हरियाली तीज व्रत कथा PDF हिन्दी
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Parvati Ji ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
हरियाली तीज व्रत कथा हिन्दी Lyrics
हरियाली तीज का पावन पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। हरियाली तीज व्रत कथा के अनुसार, माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए भी यह व्रत करती हैं। व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है। आप हरियाली तीज व्रत कथा PDF आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
|| हरियाली तीज व्रत कथा (Hariyali Teej Vrat Katha PDF) ||
हरियाली तीज व्रत कथा इस प्रकार है : भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म के बारे में याद दिलाने के लिए यह सुनाई थी।
शिवजी कहते हैं- हे पार्वती! बहुत समय पहले तुमने हिमालय पर मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था। इस दौरान तुमने अन्न-जल त्याग कर सूखे पत्ते चबाकर दिन व्यतीत किए थे। किसी भी मौसम की परवाह किए बिना तुमने निरंतर तप किया। तुम्हारी इस स्थिति को देखकर तुम्हारे पिता बहुत दुखी थे। ऐसी स्थिति में नारदजी तुम्हारे घर पधारे।
जब तुम्हारे पिता ने नारदजी से उनके आगमन का कारण पूछा, तो नारदजी बोले- ‘हे गिरिराज! मैं भगवान् विष्णु के भेजने पर यहां आया हूं। आपकी कन्या की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर वह उससे विवाह करना चाहते हैं। इस बारे में मैं आपकी राय जानना चाहता हूं।’
नारदजी की बात सुनकर पर्वतराज अति प्रसन्नता के साथ बोले- हे नारदजी। यदि स्वयं भगवान विष्णु मेरी कन्या से विवाह करना चाहते हैं, तो इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती। मैं इस विवाह के लिए तैयार हूं।’
फिर शिवजी पार्वतीजी से कहते हैं- ‘तुम्हारे पिता की स्वीकृति पाकर नारदजी, विष्णुजी के पास गए और यह शुभ समाचार सुनाया। लेकिन जब तुम्हें इस विवाह के बारे में पता चला तो तुम्हें बहुत दुख हुआ। तुम मुझे यानि कैलाशपति शिव को मन से अपना पति मान चुकी थी।
तुमने अपने व्याकुल मन की बात अपनी सहेली को बताई। तुम्हारी सहेली से सुझाव दिया कि वह तुम्हें एक घनघोर वन में ले जाकर छुपा देगी और वहां रहकर तुम शिवजी को प्राप्त करने की साधना करना। इसके बाद तुम्हारे पिता तुम्हें घर में न पाकर बड़े चिंतित और दुखी हुए। वह सोचने लगे कि यदि विष्णुजी बारात लेकर आ गए और तुम घर पर ना मिली तो क्या होगा। उन्होंने तुम्हारी खोज में धरती-पाताल एक करवा दिए लेकिन तुम ना मिली।
तुम वन में एक गुफा के भीतर मेरी आराधना में लीन थी। भाद्रपद तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण कर मेरी आराधना की जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूर्ण की। इसके बाद तुमने अपने पिता से कहा कि ‘पिताजी, मैंने अपने जीवन का लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिताया है और भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी कर लिया है। अब मैं आपके साथ एक ही शर्त पर चलूंगी कि आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे।’ पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर ली और तुम्हें घर वापस ले गए। कुछ समय बाद उन्होंने पूरे विधि-विधान से हमारा विवाह किया।’
भगवान शिव ने इसके बाद कहा कि- ‘हे पार्वती! तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था, उसी के परिणाम स्वरूप हम दोनों का विवाह संभव हो सका। इस व्रत का महत्व यह है कि मैं इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मनवांछित फल देता हूं। भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग प्राप्त होगा।
हरियाली तीज पूजा विधि
- हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर और नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें।
- इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।
- घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और वहां एक चौकी स्थापित करें।
- चौकी पर माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी, कार्तिकेय जी और नंदी की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
- इसके बाद सोलह श्रृंगार की सामग्री, एक हरी साड़ी, अक्षत आदि माता पार्वती को अर्पित करें।
- भगवान शिव को वस्त्र, धतूरा, भांग, बेलपत्र, और आक के फूल चढ़ाएं।
- चंदन, अक्षत, फूल, और फल से गणेश जी, कार्तिकेय जी और नंदी की पूजा करें।
- पूजा के बाद हरियाली तीज की कथा सुनें और धूप-दीप से आरती करें।
- इसके बाद भोग लगाकर प्रसाद बांट दें।
हरियाली तीज के दिन इन मंत्रों का करें जाप
माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए
- ॐ उमायै नम:
- ॐ पार्वत्यै नम:
- ॐ जगद्धात्र्यै नम:
- ॐ जगत्प्रतिष्ठयै नम:
- ॐ शांतिरूपिण्यै नम:
- ॐ शिवायै नम:
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए
- ॐ हराय नम:
- ॐ महेश्वराय नम:
- ॐ शम्भवे नम:
- ॐ शूलपाणये नम:
- ॐ पिनाकवृषे नम:
- ॐ शिवाय नम:
- ॐ पशुपतये नम:
- ॐ महादेवाय नम:
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