थाईपुसम पौराणिक कथा PDF हिन्दी
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थाईपुसम पौराणिक कथा हिन्दी Lyrics
थाईपुसम 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक तमिल हिंदू त्योहार है, जो भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने भगवान मुरुगन को ‘वेल’ (दिव्य भाला) प्रदान किया था, जिससे उन्होंने राक्षस सुरपद्मन का वध किया था।
भक्त इस दिन कठिन उपवास रखते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए ‘कावड़ी’ उठाते हैं। इस पर्व की महिमा और इसके पीछे की पौराणिक कथा को विस्तार से समझने के लिए आप Thaipusam Katha PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें। यह कथा न केवल आपके ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि पूजा विधि और नियमों को समझने में भी मदद करेगी।
|| थाईपुसम पौराणिक कथा (Thaipusam Katha PDF) ||
थाईपूसम एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से तमिल समुदाय के लोग बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह त्योहार तमिल सौर मास थाई (जनवरी-फरवरी) में पूर्णिमा के दिन आता है। अन्य हिंदू कैलेंडर में इस माह को सौर मास मकर के नाम से जाना जाता है।
यह त्योहार उस ऐतिहासिक घटना को दर्शाता है जब देवी पार्वती ने भगवान मुरुगन को एक दिव्य भाला भेंट किया था। इस भाले के माध्यम से भगवान मुरुगन ने दुष्ट राक्षस सुरपद्म और उसकी सेना को पराजित किया था। यह उत्सव अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है।
तमिल बहुल देशों जैसे भारत और श्रीलंका में थाईपूसम बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, मलेशिया, सिंगापुर और मॉरीशस जैसे देशों में, जहां तमिल समुदाय अल्पसंख्यक है, वहां भी इसे बड़े जोश और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मलेशिया के बातू गुफाओं में इस त्योहार का उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
थाईपूसम कैसे मनाया जाता है?
- थाईपूसम के दिन भक्त भगवान मुरुगन को पीले और नारंगी रंग के फूल, फल और दूध अर्पित करते हैं। ये रंग भगवान मुरुगन के प्रिय माने जाते हैं। भक्त इन रंगों के वस्त्र पहनकर मंदिरों में प्रार्थना करते हैं।
- भक्त कंधों पर “कावड़ी” (दूध और पुष्प से भरा एक झूला) लेकर लंबी दूरी तय करते हैं और भगवान मुरुगन के मंदिरों में चढ़ाते हैं। मलेशिया के बातू गुफा मंदिर में कावड़ी यात्रा विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं।
- भगवान मुरुगन को प्रसन्न करने के लिए भक्त अपने शरीर को कष्ट देकर अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। वे अपने शरीर में हुक, कटार और छोटे-छोटे भाले (जिन्हें “वेल” कहा जाता है) से छेद करवाते हैं। यह उनकी अपार श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है
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