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परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन

Parishram Kare Koi Kitana Bhi Lekin Bhajan Hindi Lyrics

MiscBhajan (भजन संग्रह)हिन्दी
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|| परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन ||

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक,

दया भानु जब तक निकलता नहीं है ।

दमित वासनाये, अमित रूप ले जब,

अंतः-करण में, उपद्रव मचाती ।

तब फिर कृपासिंधु, श्री राम जी के,

अनुग्रह बिना, काम चलता नहीं है ।

(अनुग्रह बिना, मन सम्हलता नहीं है)

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

म्रगवारी जैसे, असत इस जगत से,

पुरुषार्थ के बल पे, बचना है मुश्किल ।

श्री हरि के सेवक, जो छल छोड़ बनते,

उन्हें फिर ये, संसार छलता नहीं है ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

सद्गुरू शुभाशीष, पाने से पहले,

जलता नहीं ग्यान, दीपक भी घट में ।

बहती न तब तक, समर्पण की सरिता,

अहंकार जब तक, कि गलता नहीं ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

राजेश्वरानन्द, आनंद अपना,

पाकर ही लगता है, जग जाल सपना ।

तन बदले कितने भी, पर प्रभु भजन बिन,

कभी जन का, जीवन बदलता नहीं ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक,

दया भानु जब तक निकलता नहीं है ।

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