Gogamedi Dham – जाहरवीर बाबा कौन हैं? जाहरवीर बाबा की आरती, मंत्र और व्रत विधि – सम्पूर्ण पूजन मार्गदर्शिका

Jaharveer baba

जिनके नाम से सांप भी रास्ता छोड़ दें, वही हैं वीर जाहरवीर बाबा। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में विशेष श्रद्धा के साथ पूजित श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज को सर्पदोष से मुक्ति दिलाने वाले लोकदेवता के रूप में जाना जाता है। विशेष रूप से गोगामेड़ी धाम, जो हनुमानगढ़ ज़िले में स्थित है, जाहरवीर बाबा का…

99% लोग हैं अनजान – आखिर क्या होता है ऋषि, मुनि, साधु और संत में असली अंतर?

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सनातन धर्म में ऋषि, मुनि साधु और संतों को का नाम बहुत आदर से लिया जाता हैं। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों का अस्तित्‍व तो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग आदि सभी में रहा है। राजा महाराजा के समय में राजा अपने राज्य को चलाने के लिए ऋषि मुनि से ज्ञान प्राप्त करते थे। शस्त्रों के अनुसार…

जाने दशमहाविद्या माता बगलामुखी की उपासना विधि, मंत्र, कथा और मुख्य तथ्या

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दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति माता बगलामुखी को ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है। इनकी उपासना शत्रुओं के दमन, वाद-विवाद में विजय और जीवन की बाधाओं को रोकने (स्तंभन) के लिए अचूक मानी जाती है। माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। साधक को पीले वस्त्र धारण कर, पीले आसन पर बैठकर, हल्दी…

माता सीता का जन्म वास्तव में कैसे हुआ था? (जानिये वो 3 रोचक कथाएं जो आपने कभी नहीं सुनीं)

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माता सीता का जन्म किसी साधारण गर्भ से नहीं, बल्कि साक्षात धरती माँ की कोख से हुआ था। प्रचलित कथा के अनुसार, जब मिथिला के राजा जनक वर्षा की कामना के लिए खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें भूमि के भीतर एक स्वर्ण कलश में नन्ही कन्या मिली। हल के अग्रभाग को ‘सीत’…

Sai Baba Vrat – साईं बाबा व्रत, 9 गुरुवार में बदलें अपनी किस्मत! जानिए विधि और लाभ

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साईं बाबा का 9 गुरुवार का व्रत भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और चमत्कारी माना जाता है। यह व्रत किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए कर सकता है। इसकी विधि बेहद सरल है, गुरुवार की सुबह स्नान के बाद साईं बाबा की प्रतिमा के सामने दीया जलाएं, उन्हें पीले…

Pashupati Vrat – पशुपति व्रत का महत्व, विधि, नियम, कथा, पूजन सामग्री, मंत्र, उद्यापन, और इसके लाभ

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पशुपति व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली व्रत है, जो विशेष रूप से कठिन मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। यह व्रत कुल 5 सोमवार तक रखा जाता है। इसकी मुख्य विशेषता शाम की पूजा है। भक्त को मंदिर में 6 घी के दीपक और प्रसाद (जैसे हलवा) के तीन बराबर…

Khatu Shyam Mandir – खाटू श्याम जी मंदिर इतिहास, दर्शन, धार्मिक महत्व, श्री खाटू श्याम कथा

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राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी मंदिर, भगवान श्री कृष्ण के अवतार बाबा श्याम का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है और हर साल लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। महाभारत के अनुसार, बाबा श्याम भीम और हिडिंबा के पुत्र घटोत्कच…

गोपाल सहस्त्रनाम स्त्रोत का पाठ क्यों और कैसे करें? भगवान श्रीकृष्ण के 1000 नाम चमत्कारिक प्रभाव

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भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित गोपाल सहस्त्रनाम स्त्रोत का पाठ हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। यह स्त्रोत भगवान श्रीकृष्ण के 1000 नामों का संग्रह है, जो उनकी दिव्यता, गुणों और लीलाओं का वर्णन करता है। यह पाठ न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि इसे जीवन में सकारात्मकता और चमत्कारिक अनुभवों के लिए…

घर पर कैसे करें सत्यनारायण व्रत? श्री सत्यनारायण व्रत कथा, विधि, सामग्री और महत्व

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सत्यनारायण व्रत कथा का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा के रूप में किया जाता है। इस व्रत की कथा का श्रवण एवं पूजा से सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। सत्यनारायण व्रत को पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करने से…

Santoshi Mata Vrat – संतोषी माता व्रत कथा, विधि-विधान सहित जानिए कैसे करें पूजा? पाएं अद्भुत लाभ

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संतोषी माता की पूजा 16 शुक्रवारों तक की जाती है। पूजा के दौरान, भक्त देवी को गुड़ और चना, खीर, लाल फूल और सुपारी अर्पित करते हैं। संतोषी माता को लाल रंग की साड़ी पहने हुए, हाथ में दो हाथी के दांत, एक कमंडल और एक अक्षय पात्र धारण किए हुए चित्रित किया जाता है।…

शनि अमावस्या का रहस्य – कैसे पाएं शनि की विशेष कृपा?

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भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शनि देव का एक विशेष स्थान है। न्याय और कर्मफल के दाता माने जाने वाले शनि देव की कृपा प्राप्त करना हर व्यक्ति की इच्छा होती है। ऐसे में, शनि अमावस्या का संयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ अवसर लेकर आता है। यह वह दिन है जब अमावस्या तिथि…

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर बढ़ाएं धन और सौभाग्य

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ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन, वैभव और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक पवित्र माना जाता है और इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस…

Satyanarayan Vrat Katha – प्रत्येक हिंदू घर में क्यों होता है सत्यनारायण व्रत कथा पाठ? जानें कथा, आरती, लाभ और नियम

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प्रत्येक हिंदू घर में सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ (Satyanarayan vrat katha path pdf) एक महत्वपूर्ण और शुभ परंपरा है। यह न केवल भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है, बल्कि यह परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता लाने वाला भी माना जाता है। आखिर…

तिरुपति बालाजी वेंकटेश्वर मंदिर – भारत का सबसे धनवान मंदिर, क्या आपने देखी है वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा? जानिए मंदिर का रहस्य

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आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुमाला की पहाड़ियों पर विराजमान भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं के लिए एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान है। यह मंदिर, जिसे तिरुपति बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, अपनी भव्यता, प्राचीनता और अपार धन-संपदा के लिए प्रसिद्ध…

सदियों पुराना खजाना, क्या आपने देखा है दुनिया का सबसे अमीर मंदिर? जानिए श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के रहस्य

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भारत में अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रहस्यमयी दृष्टिकोण से भी अनमोल हैं। लेकिन जब बात “दुनिया के सबसे अमीर मंदिर” की होती है, तो केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का नाम सबसे ऊपर आता है। यह मंदिर न केवल भगवान विष्णु…

जानिए नारद मुनि का महत्व, पूजा विधि, कथा और उनके मंत्रों का जादू

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नारद मुनि हिंदू धर्म के प्रमुख ऋषियों में से एक हैं, जिन्हें देवताओं के दूत और त्रिलोकों में सूचना के वाहक के रूप में जाना जाता है। वे भगवान विष्णु के परम भक्त हैं और उनके कंठ से सदैव “नारायण-नारायण” का उच्चारण होता रहता है। नारद मुनि का प्रमुख कार्य लोक कल्याण और धर्म की…

Mallikarjuna Jyotirlinga – मल्लिकार्जुन मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी, श्री मल्लिकार्जुन की अद्भुत कथा और मुख्य तीर्थ

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में स्थित है। यह पवित्र ज्योतिर्लिंग “दक्षिण के कैलाश” के रूप में प्रसिद्ध है, और श्रीशैल पर्वत पर स्थित है, जिसे श्रद्धालु अत्यधिक पूजनीय मानते हैं। श्रीशैलम की यह भूमि सिर्फ भगवान शिव ही नहीं,…

क्या आपने कभी पढ़ी है Khatu Shyam Ji चालीसा? बदल सकती है आपकी किस्मत, जानिए इसके अद्भुत रहस्य और लाभ

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Khatu Shyam Ji, जिन्हें कलियुग के भगवान के रूप में पूजा जाता है, अपने भक्तों की हर पुकार को सुनते हैं। उनकी चालीसा न केवल भक्ति का माध्यम है, बल्कि यह जीवन में चमत्कारी बदलाव लाने वाली दिव्य शक्ति भी है। इस लेख में हम जानेंगे Khatu Shyam Ji चालीसा से जुड़े गूढ़ रहस्य, इसके…

वृंदावन की स्थापना कब और कैसे हुई? जानिए इसका गौरवशाली इतिहास और वर्तमान स्वरूप

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यमुना के पावन तट पर स्थित, लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र, वृंदावन धाम मात्र एक शहर नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है। यहाँ की हवा में राधा-कृष्ण के प्रेम की गूँज है, कण-कण में भक्ति की सुगंध है और हर गली में इतिहास की पदचाप सुनाई देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है…

सबसे पुराना हिंगलाज शक्तिपीठ – बलूचिस्तान का रहस्यमयी मंदिर बना इंटरनेट पर चर्चा का विषय

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित एक रहस्यमयी और अत्यंत पवित्र हिंदू मंदिर हाल ही में इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है। यह है हिंगलाज शक्तिपीठ, जिसे हिंगलाज माता, हिंगुला देवी या नानी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव और बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को लेकर…

महिलाओं के लिए मंगलवार और शनिवार को बाल धोना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इसका धार्मिक पहलू

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भारत में, विशेषकर हिंदू धर्म में, सप्ताह के हर दिन का अपना एक विशिष्ट महत्व और उससे जुड़े नियम होते हैं। ये नियम हमारी दिनचर्या (Routine), खान-पान और यहाँ तक कि हमारे शरीर की साफ-सफाई से भी जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक नियम है महिलाओं द्वारा कुछ विशेष दिनों, जैसे मंगलवार और शनिवार…

संकटमोचन हनुमान – कलियुग में सबसे तेज़ फल देने वाली पूजा विधि! (Sankatmochan Hanuman, The Fastest Worship Method in Kaliyuga!)

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जय श्री राम! दोस्तों, हम सब जानते हैं कि यह कलियुग (Kaliyuga) है, जहाँ जीवन में पग-पग पर चुनौतियाँ और संकट खड़े रहते हैं। इस भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में, हमें एक ऐसे संबल की ज़रूरत होती है, जो हमारी हर मुश्किल को चुटकियों में हर ले। और इस युग में, साक्षात जागृत देव और सबसे…

श्री बजरंग बाण

श्री बजरंग बाण हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली और अचूक स्तोत्र है। जब जीवन में विपत्तियां चारों ओर से घेर लेती हैं और कोई मार्ग नहीं सूझता, तब बजरंग बाण का पाठ भक्तों के लिए रक्षा कवच का कार्य करता है। इसमें हनुमान जी को श्रीराम की शपथ देकर…

Nageshwara Jyotirlinga History – नागेश्वर मंदिर का इतिहास और तीर्थ स्थल, श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

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भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दसवें स्थान पर स्थित है और यह गुजरात राज्य के द्वारका जिले के गोमती नदी के किनारे स्थित है। यह अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जहाँ भगवान शिव का दिव्य रूप ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित है। इसे लेकर कुछ मत भिन्नताएँ हैं, जहाँ कुछ…

भूलकर भी न करें शिव चालीसा पाठ की ये 5 गलतियाँ! (होगा भारी नुकसान)

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भगवान शिव की महिमा अपरंपार है और उनकी स्तुति में गाई जाने वाली शिव चालीसा भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन, कई बार अनजाने में ही सही, भक्त कुछ…

सिर्फ 10 मिनट में पाएं शिव कृपा – शिव तांडव स्तोत्र के अद्भुत लाभ, विधि और नियम

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शिव तांडव स्तोत्र एक प्राचीन और शक्तिशाली स्तोत्र है जिसे भगवान शिव की स्तुति में रावण ने रचा था। यह स्तोत्र भगवान शिव के तांडव नृत्य और उनकी महिमा का वर्णन करता है। इसे गाने या सुनने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, शक्ति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। शिव तांडव स्तोत्र भगवान…

शिव तांडव स्तोत्र की वो 5 गुप्त बातें जो आपकी ज़िंदगी बदल सकती हैं!

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नमस्ते दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि एक स्तोत्र (Stotra) आपकी पूरी लाइफ (Life) को कैसे बदल सकता है? हम बात कर रहे हैं शिव तांडव स्तोत्र की, जिसे लंकापति रावण ने रचा था। यह सिर्फ़ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि स्वयं महादेव शिव के पावरफुल (Powerful) तांडव नृत्य की ऊर्जा को अपने भीतर…

Maha Shivratri 2026 – क्या है रुद्राभिषेक? जानें इसकी विधि, महत्व और लाभ

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महा शिवरात्रि 2026 का पर्व शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। रुद्राभिषेक के लिए सबसे पहले भगवान शिव का जल से स्नान कराएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। उसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत…

महाशिवरात्रि 2026 पर रखें व्रत, तो जानें नियम, सावधानियां, क्या करें, क्या न करें, और क्या खाएं

shiv bhagwan

वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी की शाम से शुरू होगी, इसलिए निशिता काल (मध्यरात्रि) की पूजा इसी दिन की जाएगी। यह रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है। भक्त इस दिन…

Mahashivratri 2026 – महाशिवरात्रि के अवसर पर कौन सी शिव स्तुति का पाठ करना चाहिए और इसका महत्व क्या है? जानें सम्पूर्ण जानकारी

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महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात शिव की कृपा…

Mahashivratri 2026 – महाशिवरात्रि पर करें शिव पंचाक्षरी, भस्म और रुद्राक्ष के दर्शन, जीवन में आएगी शुभता

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सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्त्व है। भस्म, पंचाक्षरी मंत्र और रुद्राक्ष – ये तीनों शिव-भक्ति के मुख्य स्तंभ माने जाते हैं। इनका प्रतिदिन दर्शन करने एवं उपयोग करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता, शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान शिव की भक्ति में भस्म, शिव पंचाक्षरी…

बैसाखी की मुख्य पौराणिक कथा

बैसाखी का त्यौहार सिख धर्म और उत्तर भारत के कृषि समाज के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से दो कारणों से मनाया जाता है – धार्मिक (खालसा पंथ की स्थापना) और कृषि (रबी की फसल की कटाई)। यहाँ बैसाखी की मुख्य पौराणिक और ऐतिहासिक कथा दी गई है: || बैसाखी की…

विषु कानी की पौराणिक कथा

केरल के प्रमुख पर्व विषु (Vishu) के अवसर पर ‘विषु कानी’ (Vishu Kani) देखने की परंपरा है। ‘कानी’ का अर्थ होता है ‘वह जो सबसे पहले देखा जाए’। यह त्योहार मलयाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यहाँ विषु कानी से जुड़ी पौराणिक कथा और उसका महत्व विस्तार से दिया गया है: ||…

माँ कुब्जिका जयन्ती कथा

कुब्जिका जयन्ती (Kubjika Jayanti) मुख्य रूप से शाक्त परंपरा और कौलमार्ग के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। माँ कुब्जिका को ‘वक्रेश्वरी’ या ‘कुलकुण्डलिनी’ का स्वरूप माना जाता है। यहाँ माँ कुब्जिका के प्राकट्य की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || माँ कुब्जिका जयन्ती कथा || पौराणिक मान्यताओं और आगम शास्त्रों के…

पुथन्डू की पौराणिक कथा

पुथन्डू (Puthandu), जिसे तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर के पहले महीने ‘चित्तिरै’ (Chithirai) के पहले दिन मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन का संबंध सृष्टि की रचना और समय के चक्र से है। यहाँ पुथन्डू की पौराणिक कथा और इसका महत्व विस्तार से दिया गया है: || पुथन्डू की…

सौर नववर्ष की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सोलर नववर्ष (सौर नववर्ष) का बहुत महत्व है। यह वह दिन होता है जब सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मेष संक्रांति’ भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे वैशाखी, बंगाल में पोइला बैशाख और दक्षिण में विशु या पुथांडु के नाम…

मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा

मेष संक्रान्ति, जिसे भारत के कई हिस्सों में सत्तू संक्रान्ति या जुड़ शीतल के रूप में भी मनाया जाता है, सौर नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन सूर्य मीन राशि को त्यागकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। यहाँ मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा और महत्व का विवरण दिया गया है: || मेष…

कृष्ण वामन द्वादशी कथा

कृष्ण वामन द्वादशी (जिसे वामन जयंती भी कहा जाता है) की कथा भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, भगवान वामन को समर्पित है। यह कथा अहंकार के विनाश और संपूर्ण समर्पण की शक्ति को दर्शाती है। यहाँ वामन द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || श्री वामन अवतार कथा || प्राचीन काल में…

पंगुनी उथिराम सम्पूर्ण कथा

|| पंगुनी उथिराम कथा (Panguni Uthiram Katha PDF) || पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब उथिराम नक्षत्र पूर्णिमा के साथ आता है, तो तमिल भाषी हिंदूओं द्वारा यह त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार इन क्षेत्रों में काफी महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान मुरुगन (सुब्रमण्यम) के साथ भगवान इंद्र की…

श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा (वल्लभाचार्य जयंती कथा)

वल्लभाचार्य जयंती (जिसे वरुथिनी एकादशी के दिन मनाया जाता है) पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक और शुद्धद्वैत दर्शन के प्रणेता महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के प्राकट्य का उत्सव है। यहाँ महाप्रभु के जन्म और उनके जीवन की पावन कथा दी गई है: || श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा || महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म विक्रम संवत 1535 (सन 1479) में…

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा मार्कण्डेय पुराण में विस्तार से वर्णित है। यह कथा द्वितीय मनु, स्वारोचिष के जन्म और उनके शासन की है। यहाँ इस कथा का सार दिया गया है: || स्वारोचिष मनु की उत्पत्ति की कथा || कथा की शुरुआत प्रवर नामक एक परम तेजस्वी ब्राह्मण से होती है। वे अपनी तपस्या और…

पंगुनी उथिरम की कथा

पंगुनी उथिरम (Panguni Uthiram) हिंदू धर्म, विशेष रूप से तमिल हिंदुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। यह तमिल महीने ‘पंगुनी’ की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे “देवताओं के विवाह का दिन” माना जाता है। यहाँ पंगुनी उथिरम की पौराणिक कथा और महत्व का विस्तार दिया गया है: || पंगुनी उथिरम की…

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

वरूथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा मान्धाता ने इस कठिन व्रत का पालन कर भगवान…

वैशाख संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा)

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री गणेश के ‘विकट’ स्वरूप की पूजा की जाती है। इस व्रत की कथा द्वापर युग से जुड़ी है, जब धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें इस…

चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा

हिन्दू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन भक्त शिरोमणि हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा व्रत की कथा मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए सुनी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और…

फुलेरा दूज व्रत कथा

फुलेरा दूज का त्योहार विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री कृष्ण ने राधा जी के साथ फूलों की होली खेली थी, जिससे प्रकृति में नई उमंग और खुशहाली का संचार हुआ था। फुलेरा दूज व्रत कथा के अनुसार,…

श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् || श्रीरामचन्द्रश्रीकृष्ण सूर्यचन्द्रकुलोद्भवौ । कौसल्यादेवकीपुत्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ १ ॥ दिव्यरूपौ दशरथवसुदेवात्मसम्भवौ । जानकीरुक्मिणीकान्तौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ २ ॥ आयोध्याद्वारकाधीशौ श्रीमद्राघवयादवौ । श्रीकाकुत्स्थेन्द्रराजेन्द्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ३ ॥ शान्तासुभद्रासोदर्यौ सौमित्रीगदपूर्वजौ । त्रेताद्वापरसम्भूतौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ४ ॥ विलम्बिविश्वावसुजौ सौम्यदक्षायणोद्भवौ । वसन्तवर्षऋतुजौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ५ ॥ चैत्रश्रावणसम्भूतौ मेषसिंहाख्यमासजौ । सितासितदलोद्भूतौ…

शनि प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि

शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत की कथा में एक निर्धन ब्राह्मण और उसकी पत्नी को संतान सुख प्राप्त होने का वर्णन है, जो ऋषि शांडिल्य…

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