कालरात्रि माता व्रत कथा पूजा विधि PDF हिन्दी
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Shri Kali Maa ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
कालरात्रि माता व्रत कथा पूजा विधि हिन्दी Lyrics
कालरात्रि माता नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं, जिन्हें अंधकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इनका रूप अत्यंत उग्र है, परंतु वे अपने भक्तों को निर्भय और निडर बनाती हैं। कालरात्रि माता की पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएं, भय और शत्रु दूर होते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि को इनकी आराधना का विशेष महत्व है। भक्त काले तिल, गुड़ और नीले फूल अर्पित कर माता को प्रसन्न करते हैं। जो साधक सच्चे मन से इनका व्रत करते हैं, उन्हें शक्ति, साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
|| कालरात्रि माता व्रत कथा (Kaalratri Mata Vrat Katha PDF) ||
जैसा कि नाम से अभिव्यक्त होता है कि मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है।
इस देवी के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है। ये गर्दभ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी ही तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों हमेशा निडर, निर्भय रहो।
बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है। इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। इसीलिए ये शुभंकरी कहलाईं अर्थात् इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत या आतंकित होने की कतई आवश्यकता नहीं। उनके साक्षात्कार से भक्त पुण्य का भागी बनता है।
कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं।
ये ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि भय दूर हो जाते हैं। इनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।
|| कालरात्रि माता पूजा विधि ||
- इस दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। फिर मां का स्मरण करें और मां कालरात्रि को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- फिर मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी चढ़ाएं।
- फिर मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें।
- इसके बात सच्चे मन से मां की आरती करें। मान्यता है कि इस दिन मां को गुड़ जरूर अर्पित करना चाहिए। साथ ही ब्राह्माणों को दान भी अवश्य करना चाहिए। मां का प्रिय रंग लाल है।
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