श्री होलिका आरती ( होली )

|| आरती ||

ओम जय नरसिंह हरे,
प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
जनका ताप हरे॥
|| ओम जय नरसिंह हरे  ||

तुम हो दिन दयाला,
भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर,
अद्भुत रूप बनाकर,
प्रकटे भय हारी॥
|| ओम जय नरसिंह हरे  ||

सबके ह्रदय विदारण,
दुस्यु जियो मारी,
प्रभु दुस्यु जियो मारी।
दास जान आपनायो,
दास जान आपनायो,
जनपर कृपा करी॥
|| ओम जय नरसिंह हरे  ||

ब्रह्मा करत आरती,
माला पहिनावे,
प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर,
पुष्पन बरसावे॥
|| ओम जय नरसिंह हरे  ||

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