Misc

श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा

Munisuvratnaath Chalisa Hindi Lyrics

MiscChalisa (चालीसा संग्रह)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा जैन धर्म में 20वें तीर्थंकर, भगवान मुनिसुव्रतनाथ की स्तुति में गाई जाने वाली 40 चौपाइयों की एक भक्तिमय रचना है। इस चालीसा का पाठ करने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।

|| श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा (Munisuvratnaath Chalisa PDF) ||

।। दोहा ।।

अरिहंत सिद्ध आचार्य को
निसदिन करुं प्रणाम |
उपाध्याय सर्वसाधू जी
करें स्वपर कल्याण ||
प्रभु मुनिसुव्रतनाथ का
मंदिर पावन धाम |
श्याम वर्ण अद्भूत प्रतिमा
को कोटि-कोटि प्रणाम ||

।। चोपाई ।।

जय मुनिसुव्रत दया के सागर,
नाम प्रभु का लोक उजागर ||
राजा सुमित्रा के तुम नन्दा,
मां शामा की आंखो के चन्दा ||

श्यामवर्ण प्रभू मूरत प्यारी,
स्तुति करें निशदिन नर नारी ||
मुनिसुव्रत हो अन्तरयामी,
लोका लोक जगत हितकारी ||

जो तुम भक्ति निशदिन करता,
पाप ताप भय संकट-हरता ||
संकटमोचन नाम तुम्हारा,
दीन दुखी तुम ही का सहारा ||

कोई दरिद्री या तन का रोगी,
प्रभू दर्शन से होते निरोगी ||
मिथ्या तिमिर भयो अति भारी,
भव की बाधा हरो हमारी ||

यह संसार महा दुख दाई,
सुख दुख की गहरी हैं खाई ||
मोह जाल में फंसा है बंदा,
काटो प्रभु भव भव का फंदा ||

रोग शोक भय व्याधि मिटावो,
भव सागर से पार लगावो ||
अशुभ कर्म से अब तक भटका,
मोह माया बन्धन में अटका ||

योग-वियोग और भव का नाता,
राग द्वेष जग में भटकाता ||
हित मित प्रिय प्रभू तुमरी वाणी,
जग कल्याण करो मुनि ध्यानी ||

भव सागर में नाव हमारी,
पार करो प्रभु विरद हमारी ||
अब विवेक मेरा हैं जागा,
दर्शन करत कर्ममल भागा ||

नाम आपका जपे जो कोई,
तीन लोक की सम्पदा पाई ||
कृपा दृष्टी जब आपकी होवे,
धन आरोग्य समृधि पावे ||

प्रभु चरणन में जो कोई आवे,
मनवांच्छित फल तुमसे पावे ||
चमत्कार प्रभु आपका न्यारा,
संकट मोचन नाम तुम्हारा ||

तुम सर्वज्ञ चतुष्टय धारी,
मन वच तन वंदना हमारी ||
गिरी सम्मेद से मोक्ष सिधारे,
आया अब मैं शरण तिहांरे ||

महाराष्ट्र का पैठण तीर्थ,
अतिशय क्षेत्र की अद्भूत कीरत ||
मन्दिर की रचना है न्यारी,
वीतराग प्रतिमा सुखकारी ||

श्याम वर्ण मूर्ति है निराली,
मुनिसुव्रत की छवि है प्यारी ||
मानस्तंभ की शोभा न्यारी,
देखत मान कषाय निवारी ||

मुनिसुव्रत शनिग्रह अधिष्ठाता,
दुख संकट हरे दे सुख साता ||
शनि अमावस की महिमा भारी,
दर्शन को आते नर नारी ||

मुनिसुव्रत दर्शन हितकारी,
मन वच तन वंदना हमारी ||
मुनिसुव्रत दर्शन हितकारी,
मन वच तन वंदना हमारी ||

|| सोरठा ||

प्रभु मुनिसुव्रत का चालीसा,
नित प्रीत पढ़े जो कोय |
पावे भौतिक सम्पदा,
सुख दुःख बन्ध न होय ||

|| श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा के लाभ ||

  • चालीसा का पाठ मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है।
  • इसके नित्य पाठ से आत्म-शुद्धि होती है और व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ता है।
  • माना जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से जीवन की सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
  • यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक है।

|| श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा पाठ की विधि ||

श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन शनिवार को इसे विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

  • सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए एक शांत और स्वच्छ स्थान चुनें।
  • भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और धूप, दीप, पुष्प, और नैवेद्य अर्पित करें।
  • चालीसा पाठ से पहले अपने मन में अपनी मनोकामना का संकल्प लें।
  • इसके बाद शांत मन से श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा का 1, 3, 5, 7, 11 या 40 बार पाठ करें।

Found a Mistake or Error? Report it Now

श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा PDF

Download श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा PDF

श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा PDF

Leave a Comment

Join WhatsApp Channel Download App