कालरात्रि माता आरती PDF हिन्दी
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Shri Kali Maa ✦ Aarti (आरती संग्रह) ✦ हिन्दी
कालरात्रि माता आरती हिन्दी Lyrics
माँ कालरात्रि आदिशक्ति दुर्गा का सातवाँ स्वरूप हैं। इनका वर्ण गहन अंधकार जैसा काला है और ये विकराल रूप धारण करती हैं। इनके केश खुले और बिखरे हुए हैं, तथा गले में बिजली की तरह चमकती हुई माला सुशोभित है। इनके तीन नेत्र हैं और इनकी श्वास से अग्नि निकलती है।
इनका स्वरूप भयंकर होते हुए भी ये सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं, इसलिए इन्हें ‘शुभंकारी’ भी कहा जाता है। ये भक्तों के समस्त भय, दुख और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। इनकी उपासना से साधक को सिद्धि, शक्ति और साहस की प्राप्ति होती है। माँ कालरात्रि काल (मृत्यु) पर विजय दिलाती हैं और अकाल मृत्यु के भय को दूर करती हैं। इनकी सवारी गधा है।
|| कालरात्रि माता आरती (Kalratri Mata Aarti PDF) ||
कालरात्रि जय जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखनेवाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे।
महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥
कालरात्रि जय जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
|| कालरात्रि माता की पूजा विधि ||
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- माँ कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माँ को लाल रंग के वस्त्र (या चुनरी) अर्पित करें।
- घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। माँ को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- रोली, कुमकुम, अक्षत, काले या लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल) और धूप अर्पित करें।
- रुद्राक्ष की माला से माँ के विशेष मंत्र का जाप करें: ‘ॐ कालरात्र्यै नमः’ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः’।
- अंत में कपूर या दीपक से माँ की श्रद्धापूर्वक आरती करें।
- भोग को प्रसाद के रूप में परिवारजनों और भक्तों में वितरित करें।
|| कालरात्रि माता की पूजा लाभ ||
माँ कालरात्रि की पूजा से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- ये समस्त भय, संकट, और भूत-प्रेत बाधाओं का नाश करती हैं।
- साधक को नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- इनकी आराधना से ध्यान और योग में सफलता मिलती है तथा सिद्धियों के द्वार खुलते हैं।
- पूजा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोग दूर होते हैं।
- माँ की कृपा से भक्तों को अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता और वे सुरक्षित रहते हैं।
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