क्या आप कड़ी मेहनत के बावजूद आर्थिक अस्थिरता (Financial Instability) से जूझ रहे हैं? या फिर जीवन की भागदौड़ ने मानसिक शांति छीन ली है? हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ कहा गया है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं को हरने वाला।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ (Dwijapriya Sankashti Chaturthi) मनाई जाती है। यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन के दो सबसे बड़े संकटों – धन का अभाव और मन की अशांति को दूर करने का एक आध्यात्मिक विज्ञान है। इस लेख में हम गहराई से जानेंगे कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी क्यों खास है, इसकी पूजन विधि क्या है और वे कौन से अचूक उपाय हैं जो आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का क्या महत्व है?
संकष्टी चतुर्थी हर महीने आती है, लेकिन फाल्गुन मास की संकष्टी का अपना एक अलग महत्व है। इस दिन भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की पूजा की जाती है।
- नाम का अर्थ – ‘द्विज’ का अर्थ है जिसका जन्म दो बार हुआ हो (जैसे ब्राह्मण या संस्कारित व्यक्ति) और ‘प्रिय’ का अर्थ है प्यारा। भगवान गणेश का यह स्वरूप ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक है।
- तनाव मुक्ति का पर्व – फाल्गुन का महीना ऋतु परिवर्तन का समय होता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इस समय किया गया व्रत मानसिक अवसाद (Depression) और तनाव को खत्म करने में सहायक होता है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
इस व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसे सही विधि-विधान से किया जाए। यहाँ पूजा की सरल विधि दी गई है:
- सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और स्वच्छ (हो सके तो पीला या लाल) वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर हाथ में जल और अक्षत लेकर संकल्प लें – “हे गणेश जी, मैं अपने कष्टों के निवारण और आत्म-शांति के लिए आज द्विजप्रिय संकष्टी का व्रत रख रहा/रही हूँ।”
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- गणेश जी को 21 दूर्वा की गांसे अर्पित करें। भोग में तिल के लड्डू या मोदक अवश्य रखें, क्योंकि फाल्गुन में तिल का विशेष महत्व है।
- पूजा के दौरान “ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा” या सरल मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
- संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूरा नहीं होता। रात में चंद्रोदय होने पर जल में थोड़ा दूध, अक्षत और चीनी मिलाकर अर्घ्य दें।
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के लिए अचूक उपाय
यह लेख का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। द्विजप्रिय संकष्टी के दिन किए गए ये छोटे-छोटे उपाय बड़े बदलाव ला सकते हैं:
आर्थिक तंगी से मुक्ति के लिए (For Financial Crisis)
अगर पैसा आता है लेकिन टिकता नहीं है, या कर्ज बढ़ रहा है, तो शाम के समय पूजा में यह उपाय करें:
- उपाय – 5 साबुत कौड़ियां और एक मुट्ठी हरी मूंग लें। इन्हें एक हरे कपड़े में बांधकर गणेश जी के चरणों में रखें और “इदम अक्षतम् ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।
- विधि – अगले दिन इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय धन के प्रवाह (Cash Flow) को बढ़ाता है।
मानसिक तनाव और डिप्रेशन के लिए (For Mental Stress)
द्विजप्रिय गणेश बुद्धि के देवता हैं। यदि मन अशांत है, तो यह उपाय बहुत कारगर है:
- उपाय – भगवान गणेश को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और वही तिलक अपने माथे पर भी लगाएं। इसके बाद गणेश जी को गेंदे के फूल (Marigold) अर्पित करें।
- लॉजिक – गेंदे का केसरिया रंग गुरु ग्रह (Jupiter) को मजबूत करता है और चंदन चंद्रमा (मन) को शीतलता प्रदान करता है। इससे नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
नौकरी और करियर में सफलता के लिए
- उपाय – पूजा के समय गणेश जी को 11 लड्डू का भोग लगाएं और बाद में इसे गरीबों या जरूरतमंद बच्चों में बांट दें।
- मंत्र – भोग लगाते समय “ॐ विघ्नान्ताय नमः” का मन ही मन जाप करें।
चंद्र अर्घ्य का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य
बहुत कम लोग जानते हैं कि संकष्टी पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा मन का कारक है। संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) के दिन चंद्रमा की किरणें दूषित मानी जाती हैं, लेकिन अर्घ्य देने से हम अपने मन (चंद्रमा) को ईश्वरीय शक्ति से जोड़ते हैं।
विशेष नोट – अर्घ्य देते समय अपनी नज़रें झुका कर रखें और जल की धारा के बीच से चंद्रमा को देखने का प्रयास करें। यह नेत्र ज्योति और मानसिक एकाग्रता के लिए लाभकारी है।
क्या करें और क्या न करें (Dos and Don’ts)
- क्या करें – इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें (यदि व्रत नहीं है तो भी)। गाय को हरा चारा खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- क्या न करें – तुलसी का प्रयोग गणेश पूजन में वर्जित है, इसलिए भूलकर भी तुलसी न चढ़ाएं। किसी की बुराई या क्रोध करने से बचें, अन्यथा व्रत का फल नहीं मिलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत कौन कर सकता है?
उत्तर: यह व्रत कोई भी कर सकता है – चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। विद्यार्थियों के लिए यह व्रत एकाग्रता बढ़ाने वाला माना जाता है।
प्रश्न: क्या बिना व्रत रखे भी पूजा का फल मिलता है?
उत्तर: जी हाँ। यदि स्वास्थ्य कारणों से आप निर्जला व्रत नहीं रख सकते, तो फलाहार करके या केवल शाम को विधि-विधान से पूजा करके और उपाय अपनाकर भी आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न: इस दिन गणेश जी को कौन सा फूल सबसे प्रिय है?
उत्तर: वैसे तो गणेश जी को लाल गुड़हल (Hibiscus) सबसे प्रिय है, लेकिन द्विजप्रिय रूप में गेंदे का फूल चढ़ाना मानसिक शांति के लिए विशेष फलदायी होता है।
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