भगवान शिव के रौद्र रूप को समर्पित कालभैरव जयंती, जिसे ‘कालाष्टमी’ भी कहा जाता है, वर्ष 2026 में 1 दिसंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
मार्गशीर्ष मास (Margashirsha Month) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘कालभैरव जयंती’ मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र और उग्र स्वरूप, काल भैरव (Kaal Bhairav) को समर्पित है। उन्हें काशी का कोतवाल (Guardian of Kashi) और तंत्र-मंत्र के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व सिर्फ एक जयंती नहीं है, बल्कि भय, बाधा, और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त करने का एक शक्तिशाली अवसर (Powerful Opportunity) है।
क्या आप जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं? क्या अज्ञात भय (Unknown Fear) आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है? तो कालभैरव जयंती 2026 पर की गई पूजा और उपाय आपके लिए एक नया मार्ग खोल सकते हैं।
कालभैरव जयंती 2026 – शुभ तिथि और मुहूर्त (Shubh Tithi and Muhurat)
वर्ष 2026 में कालभैरव जयंती 1 दिसंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
- अष्टमी तिथि का प्रारंभ – दिसम्बर 01, 2026 को 12:11 AM बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त – दिसम्बर 01, 2026 को 11:13 PM बजे
पूजा का मुख्य समय (Nishita Kaal) 1 दिसंबर, मंगलवार की मध्यरात्रि (Midnight)। चूंकि काल भैरव की पूजा मुख्य रूप से रात्रि में निशिता काल (Nishita Kaal) में की जाती है, इसलिए 1 दिसंबर, मंगलवार की रात्रि पूजा के लिए सर्वोत्तम (Best) रहेगी।
काल भैरव की कथा और रहस्य – शिव के उग्र रूप का प्राकट्य
काल भैरव का प्राकट्य (Manifestation) भगवान शिव के क्रोध से हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। जब ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के स्वरूप और शक्ति का अपमान किया, तो शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उनके इसी क्रोध से एक तेजमय स्वरूप प्रकट हुआ, जो काल के समान भयानक (Terrifying) था – यही काल भैरव कहलाए।
मुख्य रहस्य (Main Secret)
- काशी के कोतवाल – काल भैरव को भगवान शिव ने यह वरदान दिया कि जो भी काशी (वाराणसी) आएगा, उसे पहले उनके दर्शन करने होंगे। इसीलिए वह आज भी काशी नगरी के कोतवाल (City Guardian) माने जाते हैं।
- दण्डपाणि – काल भैरव को दण्डपाणि (The one who holds the Rod of Punishment) भी कहा जाता है। यह कर्मों के आधार पर लोगों को दंडित (Punish) करने का प्रतीक है, जिससे मोक्ष (Moksha) का मार्ग खुलता है।
- भय का भक्षक – काल भैरव स्वयं ‘काल’ यानी समय पर नियंत्रण रखते हैं। उनकी पूजा करने से मनुष्य हर प्रकार के भय, शत्रु बाधा और दुर्भाग्य (Bad Luck) से मुक्ति पाता है।
कालभैरव जयंती पर पूजा विधि (Puja Vidhi)
काल भैरव की पूजा में सात्विक और तामसिक दोनों विधियाँ प्रचलित हैं, लेकिन गृहस्थों (Householders) के लिए सात्विक पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है।
- जयंती के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (Clean Clothes) धारण करें। व्रत का संकल्प लें।
- भगवान काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें सिंदूर, तेल, काले तिल, उड़द दाल से बनी वस्तुएं (जैसे- वड़ा), इमरती, गुड़, नारियल और पुष्प (फूल) अर्पित करें।
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं। भैरव जी को विशेष रूप से मदिरा का भोग लगाया जाता है, लेकिन आप इसके स्थान पर गुड़ मिश्रित जल या दूध अर्पित कर सकते हैं।
- रात्रि के समय, खासकर मध्यरात्रि में, रुद्राक्ष की माला से भैरव जी के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के अंत में आरती करें। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना (विशेषकर मीठी रोटी या दूध) बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि वह भैरव जी का वाहन (Vahana) है।
काल भैरव के शक्तिशाली मंत्र और तंत्र (Powerful Mantras and Tantra)
काल भैरव की पूजा में मंत्रों का विशेष महत्व है, जो तीव्र ऊर्जा (High Energy) उत्पन्न करते हैं।
- सामान्य मंत्र – ॐ काल भैरवाय नमः। (शत्रु, भय और बाधाओं का नाश।)
- विशेष मंत्र – ॐ भं भैरवाय आप्दुद्धारणाय स्वाहा। (बड़ी विपत्तियों (Major Calamities) से रक्षा और तत्काल सहायता।)
- शत्रु नाश मंत्र – ॐ भं भं भं भैरवाय शत्रुनाशं कुरु। (कोर्ट-कचहरी (Court Cases) और शत्रु बाधा से मुक्ति।)
- काल भैरव अष्टकम् नियमित पाठ करने से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।
तंत्र (Tantra) – भैरव जी तंत्र-मंत्र के देवता हैं। इस दिन तांत्रिक साधनाएं (Tantrik Practices) गुप्त रूप से की जाती हैं। गृहस्थ लोगों को तांत्रिक क्रियाओं से दूर रहकर केवल मंत्रों के शुद्ध जाप पर ध्यान केंद्रित (Focus) करना चाहिए।
कालभैरव जयंती पर 5 अचूक उपाय (5 Effective Remedies)
काल भैरव जयंती पर किए गए ये उपाय आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन (Positive Change) ला सकते हैं:
- कर्ज मुक्ति के लिए – मध्यरात्रि में भैरव मंदिर जाएं। एक दीपक जलाएं और 21 नींबू की माला बनाकर भैरव जी को अर्पित करें। यह उपाय कर्ज (Debt) और आर्थिक तंगी (Financial Crunch) को दूर करता है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश – एक काले कपड़े में काले तिल, उड़द की दाल और 11 रुपए रखकर पोटली बनाएं। इसे अपने सिर के ऊपर से सात बार घुमाकर किसी निर्जन स्थान (Secluded Place) पर फेंक दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं। इससे बुरी शक्तियाँ (Evil Spirits) दूर होती हैं।
- शनि और राहु दोष – भैरव जी को शनि का दंडाधिकारी (Punisher of Shani) भी माना जाता है। इस दिन शनि के प्रकोप को कम करने के लिए काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं।
- रोग मुक्ति – भैरव जी के सामने ‘ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’ मंत्र का जाप करें और मंदिर में एक लाल धागा (Red Thread) चढ़ाकर उसे अपनी कलाई पर बांध लें। यह रोग और स्वास्थ्य समस्याओं (Health Issues) से रक्षा करता है।
- मनोकामना पूर्ति – भैरव जी को इमरती या जलेबी का भोग लगाकर गरीबों या बच्चों में बांट दें। आपकी मनोकामना (Wish) जल्द पूरी होगी।
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