Shri Karthikeya

पंगुनी उथिरम की कथा

Panguni Uthiram Ki Katha Hindi

Shri KarthikeyaVrat Katha (व्रत कथा संग्रह)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

पंगुनी उथिरम (Panguni Uthiram) हिंदू धर्म, विशेष रूप से तमिल हिंदुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। यह तमिल महीने ‘पंगुनी’ की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे “देवताओं के विवाह का दिन” माना जाता है। यहाँ पंगुनी उथिरम की पौराणिक कथा और महत्व का विस्तार दिया गया है:

|| पंगुनी उथिरम की कथा ||

इस दिन का महत्व किसी एक घटना से नहीं, बल्कि कई दिव्य विवाहों से जुड़ा है। मुख्य रूप से भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) और माता देवयानी के विवाह की कथा सबसे प्रचलित है।

भगवान मुरुगन और देवयानी का विवाह

कथा के अनुसार, तारकासुर का वध करने के बाद देवताओं के राजा इंद्र ने अपनी पुत्री देवयानी का विवाह भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) से करने का प्रस्ताव रखा। पंगुनी उथिरम के दिन ही तिरुपरनकुंद्रम में इनका भव्य विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण मुरुगन मंदिरों में इस दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है।

शिव-पार्वती का विवाह

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने ‘गौरी’ के रूप में भगवान शिव से विवाह किया था। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, और पंगुनी उथिरम के दिन ही उनकी मनोकामना पूर्ण हुई थी।

अन्य दिव्य घटनाएं

  • राम-सीता विवाह – माना जाता है कि इसी शुभ दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था।
  • रति-कामदेव – कामदेव और रति का पुनर्मिलन भी इसी दिन हुआ था।
  • महालक्ष्मी का प्राकट्य – समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन देवी महालक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं।

|| पंगुनी उथिरम व्रत की विधि और परंपरा ||

पंगुनी उथिरम के दिन भक्त विशेष अनुष्ठान करते हैं:

  • उपवास – श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और अपने इष्ट देव की पूजा करते हैं।
  • कावड़ी अट्टम – भगवान मुरुगन के भक्त ‘कावड़ी’ लेकर मंदिर जाते हैं और अपनी मन्नत पूरी करते हैं।
  • विवाह उत्सव – मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है, जिसे ‘तिरुक्कलियानम’ कहा जाता है।
  • पवित्र स्नान – भक्त इस दिन पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करते हैं।

पंगुनी उथिरम का दिन गृहस्थ जीवन और संबंधों की शुद्धि का प्रतीक है। चूंकि इस दिन कई दिव्य विवाह हुए थे, इसलिए यह दिन वैवाहिक बाधाओं को दूर करने और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

Read in More Languages:

Found a Mistake or Error? Report it Now

Download पंगुनी उथिरम की कथा PDF

पंगुनी उथिरम की कथा PDF

Leave a Comment

Join WhatsApp Channel Download App