हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का महत्व सर्वोपरि माना गया है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) का स्थान बेहद खास है। इसे ‘आंवला एकादशी’ या ‘रंगभरी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस एक व्रत को विधि-विधान से करने का फल 1000 गौदान के बराबर मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन सिर्फ व्रत रखना ही काफी नहीं है? यदि आप अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति चाहते हैं, तो इस दिन ‘आंवले’ से जुड़े कुछ अचूक उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
आमलकी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया, उसी समय ‘आंवले’ के वृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। भगवान विष्णु ने स्वयं कहा है कि जो व्यक्ति इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करता है और व्रत रखता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मुख्य आकर्षण
- ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास – आंवले के पेड़ के तने में भगवान विष्णु, जड़ में ब्रह्मा और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है।
- पापों का नाश – यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए भयंकर पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
आमलकी एकादशी के 5 अचूक उपाय (Remedies)
यदि आप आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या करियर में रुकावटों से जूझ रहे हैं, तो इस दिन ये उपाय अवश्य करें:
- सुख-समृद्धि के लिए (नारियल और आंवला) – एकादशी के दिन एक पीले कपड़े में आंवला और एक कच्चा नारियल लपेटकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। बाद में इसे अपनी तिजोरी में रख दें। इससे घर में धन की आवक बढ़ती है।
- करियर में सफलता हेतु – अगर मेहनत के बाद भी प्रमोशन या अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है, तो आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की 21 बार परिक्रमा करें और वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध अर्पित करें।
- आरोग्य प्राप्ति के लिए – बीमारियों से पीछा छुड़ाने के लिए इस दिन नहाने के पानी में आंवले का रस या चूर्ण मिलाकर स्नान करें। शास्त्रों में इसे ‘काया कल्प’ के समान माना गया है।
- सौभाग्य वृद्धि (विवाहित महिलाओं के लिए) – सुहागिन महिलाएं इस दिन माता लक्ष्मी और आंवले के वृक्ष को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और पति की आयु लंबी होती है।
- दीपदान का विशेष फल – शाम के समय आंवले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। यदि आपके घर के पास वृक्ष न हो, तो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने आंवला रखकर दीपक जलाएं।
व्रत की सरल पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा को पीले फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
- भगवान को भोग में आंवला जरूर शामिल करें।
- आमलकी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- अगले दिन (द्वादशी) को ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।
इस दिन क्या न करें?
- चावल का त्याग – अन्य एकादशियों की तरह इस दिन भी चावल खाना वर्जित है।
- वृक्ष को हानि न पहुँचाएं – पूजा के लिए आंवला तोड़ना हो तो उसे एक दिन पहले ही तोड़ लें या गिरे हुए फल का उपयोग करें। व्रत के दिन पेड़ की टहनी तोड़ना अशुभ माना जाता है।
- सात्विकता – क्रोध, लोभ और परनिंदा से दूर रहें।
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