्य श्रीचन्द्रकवचस्तोत्रमन्त्रस्य गौतम् ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः, श्रीचन्द्रो देवता, चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः । समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् । वासुदेवस्य नयनं शङ्करस्य च भूषणम् ॥ एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् । शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः…

श्री भैरवी कवच

॥ श्री भैरवी कवचम् ॥ ॥ श्री देव्युवाच ॥ भैरव्याः सकला विद्याः श्रुताश्चाधिगता मया । साम्प्रतं श्रोतुमिच्छामि कवचं यत्पुरोदितम् ॥ त्रैलोक्यविजयं नाम शस्त्रास्त्रविनिवारणम् । त्वत्तः परतरो नाथ कः कृपां कर्तुमर्हति ॥ ॥ ईश्वर उवाच ॥ श्रुणु पार्वति वक्ष्यामि सुन्दरि प्राणवल्लभे । त्रैलोक्यविजयं नाम शस्त्रास्त्रविनिवारकम् ॥ पठित्वा धारयित्वेदं त्रैलोक्यविजयी भवेत् । जघान सकलान्दैत्यान् यधृत्वा मधुसूदनः ॥…

रवि प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि

॥ रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि ॥ रवि प्रदोष व्रत का पालन करने वाले व्यक्ति को प्रातः उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ हो जाना चाहिए। तत्पश्चात पूजा स्थल को स्वच्छ कर सूर्यदेव, भगवान शिव व देवी पार्वती का आवाहन करें। अब भगवान शिव को बेल पत्र तथा सूर्यदेव को अक्षत, फूल, धूप, दीप,…

श्री छिन्नमस्ता कवच

॥ श्री छिन्नमस्ता कवचम् ॥ ॥ देव्युवाच ॥ कथिताच्छिन्नमस्ताया या या विद्या सुगोपिताः । त्वया नाथेन जीवेश श्रुताश्चाधिगता मया ॥ इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं सर्वसूचितम् । त्रैलोक्यविजयं नाम कृपया कथ्यतां प्रभो ॥ ॥ भैरव उवाच ॥ श्रुणु वक्ष्यामि देवेशि सर्वदेवनमस्कृते । त्रैलोक्यविजयं नाम कवचं सर्वमोहनम् ॥ सर्वविद्यामयं साक्षात्सुरात्सुरजयप्रदम् । धारणात्पठनादीशस्त्रैलोक्यविजयी विभुः ॥ ब्रह्मा नारायणो रुद्रो धारणात्पठनाद्यतः…

श्री गरुड कवच

॥ श्री गरुड कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ अस्य श्रीगरुडकवचस्तोत्रमन्त्रस्य नारद भगवान् ऋषिः वैनतेयो देवता अनुष्टुप्छन्दः श्रीवैनतेयप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ॐ शिरो मे गरुडः पातु ललाटे विनितासुतः । नेत्रे तु सर्पहा पातु कर्णौ पातु सुराहतः ॥ १॥ नासिकां पातु सर्पारिः वदनं विष्णुवाहनः । सूर्येतालू च कण्ठे च भुजौ पातु महाबलः ॥ २॥…

श्री केतु कवच

॥ श्री केतु कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ ॐ अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्र महामन्त्रस्य त्र्यम्बक ॠषिः । अनुष्टुप्छन्दः । केतुर्देवता । कं बीजं । नमः शक्तिः । केतुरिति कीलकम् । केतुकृत पीडा निवारणार्थे, सर्वरोगनिवारणार्थे, सर्वशत्रुविनाशनार्थे, सर्वकार्यसिद्ध्यर्थे, केतुप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ केतुं करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् । प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम्…

श्री राहु कवच

॥ श्री राहु कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ ॐ अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमन्त्रस्य चन्द्रमा ऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, रां बीजम्, नमः शक्तिः, स्वाहा कीलकम्, राहुकृत पीडानिवारणार्थे, धनधान्य, आयुरारोग्य आदि समृद्धि प्राप्तयर्थे जपे विनियोगः ॥ प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम् । सैंहिकेयं करालास्यं लोकानामभयप्रदम् ॥ नीलाम्बरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः । चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरिरवान्…

मन में बसाकर तेरी मूर्ति

|| मन में बसाकर तेरी मूर्ति || मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारू में गिरधर तेरी आरती ॥ मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारू में गिरधर तेरी आरती ॥ करुणा करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवन, भव में फसी नाव मेरी तार दो भगवन, करुणा करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवन, भव में फसी नाव…

श्याम पुष्पांजलि श्री खाटू श्याम

|| श्याम पुष्पांजलि श्री खाटू श्याम || हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय, दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज, धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर सुजान, अनुपम छवि श्री श्याम की, दर्शन से कल्याण । श्याम श्याम तो मैं रटूं श्याम है जीवन प्राण, श्याम भक्त जग में बड़े उनको करूँ प्रणाम,…

साँसों की माला पे सिमरूं मैं

|| साँसों की माला पे सिमरूं मैं || साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम, साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम, साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी…

नवग्रह कवच

॥ नवग्रह कवचम् ॥ । ब्रह्मोवाच । शिरो मे पातु मार्ताण्डो कपालं रोहिणीपतिः । मुखमङ्गारकः पातु कण्ठश्च शशिनन्दनः । बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनन्दनः । जठरश्च शनिः पातु जिह्वां मे दितिनन्दनः । पादौ केतुः सदा पातु वाराः सर्वाङ्गमेव च । तिथयोऽष्टौ दिशः पान्तु नक्षत्राणि वपुः सदा । अंसौ राशिः सदा पातु योगाश्च स्थैर्यमेव च…

सांवली सूरत पे मोहन

|| सांवली सूरत पे मोहन || सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया । दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया ॥ एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा काजल लगा । तीसरा नज़रें मिलाना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया । दिल दीवाना हो गया, दिल…

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना भजन

|| छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना भजन || छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना कहते लोग इसे राम का दिवाना छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना पाँव में घूंघरु बांध के नाचे राम जी का नाम इसे प्यारा लागे राम ने भी देखो इसे खुब पहचाना ॥ छम…

आजु मिथिला नगरिया निहाल

|| आजु मिथिला नगरिया निहाल || आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया! शिश मणी मौरिया, कुण्डल सोहे कनमा, कारी कारी कजरारी जुलमी नयनमा, लाल चंदन सोहे इनके भाल सखिया, चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया! श्यामल-श्यामल, गोरे- गोरे, जोड़ीया जहान रे, अँखिया ना देखनी सुनलीं ने कान हे जुगे जुगे,…

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो

|| अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो || देखो देखो यह गरीबी, यह गरीबी का हाल, कृष्ण के दर पे यह विश्वास ले के आया हूँ। मेरे बचपन का दोस्त हैं मेरा श्याम, यही सोच कर मैं आस ले कर के आया हूँ ॥ अरे द्वारपालों कहना से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ…

राम नाम के हीरे मोती

|| राम नाम के हीरे मोती || राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली । कृष्ण नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली । ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊँ गली गली । ले लो रे कोई श्याम का प्यारा, शोर मचाऊँ गली गली । माया के दीवानों सुन…

हेरी सखी मंगल गावो री

|| हेरी सखी मंगल गावो री || चोख पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे पिया घर आवेंगे खबर सुनाऊ जो, खुशी ये बताऊँ जो, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ हेरी/ओरी सखी मंगल गावो री, धरती अम्बर सजाओ री, उतरेगी आज मेरे पिया की सवारी, हेरी कोई काजल लाओ री, मोहे काला टीका लगाओ री, उनकी…

शीश गंग अर्धंग पार्वती

|| शीश गंग अर्धंग पार्वती || शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी । नंदी भृंगी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुर सुखरासी ॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह बैठे हैं शिव अविनाशी । करत गान-गन्धर्व सप्त स्वर, राग रागिनी मधुरासी ॥ यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत, बोलत हैं वनके वासी । कोयल शब्द सुनावत सुन्दर, भ्रमर…

इतना तो करना स्वामी

|| इतना तो करना स्वामी || इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले ॥ श्री गंगा जी का तट हो, यमुना का वंशीवट हो, मेरा सांवरा निकट हो, जब प्राण तन से निकले, इतना तों करना स्वामी जब प्राण ॥ पीताम्बरी कसी हो, छवि मन…

कभी राम बनके, कभी श्याम बनके

|| कभी राम बनके, कभी श्याम बनके || कभी राम बनके कभी श्याम बनके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आना सीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ कभी राम बनके कभी श्याम बनके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ तुम…

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