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क्या आप जानते हैं? आमलकी एकादशी पर आंवले के नीचे दीपक जलाने से बदल सकती है किस्मत!

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हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत अध्यात्म और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन साल भर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में ‘आमलकी एकादशी’ (Amalaki Ekadashi) का अपना एक विशेष और वैज्ञानिक महत्व है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी को ‘आंवला एकादशी’ भी कहा जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में छाई दरिद्रता और दुर्भाग्य भी कोसों दूर भाग जाते हैं। आइए जानते हैं, इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे एक छोटा सा दीपक आपकी किस्मत के बंद दरवाजे कैसे खोल सकता है।

आमलकी एकादशी और आंवले का रहस्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया, उसी समय भगवान विष्णु के प्रेमपूर्ण आंसुओं से आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। यही कारण है कि इस वृक्ष के हर अंग में देवताओं का वास माना जाता है।

  • जड़ में – भगवान विष्णु
  • तने में – भगवान शिव
  • शाखाओं में – ऋषि-मुनि
  • पत्तियों में – श्री हरि के अन्य स्वरूप

आंवले के नीचे दीपक जलाने का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व

आमलकी एकादशी की शाम को आंवले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ऊर्जा प्रयोग है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

  • महालक्ष्मी का आगमन – शास्त्रों के अनुसार, जहां भगवान विष्णु का वास होता है, वहां माता लक्ष्मी स्वतः ही खिंची चली आती हैं। एकादशी की शाम को आंवले के पास ज्योति प्रज्वलित करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश – दीपक की लौ अग्नि तत्व का प्रतीक है। आंवले की सात्विक ऊर्जा और दीपक की अग्नि मिलकर घर के परिवेश से ‘वास्तु दोष’ और नकारात्मकता को समाप्त कर देती है।
  • शुक्र और चंद्रमा की मजबूती – ज्योतिष शास्त्र में आंवले का संबंध शुभ ग्रहों से भी जोड़ा गया है। इस दिन दीपदान करने से कुंडली में शुक्र (वैभव) और चंद्रमा (मानसिक शांति) की स्थिति मजबूत होती है।

किस्मत बदलने के लिए कैसे जलाएं दीपक?

अगर आप अपनी आर्थिक स्थिति या करियर में रुकावटों से परेशान हैं, तो इस विधि का पालन करें:

  • समय – सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल) सबसे उत्तम माना जाता है।
  • सामग्री – एक मिट्टी का साफ दीपक, गाय का घी, और रुई की लंबी बाती।
  • प्रक्रिया – सबसे पहले आंवले के वृक्ष को प्रणाम करें। दीपक जलाते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
  • मंत्र – दीपक प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • परिक्रमा – संभव हो तो दीपक जलाने के बाद वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें।

आमलकी एकादशी पर अन्य अचूक उपाय

केवल दीपक ही नहीं, इस दिन ये छोटे बदलाव भी बड़े परिणाम दे सकते हैं:

  • आंवले का उबटन – शरीर की शुद्धि और चर्म रोगों से मुक्ति
  • आंवले का दान – ज्ञात-अज्ञात पापों से छुटकारा
  • आंवले के जल से स्नान – सौभाग्य और तेज में वृद्धि

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