Maha Shivratri 2026 – क्या है रुद्राभिषेक? जानें इसकी विधि, महत्व और लाभ

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महा शिवरात्रि 2026 का पर्व शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। रुद्राभिषेक के लिए सबसे पहले भगवान शिव का जल से स्नान कराएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। उसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत…

महाशिवरात्रि 2026 पर रखें व्रत, तो जानें नियम, सावधानियां, क्या करें, क्या न करें, और क्या खाएं

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वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी की शाम से शुरू होगी, इसलिए निशिता काल (मध्यरात्रि) की पूजा इसी दिन की जाएगी। यह रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है। भक्त इस दिन…

Mahashivratri 2026 – महाशिवरात्रि के अवसर पर कौन सी शिव स्तुति का पाठ करना चाहिए और इसका महत्व क्या है? जानें सम्पूर्ण जानकारी

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महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात शिव की कृपा…

Mahashivratri 2026 – महाशिवरात्रि पर करें शिव पंचाक्षरी, भस्म और रुद्राक्ष के दर्शन, जीवन में आएगी शुभता

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सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्त्व है। भस्म, पंचाक्षरी मंत्र और रुद्राक्ष – ये तीनों शिव-भक्ति के मुख्य स्तंभ माने जाते हैं। इनका प्रतिदिन दर्शन करने एवं उपयोग करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता, शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान शिव की भक्ति में भस्म, शिव पंचाक्षरी…

बैसाखी की मुख्य पौराणिक कथा

बैसाखी का त्यौहार सिख धर्म और उत्तर भारत के कृषि समाज के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से दो कारणों से मनाया जाता है – धार्मिक (खालसा पंथ की स्थापना) और कृषि (रबी की फसल की कटाई)। यहाँ बैसाखी की मुख्य पौराणिक और ऐतिहासिक कथा दी गई है: || बैसाखी की…

विषु कानी की पौराणिक कथा

केरल के प्रमुख पर्व विषु (Vishu) के अवसर पर ‘विषु कानी’ (Vishu Kani) देखने की परंपरा है। ‘कानी’ का अर्थ होता है ‘वह जो सबसे पहले देखा जाए’। यह त्योहार मलयाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यहाँ विषु कानी से जुड़ी पौराणिक कथा और उसका महत्व विस्तार से दिया गया है: ||…

माँ कुब्जिका जयन्ती कथा

कुब्जिका जयन्ती (Kubjika Jayanti) मुख्य रूप से शाक्त परंपरा और कौलमार्ग के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। माँ कुब्जिका को ‘वक्रेश्वरी’ या ‘कुलकुण्डलिनी’ का स्वरूप माना जाता है। यहाँ माँ कुब्जिका के प्राकट्य की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || माँ कुब्जिका जयन्ती कथा || पौराणिक मान्यताओं और आगम शास्त्रों के…

पुथन्डू की पौराणिक कथा

पुथन्डू (Puthandu), जिसे तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर के पहले महीने ‘चित्तिरै’ (Chithirai) के पहले दिन मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन का संबंध सृष्टि की रचना और समय के चक्र से है। यहाँ पुथन्डू की पौराणिक कथा और इसका महत्व विस्तार से दिया गया है: || पुथन्डू की…

सौर नववर्ष की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सोलर नववर्ष (सौर नववर्ष) का बहुत महत्व है। यह वह दिन होता है जब सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मेष संक्रांति’ भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे वैशाखी, बंगाल में पोइला बैशाख और दक्षिण में विशु या पुथांडु के नाम…

मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा

मेष संक्रान्ति, जिसे भारत के कई हिस्सों में सत्तू संक्रान्ति या जुड़ शीतल के रूप में भी मनाया जाता है, सौर नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन सूर्य मीन राशि को त्यागकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। यहाँ मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा और महत्व का विवरण दिया गया है: || मेष…

कृष्ण वामन द्वादशी कथा

कृष्ण वामन द्वादशी (जिसे वामन जयंती भी कहा जाता है) की कथा भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, भगवान वामन को समर्पित है। यह कथा अहंकार के विनाश और संपूर्ण समर्पण की शक्ति को दर्शाती है। यहाँ वामन द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || श्री वामन अवतार कथा || प्राचीन काल में…

पंगुनी उथिराम सम्पूर्ण कथा

|| पंगुनी उथिराम कथा (Panguni Uthiram Katha PDF) || पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब उथिराम नक्षत्र पूर्णिमा के साथ आता है, तो तमिल भाषी हिंदूओं द्वारा यह त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार इन क्षेत्रों में काफी महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान मुरुगन (सुब्रमण्यम) के साथ भगवान इंद्र की…

श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा (वल्लभाचार्य जयंती कथा)

वल्लभाचार्य जयंती (जिसे वरुथिनी एकादशी के दिन मनाया जाता है) पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक और शुद्धद्वैत दर्शन के प्रणेता महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के प्राकट्य का उत्सव है। यहाँ महाप्रभु के जन्म और उनके जीवन की पावन कथा दी गई है: || श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा || महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म विक्रम संवत 1535 (सन 1479) में…

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा मार्कण्डेय पुराण में विस्तार से वर्णित है। यह कथा द्वितीय मनु, स्वारोचिष के जन्म और उनके शासन की है। यहाँ इस कथा का सार दिया गया है: || स्वारोचिष मनु की उत्पत्ति की कथा || कथा की शुरुआत प्रवर नामक एक परम तेजस्वी ब्राह्मण से होती है। वे अपनी तपस्या और…

पंगुनी उथिरम की कथा

पंगुनी उथिरम (Panguni Uthiram) हिंदू धर्म, विशेष रूप से तमिल हिंदुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। यह तमिल महीने ‘पंगुनी’ की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे “देवताओं के विवाह का दिन” माना जाता है। यहाँ पंगुनी उथिरम की पौराणिक कथा और महत्व का विस्तार दिया गया है: || पंगुनी उथिरम की…

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

वरूथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा मान्धाता ने इस कठिन व्रत का पालन कर भगवान…

वैशाख संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा)

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री गणेश के ‘विकट’ स्वरूप की पूजा की जाती है। इस व्रत की कथा द्वापर युग से जुड़ी है, जब धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें इस…

चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा

हिन्दू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन भक्त शिरोमणि हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा व्रत की कथा मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए सुनी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और…

फुलेरा दूज व्रत कथा

फुलेरा दूज का त्योहार विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री कृष्ण ने राधा जी के साथ फूलों की होली खेली थी, जिससे प्रकृति में नई उमंग और खुशहाली का संचार हुआ था। फुलेरा दूज व्रत कथा के अनुसार,…

श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् || श्रीरामचन्द्रश्रीकृष्ण सूर्यचन्द्रकुलोद्भवौ । कौसल्यादेवकीपुत्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ १ ॥ दिव्यरूपौ दशरथवसुदेवात्मसम्भवौ । जानकीरुक्मिणीकान्तौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ २ ॥ आयोध्याद्वारकाधीशौ श्रीमद्राघवयादवौ । श्रीकाकुत्स्थेन्द्रराजेन्द्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ३ ॥ शान्तासुभद्रासोदर्यौ सौमित्रीगदपूर्वजौ । त्रेताद्वापरसम्भूतौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ४ ॥ विलम्बिविश्वावसुजौ सौम्यदक्षायणोद्भवौ । वसन्तवर्षऋतुजौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ५ ॥ चैत्रश्रावणसम्भूतौ मेषसिंहाख्यमासजौ । सितासितदलोद्भूतौ…

शनि प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि

शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत की कथा में एक निर्धन ब्राह्मण और उसकी पत्नी को संतान सुख प्राप्त होने का वर्णन है, जो ऋषि शांडिल्य…

फाल्गुन अमावस्या की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवताओं का वास पवित्र नदियों में होता है। कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन से अमृत कलश निकला था, तब देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध के दौरान अमृत की कुछ बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में…

श्री रामकृष्ण सङ्घस्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण सङ्घस्तोत्रम् || सर्वधर्मस्थापकस्त्वं सर्वधर्मस्वरूपकः । आचार्याणां महाचार्यो रामकृष्णाय ते नमः ॥ १॥ यथाग्नेर्दाहिका शक्ती रामकृष्णे स्थिता हि या । सर्वविद्या स्वरूपां तां शारदां प्रणमाम्यहम् ॥ २॥ परतत्त्वे सदा लीनो रामकृष्ण समाज्ञया । यो धर्मस्थापनपरो वीरेशं तं नमाम्यहम् ॥ ३॥ कालिन्दीफुल्लकमले माधवेन क्रीड़ारतः । ब्रह्मानन्द ! नमस्तुभ्यं सद्गुरो लोकनायक ॥ ४॥ योगानन्दः प्रेमानन्दश्चान्ये…

जानिए विजया एकादशी व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए और कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए

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साल 2026 में विजया एकादशी का पावन व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह एकादशी जातक को शत्रुओं पर विजय और कठिन कार्यों में सफलता दिलाने वाली मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने…

कृष्ण भीष्म द्वादशी व्रत कथा

माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को ‘भीष्म द्वादशी’ (Bhishma Dwadashi) के रूप में मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर ‘गोविन्द द्वादशी’ भी कहते हैं। यह दिन महाभारत के महानायक पितामह भीष्म के निर्वाण और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के संगम का प्रतीक है। यहाँ भीष्म द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार से…

श्री रामकृष्ण वन्दना स्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण वन्दना स्तोत्रम् || जगज्जातं त्यक्तं हिमगिरिसुता पादकमले शरीराद्याः प्राणा वलय इव येनार्पणमिताः । त्रिवर्गोयच्छ्रद्धाविमल गुरुभक्त्याहि सुलभो नुमो रामकृष्णं सुरनुतपदं भेदरहितम् ॥ १॥ स्वयं त्यक्तं प्रोक्तं हृदयकरशाखोल्लिखनतः पुरा रामात् कृष्णः समभवदनन्यो न हि परः । इदानीमायान्तं नयनविषयत्वं जनिभृतां प्रविष्टो देहेऽस्मिन्निति कनककामातिगतया ॥ २॥ यदद्वैतं शान्तं सततमघमायाविरहितं चिदानन्दं शुद्धं प्रकृतिसहितं प्रेमवशगम् । त्वमेवाविर्भूतः करणविषये…

कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को लगाएं ये विशेष भोग, मिलेगी असीम कृपा

Saphla ekadashi

कामदा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह व्रत हर महीने में दो बार, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आता है। एकादशी के दिन, भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए, भक्त उन्हें भोग भी…

कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha)

कारदाइयन नोम्बू मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह व्रत मासी महीने के अंत और पंगुनी महीने की शुरुआत के संगम पर मनाया जाता है। इस व्रत का मूल आधार देवी सावित्री की अपने पति सत्यवान के…

युगादि की पौराणिक कथा

युगादि (Ugadi), जिसे संवत्सर पाडवो भी कहा जाता है, हिंदू नववर्ष का प्रतीक है। यह पर्व मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाया जाता है। “युगादि” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है: युग (काल/समय) और आदि (शुरुआत)। यहाँ युगादि की पौराणिक कथा और इसका आध्यात्मिक महत्व विस्तार से दिया गया…

मीन संक्रान्ति (खरमास) की पौराणिक कथा

हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार, मीन संक्रान्ति वह पावन समय है जब सूर्य देव कुंभ राशि का त्याग कर अपने गुरु बृहस्पति की राशि ‘मीन’ में प्रवेश करते हैं। इसे ‘मलमास’ या ‘खरमास’ के प्रारंभ का प्रतीक भी माना जाता है। मीन संक्रान्ति की कथा मुख्य रूप से सूर्य देव के घोड़ों और उनकी…

गुड़ी पड़वा की पौराणिक कथा

गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि विजय, सृजन और नई शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह पर्व कई गहरी कथाओं और मान्यताओं को अपने भीतर समेटे हुए है। || गुड़ी पड़वा की पौराणिक कथा || ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना सबसे…

भगवान झूलेलाल अवतार कथा

भगवान झूलेलाल को वरुण देव (जल के देवता) का अवतार माना जाता है। सिंधी समाज उन्हें अपने इष्ट देव के रूप में पूजता है और उनकी जयंती को ‘चेटी चंड’ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाता है। यहाँ भगवान झूलेलाल के अवतरण की विस्तृत कथा दी गई है: || भगवान झूलेलाल अवतार कथा…

मत्स्य जयन्ती कथा

|| मत्स्य जयन्ती कथा || मत्स्य जयन्ती भगवान विष्णु के प्रथम अवतार, ‘मत्स्य अवतार’ के प्राकट्य का उत्सव है। यह पर्व प्रतिवर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है या सृष्टि पर संकट आता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतार धारण करते…

वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा

हिंदू धर्म में वासुदेव चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान श्री कृष्ण (वासुदेव) को समर्पित है और मुख्य रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। कई स्थानों पर इसे ‘बहुला चतुर्थी’ या ‘संकष्टी चतुर्थी’ के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। || वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा…

महातारा (तारा देवी) प्राकट्य कथा

महातारा जयन्ती (तारा देवी जयंती) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माँ तारा दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या मानी जाती हैं। उनकी कथा मुख्य रूप से समुद्र मंथन और उनके ममतामयी स्वरूप से जुड़ी है। यहाँ माँ तारा की प्राकट्य कथा विस्तार से दी गई है: || महातारा (तारा…

यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा

यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती के रूप में भी जाना जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवी यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है। यहाँ यमुना छठ की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा || पौराणिक…

अशोक अष्टमी व्रत कथा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अशोक अष्टमी मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से पुनर्वसु नक्षत्र के संयोग में बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और अशोक वृक्ष की पूजा का विधान है। यहाँ अशोक अष्टमी व्रत की पौराणिक कथा और महत्व दिया गया है: ||…

स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा

भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) के दिन हुआ था। यह पावन अवसर स्वामीनारायण जयंती के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यहाँ स्वामीनारायण भगवान के प्राकट्य की पावन कथा दी गई है: || स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा || अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, जब समाज में अधर्म, अंधविश्वास…

वामन द्वादशी की पौराणिक कथा

वामन द्वादशी (जिसे वामन जयंती भी कहा जाता है) भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, ‘वामन’ को समर्पित है। यह पावन तिथि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। यहाँ वामन अवतार की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || वामन अवतार की पौराणिक कथा || असुरराज बलि (राजा प्रह्लाद के पौत्र)…

वसन्त पूर्णिमा कथा

वसन्त पूर्णिमा (जिसे हम मुख्य रूप से होली या होलिका दहन के रूप में जानते हैं) हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक त्योहार है। इसकी सबसे प्रचलित कथा भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़ी है। यहाँ वसन्त पूर्णिमा की मुख्य कथा विस्तार से दी गई है: || वसन्त पूर्णिमा कथा…

गणगौर तीज व्रत कथा और पूजा विधि

गणगौर का पर्व अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती वन विचरण पर निकले। वहां निर्धन और धनी वर्ग की महिलाओं ने माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा की। माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन पर सुहाग रस छिड़क दिया, जिससे उन्हें अखंड…

लक्ष्मी पंचमी (श्री पंचमी) व्रत कथा और पूजा विधि

लक्ष्मी पंचमी, जिसे श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में धन की देवी माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक अत्यंत शुभ दिन है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू नववर्ष के प्रारंभ में आने वाली यह पंचमी जीवन में सुख,…

कामदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

हिंदू धर्म में कामदा एकादशी का विशेष महत्व है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भोगीपुर नगर में पुण्डरीक नाम का राजा राज्य करता था। वहां गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता निवास करते थे। एक बार दरबार में गायन के दौरान…

जानकी जयंती की पौराणिक कथा

जानकी जयंती, जिसे सीता अष्टमी के रूप में भी जाना जाता है, माता सीता के प्राकट्य (जन्म) का पावन दिन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सीता का जन्म किसी गर्भ से नहीं, बल्कि धरती की कोख से हुआ था। यहाँ जानकी जयंती की संपूर्ण पौराणिक कथा दी गई है: || जानकी जयंती की पौराणिक कथा…

भीष्म द्वादशी व्रत कथा

माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भीष्म द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘तिल द्वादशी’ भी कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के पितामह भीष्म ने इसी समय के आसपास अपने प्राण त्यागे थे, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने उन्हें विशेष वरदान दिया था। यहाँ भीष्म द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार…

शनि त्रयोदशी व्रत कथा

शनि त्रयोदशी (जिसे शनि प्रदोष भी कहा जाता है) की कथा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह व्रत भगवान शिव और शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष है। यहाँ शनि त्रयोदशी की पौराणिक कथा दी गई है: || शनि त्रयोदशी व्रत कथा || प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था जिसकी मृत्यु के बाद…

इष्टि पौराणिक कथा

इष्टि (Ishti) का शाब्दिक अर्थ है “इच्छा” या “यज्ञ”। हिंदू धर्म और कर्मकांड में ‘इष्टि’ उस छोटे यज्ञ को कहा जाता है जो किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है। पौराणिक संदर्भों में इष्टि कथा का संबंध मुख्य रूप से राजा मनु और उनके द्वारा किए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ से जुड़ा है,…

फुलेरा दूज की पौराणिक कथा

फुलेरा दूज का त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक है और इसे अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। यहाँ फुलेरा दूज की पौराणिक कथा दी गई है: || फुलेरा दूज की पौराणिक कथा || कहा जाता है कि…

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