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क्या आप जानते हैं? हर देवता का अलग होता है गायत्री मंत्र, जानिए संपूर्ण सूची और लाभ

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गायत्री मंत्र का नाम सुनते ही हम में से अधिकांश के मन में ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् मंत्र आता है। यह ऋग्वेद से लिया गया एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रसिद्ध मंत्र है, जो सविता देवता (सूर्य देव) को समर्पित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे प्रत्येक प्रमुख देवता का अपना विशिष्ट गायत्री मंत्र भी होता है? ये मंत्र उस विशेष देवता की ऊर्जा और गुणों को धारण करते हैं और उनका जाप करने से संबंधित देवता का आशीर्वाद और विशिष्ट लाभ प्राप्त होते हैं।

आइए, जानते हैं विभिन्न देवताओं के लिए विशिष्ट गायत्री मंत्र और उनके जाप से मिलने वाले अद्भुत लाभों के बारे में:

विभिन्न देवताओं के गायत्री मंत्र और उनके लाभ

1. श्री गणेश गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंति प्रचोदयात्॥
  • लाभ: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है। इस मंत्र के जाप से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है, तथा सभी कार्यों में सफलता मिलती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह मंत्र विशेष रूप से लाभकारी है।

2. शिव गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
  • लाभ: भगवान शिव संहारक और कल्याणकारी दोनों रूपों में पूजे जाते हैं। इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है, भय से मुक्ति मिलती है, रोगों का नाश होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। मोक्ष की इच्छा रखने वालों के लिए भी यह मंत्र बहुत प्रभावशाली है।

3. दुर्गा गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ गिरिजायै विद्महे शिवायै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
  • लाभ: मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। इस मंत्र का जाप करने से बल, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह शत्रुओं पर विजय दिलाता है, सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है और सुरक्षा प्रदान करता है। महिलाओं के लिए यह मंत्र विशेष रूप से फलदायी है।

4. लक्ष्मी गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥
  • लाभ: धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी का यह मंत्र दरिद्रता का नाश करता है। इसके जाप से धन-धान्य की प्राप्ति होती है, व्यापार में वृद्धि होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

5. सरस्वती गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजायै धीमहि तन्नो सरस्वती प्रचोदयात्॥
  • लाभ: ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का यह मंत्र बुद्धि, विद्या और रचनात्मकता को बढ़ाता है। छात्रों, लेखकों, कलाकारों और शिक्षकों के लिए यह मंत्र अत्यंत लाभकारी है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और स्मरण शक्ति में सुधार होता है।

6. हनुमान गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्॥
  • लाभ: भगवान हनुमान शक्ति, निष्ठा और निडरता के प्रतीक हैं। इस मंत्र के जाप से शारीरिक और मानसिक बल मिलता है, रोगों से मुक्ति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और साहस में वृद्धि होती है। संकटमोचन हनुमान सभी संकटों को दूर करते हैं।

7. विष्णु गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्॥
  • लाभ: जगत के पालक भगवान विष्णु का यह मंत्र जीवन में स्थिरता और शांति प्रदान करता है। इसके जाप से मोक्ष की प्राप्ति होती है, सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में संतुलन बना रहता है।

8. कृष्ण गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्ण प्रचोदयात्॥
  • लाभ: भगवान कृष्ण प्रेम, आनंद और माधुर्य के प्रतीक हैं। इस मंत्र के जाप से प्रेम संबंधों में मधुरता आती है, मन शांत रहता है, और जीवन में खुशहाली बनी रहती है। यह आध्यात्मिक प्रेम और भक्ति को बढ़ाता है।

9. राम गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो राम प्रचोदयात्॥
  • लाभ: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का यह मंत्र सत्य, धर्म और न्याय का प्रतीक है। इसके जाप से नैतिक मूल्यों का विकास होता है, मन शांत रहता है, और जीवन में स्थिरता आती है। यह परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक है।

10. सूर्य गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात्॥
  • लाभ: सूर्य देव ऊर्जा और जीवन के दाता हैं। इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, रोगों से मुक्ति मिलती है, आंखों की रोशनी बढ़ती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करता है।

11. काली गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ कालिकायै विद्महे श्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो अघोरा प्रचोदयात्॥
  • लाभ: मां काली दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली हैं। इस मंत्र के जाप से भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यह शत्रुओं पर विजय दिलाता है और जीवन में अदम्य शक्ति प्रदान करता है।

12. कुबेर गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ यक्षरायाय विद्महे वैश्रवणाय धीमहि तन्नो कुबेर प्रचोदयात्॥
  • लाभ: धन के देवता कुबेर का यह मंत्र धन-संपत्ति और ऐश्वर्य में वृद्धि करता है। इसके जाप से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में समृद्धि आती है।

13. नरसिंह गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नरसिंह प्रचोदयात्॥
  • लाभ: भगवान नरसिंह भक्तों की रक्षा करने वाले और दुष्टों का संहार करने वाले हैं। इस मंत्र के जाप से भय से मुक्ति मिलती है, शत्रुओं का नाश होता है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। यह सुरक्षा कवच का काम करता है।

14. अग्नि गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि तन्नो अग्नि प्रचोदयात्॥
  • लाभ: अग्नि देव शुद्धि और ऊर्जा के प्रतीक हैं। इस मंत्र के जाप से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है, पापों का नाश होता है और ऊर्जा का संचार होता है। यह जीवन में तेज और प्रभाव लाता है।

15. यम गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यम प्रचोदयात्॥
  • लाभ: धर्मराज यम मृत्यु और न्याय के देवता हैं। इस मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में न्याय व संतुलन बना रहता है। यह व्यक्ति को धार्मिक पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

16. वरुण गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ जल बिम्बाय विद्महे नील पुरुषाय धीमहि तन्नो वरुण प्रचोदयात्॥
  • लाभ: जल के देवता वरुण का यह मंत्र जल संबंधी रोगों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में शीतलता व शांति प्रदान करता है। यह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने में सहायक है।

17. वायु गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ पवनपुत्राय विद्महे सहस्त्रगतये धीमहि तन्नो वायु प्रचोदयात्॥
  • लाभ: वायु देव प्राण और गति के प्रतीक हैं। इस मंत्र के जाप से शारीरिक शक्ति बढ़ती है, श्वसन संबंधी रोग दूर होते हैं और मन में चंचलता कम होती है। यह जीवन में गति और ऊर्जा लाता है।

18. इंद्र गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ सहस्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इंद्र प्रचोदयात्॥
  • लाभ: देवराज इंद्र वर्षा और ऐश्वर्य के देवता हैं। इस मंत्र के जाप से धन-धान्य की प्राप्ति होती है, सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

19. पृथ्वी गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे सहस्रमूर्त्यै धीमहि तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात्॥
  • लाभ: पृथ्वी माता स्थिरता और पोषण की देवी हैं। इस मंत्र के जाप से भूमि संबंधी विवादों का समाधान होता है, स्थिरता आती है और जीवन में आधार मजबूत होता है।

20. कामदेव गायत्री मंत्र

  • मंत्र: ॐ कामदेवाय विद्महे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंग प्रचोदयात्॥
  • लाभ: प्रेम और आकर्षण के देवता कामदेव का यह मंत्र प्रेम संबंधों में मधुरता लाता है, आकर्षण बढ़ाता है और जीवन में आनंद का संचार करता है।

गायत्री मंत्र जाप के सामान्य नियम

किसी भी गायत्री मंत्र का जाप करने से पहले कुछ सामान्य नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • मंत्र जाप से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर जाप करें।
  • रुद्राक्ष या चंदन की माला का उपयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • मंत्र का जाप कम से कम 108 बार (एक माला) करना चाहिए।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
  • पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करने से ही सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं। दैनिक रूप से जाप करना अधिक फलदायी होता है।

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