हिंदू धर्म में नृसिंह द्वादशी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार, भगवान नृसिंह को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नृसिंह द्वादशी मनाई जाती है। यह पर्व न केवल नकारात्मक ऊर्जा के विनाश का प्रतीक है, बल्कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने वालों को अखंड सौभाग्य और विजय का वरदान भी देता है।
नृसिंह द्वादशी 2026 – शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में नृसिंह द्वादशी की तिथि और समय नीचे दिए गए हैं:
- द्वादशी तिथि प्रारंभ – 28 फरवरी, 2026 (शाम से)
- द्वादशी तिथि समाप्त – 1 मार्च, 2026 (दोपहर तक)
- मुख्य पूजा मुहूर्त – 1 मार्च, सुबह 06:45 से 09:15 तक
- पारण का समय – 2 मार्च, सूर्योदय के बाद
- नोट – स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
क्यों खास है नृसिंह द्वादशी का व्रत?
भगवान नृसिंह का अवतार धर्म की रक्षा और भक्त प्रहलाद के अटूट विश्वास को सिद्ध करने के लिए हुआ था। नृसिंह द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन से भय, शत्रु बाधा और मानसिक क्लेश का नाश होता है। सुहागिन महिलाएं इसे अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं, वहीं अन्य लोग जीवन की कठिन बाधाओं को दूर करने के लिए इस दिन साधना करते हैं।
नृसिंह द्वादशी – पूजन की सही विधि
भगवान नृसिंह की पूजा में शुद्धता और नियम का बहुत महत्व है। इस प्रकार करें पूजन:
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान को दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं।
- उन्हें लाल फूल, चंदन, और ऋतु फल अर्पित करें। नृसिंह भगवान को केसर युक्त दूध या खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान इस शक्तिशाली मंत्र का जाप करें – उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
नृसिंह द्वादशी व्रत के अनिवार्य नियम
नृसिंह द्वादशी का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अवश्य करें:
- सात्विकता – इस दिन पूरी तरह सात्विक रहें। क्रोध, झूठ और लोभ से बचें।
- ब्रह्मचर्य – व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
- अन्न का त्याग – संभव हो तो निर्जला या फलाहारी व्रत रखें। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो शाम को पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- दान पुण्य – द्वादशी के दिन तिल, गुड़ या वस्त्रों का दान करना दरिद्रता को दूर करता है।
अखंड सौभाग्य के लिए विशेष उपाय
यदि आप वैवाहिक जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना करते हैं, तो नृसिंह द्वादशी पर लक्ष्मी-नृसिंह की संयुक्त पूजा करें। माता लक्ष्मी को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें और भगवान नृसिंह को शहद चढ़ाएं। ऐसा करने से घर में स्थिरता और प्रेम बना रहता है।
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