क्या आप कर्ज़ के बोझ से परेशान हैं? क्या मंगल दोष आपके जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर रहा है? (Are you worried about debts?) तो यह लेख आपके लिए एक वरदान साबित हो सकता है! त्रयोदशी तिथि पर आने वाला भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat) भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा से आपको इन सभी परेशानियों से मुक्ति दिला सकता है। मंगलवार को पड़ने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन मंगल ग्रह को समर्पित है।
भौम प्रदोष व्रत न सिर्फ ऋण (Debt) से मुक्ति दिलाता है, बल्कि कुंडली में मौजूद मंगल दोष के अशुभ प्रभावों को भी शांत करता है। आइए, इस शक्तिशाली व्रत की संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि और कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भौम प्रदोष व्रत 2025 – शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) और तिथि
वर्ष 2025 में कई भौम प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण तिथियां निम्नलिखित हैं:
- त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 02, 2025 को 03:57 पी एम बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त – दिसम्बर 03, 2025 को 12:25 पी एम बजे
प्रदोष काल का महत्व – प्रदोष व्रत में पूजा हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय) में की जाती है। यह वह शुभ समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर नृत्य करते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसलिए, पूजा इसी अवधि में करना ही फलदायी होता है।
भौम प्रदोष व्रत का अतुलनीय महत्व (Significance)
भौम का अर्थ है मंगल। मंगलवार के दिन आने के कारण यह प्रदोष व्रत महादेव के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान जी और मंगल ग्रह को भी समर्पित हो जाता है। इसके मुख्य लाभ हैं:
- कर्ज़ मुक्ति (Freedom from Debt) – यह व्रत विशेष रूप से ऋण मोचन (Rin Mochan) के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिवजी और मंगल देव की आराधना से व्यक्ति को शीघ्र ही कर्ज़ के जंजाल से मुक्ति मिल जाती है।
- मंगल दोष शांति (Mars Dosha Shanti) – जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष (Mangal Dosha) है, उन्हें इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। यह मंगल के उग्र स्वभाव को शांत कर शुभ फल प्रदान करता है।
- स्वास्थ्य लाभ – यह व्रत रक्त, भूमि और ऊर्जा से संबंधित समस्याओं को दूर करने में भी सहायक है।
- सुख-समृद्धि – महादेव की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का वास होता है।
भौम प्रदोष व्रत की अचूक पूजा विधि (Puja Vidhi)
भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और हनुमान जी, दोनों की पूजा का विशेष विधान है। प्रदोष काल में पूजा करने का सही तरीका यहाँ दिया गया है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (हो सके तो सफेद या हल्के रंग के) धारण करें।
- पूरे दिन निराहार (या फलाहार) रहकर व्रत का संकल्प लें।
- शाम को प्रदोष काल से पहले पुनः स्नान करें।
- पूजा स्थल को साफ कर उत्तर-पूर्व दिशा में मुख करके बैठें।
- एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
- भगवान शिव को सफेद फूल, बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाएं और शिव चालीसा या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शिव पूजा के बाद हनुमान जी की पूजा करें।
- उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़ से बने लड्डू (बूंदी के लड्डू) अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें।
- कर्ज मुक्ति के लिए ‘ऋणमोचन मंगल स्तोत्र’ का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अंत में भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
- भगवान शिव और हनुमान जी की आरती करें।
- आरती के बाद प्रसाद सभी में वितरित करें।
भौम प्रदोष व्रत कथा – वृद्धा और हनुमान जी की कहानी
प्राचीन काल की बात है, एक नगर में एक गरीब वृद्धा रहती थी, जिसका एक ही बेटा था। वृद्धा हनुमान जी की परम भक्त थी और प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखती थी। वह किसी भी मंगलवार को न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी।
एक बार हनुमान जी ने उसकी परीक्षा लेने का विचार किया। वह साधु का वेश धारण कर वृद्धा के घर पहुंचे और पुकारने लगे, “है कोई हनुमान भक्त जो हमारी इच्छा पूरी करे?”
वृद्धा ने साधु का आदर-सत्कार किया। साधु ने उससे उसके पुत्र को पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलाने को कहा। वृद्धा यह सुनकर दुखी हो गई, लेकिन अपनी भक्ति की परीक्षा समझकर उसने भारी मन से वही किया जो साधु ने कहा। आग जलाकर वह रोती हुई घर के अंदर चली गई।
जब साधु ने भोजन बना लिया, तो उसने वृद्धा को आवाज दी और कहा, “अपने पुत्र को भी बुलाओ, ताकि वह भी भोग लगा ले।” वृद्धा ने कहा, “उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न पहुंचाओ।”
साधु ने फिर से पुकारा, तो वृद्धा का पुत्र दौड़ता हुआ आया और साधु के चरणों में प्रणाम किया। पुत्र को सकुशल देखकर वृद्धा अत्यंत प्रसन्न और चकित हुई। वह समझ गई कि यह कोई साधारण साधु नहीं हैं।
वृद्धा के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर हनुमान जी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए। उन्होंने वृद्धा को आशीर्वाद दिया और उसके बेटे के सभी कष्टों को दूर कर उसे कर्ज़ और दरिद्रता से मुक्ति दिलाई। हनुमान जी ने यह भी वरदान दिया कि जो कोई भी श्रद्धापूर्वक भौम प्रदोष व्रत करेगा, उसे मंगल दोष और ऋण से मुक्ति मिलेगी।
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