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श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती

Shri Saptashringa Amba Aarti Hindi Lyrics

MiscAarti (आरती संग्रह)हिन्दी
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श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती माँ सप्तश्रृंगी देवी की महिमा का वर्णन करने वाली एक भक्तिपूर्ण आरती है, जो महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित सप्तश्रृंगी देवी मंदिर में विशेष रूप से गाई जाती है। भक्तगण इस आरती के माध्यम से माँ की कृपा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन के संकटों से मुक्ति पाते हैं।

माना जाता है कि सप्तश्रृंगी देवी, देवी दुर्गा के अंशस्वरूप हैं, जिनके दर्शन मात्र से भय, रोग और शोक का नाश होता है। श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती का पाठ नवरात्रि, चैत्र और आश्विन माह में विशेष फलदायी होता है।

यदि आप घर पर आरती करना चाहते हैं, तो “श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती PDF” डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे आप संपूर्ण शुद्ध पाठ आसानी से कर सकें। यह पीडीएफ भक्तों के लिए एक उपयोगी साधन है, जिसमें आरती के सभी श्लोक स्पष्ट रूप से उपलब्ध होते हैं। श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती के नियमित पाठ से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

|| श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती (Saptashringa Amba Aarti PDF) ||

जय देवी सप्तश्रृंगा अंबा
गौतमी गंगा नटली ही ।

बहुरंगा उटी शेंदूर अंगा
जय देवी सप्तश्रृंगा ।। धृ ।।

पूर्व मुख अंबे ध्यान जरा वाकडी
मान मार्कडेय देई कान ।

सप्तशतीचे पान एके अंबा गिरि श्रृंगा,
अंबा गौतमी गंगा जय देवी सप्तश्रृंगी ।।

माये तुझा बहु थाट देई सगुण भेट
प्रेम पान्हा एक घोट भावे भरले ।

पोट करू नको मनभंगा,
अंबा गौतमी गंगा जय देवी सप्तश्रृंगा ।।

महिषीपुत्र म्हैसासुर दृष्टी कामे असुर
करि दाल समशेर क्रोधे उडविली ।

शिर शिवशक्ती शिवगंगा,
अंबा गौतमी गंगा जय देवी सप्तश्रृंगा ।।

निवृत्ति हा राधासुत अंबे आरती गात
अठराही तुझे हात भक्तां अभय देत ।

चरणकमल मनभंगा,
अंबा गौतमी गंगा जय देवी सप्तश्रृंगा ।।

|| इति श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती ||

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श्री सप्तश्रृंगा अंबा आरती PDF

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