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मंदिर जहाँ खुद बसा है ब्रह्मांड – जानिए खजुराहो की गुप्त कथा

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क्या आपने कभी सोचा है कि पत्थर में जीवन कैसे उतर सकता है? या फिर कैसे कुछ हजार साल पहले के कारीगरों ने ऐसी वास्तुकला गढ़ दी, जो आज भी वैज्ञानिकों और कलाकारों को अचंभित करती है? हम बात कर रहे हैं भारत के हृदय, मध्य प्रदेश में बसे खजुराहो के उन मंदिरों की, जिन्हें देखकर लगता है मानो स्वयं ब्रह्मांड यहाँ आकर बस गया हो। यह सिर्फ कलाकृतियों का एक संग्रह नहीं, बल्कि जीवन, प्रेम, अध्यात्म और सृष्टि के रहस्यों का एक जीता-जागता ग्रंथ है।

खजुराहो के मंदिर – सिर्फ पत्थर नहीं, ब्रह्मांड का आइना

खजुराहो, जिसे पहले ‘खजूरपुरा’ या ‘खजूरवाहिका’ के नाम से जाना जाता था, चंदेल शासकों की राजधानी थी। 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों ने भारतीय कला, संस्कृति और अध्यात्म को एक नया आयाम दिया। मूल रूप से 85 मंदिर थे, जिनमें से आज लगभग 25 ही बचे हैं, जो अपनी भव्यता और अद्वितीय कलात्मकता से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 1986 में, यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, जिससे इनकी वैश्विक पहचान और भी मजबूत हुई।

पत्थरों में उकेरा गया ब्रह्मांड – वास्तुकला का चमत्कार

खजुराहो के मंदिर केवल उनकी कामुक मूर्तियों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं हैं, बल्कि उनकी वास्तुकला, मूर्तिकला और आध्यात्मिक गहराई के लिए भी। यहाँ हर मंदिर एक कहानी कहता है, हर पत्थर एक दर्शन को दर्शाता है।

  • कंदरिया महादेव मंदिर – यह खजुराहो के मंदिरों में सबसे बड़ा और सबसे शानदार है। इसका शिखर कैलाश पर्वत की तरह ऊँचा उठता है, जो ब्रह्मांड की धुरी, मेरु पर्वत का प्रतीक है। इसके चारों ओर 800 से अधिक मूर्तियाँ उकेरी गई हैं, जो देव-देवियों, अप्सराओं, यक्षों, गंधर्वों और जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। मंदिर के अंदर की शांत ऊर्जा आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है, जहाँ आप स्वयं को ब्रह्मांड के एक छोटे से हिस्से के रूप में महसूस करते हैं।
  • लक्ष्मण मंदिर – भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता और विस्तृत नक्काशी के लिए जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर विष्णु के दशावतार, देवी-देवता और पौराणिक कथाओं के दृश्यों को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि आप मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह दिखाता है कि कैसे प्राचीन भारतीय वास्तुकला ने धार्मिक कथाओं को पत्थरों पर जीवित कर दिया।
  • चित्रगुप्त मंदिर – सूर्य देवता को समर्पित यह मंदिर खजुराहो के कुछ ही सूर्य मंदिरों में से एक है। इसकी संरचना और मूर्तियों में सूर्य की ऊर्जा और जीवनदायिनी शक्ति का अद्भुत चित्रण मिलता है।
  • चौसठ योगिनी मंदिर – यह सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और देवी योगिनियों को समर्पित है। इसका गोलाकार ढाँचा और छोटे-छोटे कक्ष एक रहस्यमय और तांत्रिक महत्व रखते हैं। माना जाता है कि यहाँ ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र था, जहाँ योगिनी साधनाएँ की जाती थीं।

गुप्त कथा – सिर्फ कामुकता नहीं, जीवन का दर्शन

खजुराहो के मंदिरों को लेकर सबसे बड़ी भ्रांतियों में से एक उनकी ‘कामुक मूर्तियों’ को लेकर है। हालाँकि, ये मूर्तियाँ मंदिर की दीवारों का एक छोटा सा हिस्सा हैं और इन्हें अक्सर गलत समझा जाता है। इनकी ‘गुप्त कथा’ कुछ और ही है:

  • जीवन की पूर्णता – खजुराहो के मंदिरों में जीवन के हर पहलू को दर्शाया गया है – जन्म, मृत्यु, युद्ध, नृत्य, संगीत, और हाँ, कामुकता भी। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय समाज में जीवन को उसकी समग्रता में देखा जाता था, जहाँ काम केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का एक पवित्र और अभिन्न अंग था।
  • तांत्रिक दर्शन – कुछ विद्वानों का मानना है कि ये मूर्तियाँ तांत्रिक साधनाओं से प्रेरित हैं, जहाँ ऊर्जा के प्रवाह और आध्यात्मिक जागरण के लिए काम को एक माध्यम के रूप में देखा जाता था। यह ‘पंचमकार’ साधना का भी हिस्सा हो सकता है, जहाँ सांसारिक सुखों के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाया जाता है।
  • ज्ञान का प्रतीक – ये मूर्तियाँ मानव शरीर और आत्मा के मिलन का प्रतीक भी हो सकती हैं, जहाँ बाहरी दुनिया के सुखों से गुजरते हुए आंतरिक आध्यात्मिकता की ओर बढ़ा जाता है। यह एक तरह से जीवन की पाठशाला है, जहाँ हर अनुभव से कुछ सीखा जाता है।
  • धर्म का संदेश – कुछ विद्वान यह भी मानते हैं कि ये मूर्तियाँ उन लोगों के लिए थीं जो मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। ये मूर्तियाँ दिखाती हैं कि सांसारिक सुखों को त्याग कर ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, या फिर ये मंदिर उन लोगों के लिए एक प्रवेश द्वार थे जो जीवन के इन पहलुओं से परिचित होने के बाद ही आध्यात्मिक यात्रा पर निकलते थे।

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