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आश्विन पूर्णिमा 2026 – क्यों कहलाती है कोजागरी पूर्णिमा? जानें व्रत की विधि और चमत्कारी लाभ

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वर्ष 2026 में आश्विन पूर्णिमा, जिसे शरद पूर्णिमा या ‘कोजागरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है, 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

क्या आपने कभी सोचा है कि शरद ऋतु की सबसे खूबसूरत रात कौन सी होती है? वह रात है आश्विन पूर्णिमा की, जिसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह सिर्फ एक पूर्णिमा नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और जागरण का एक अद्भुत पर्व है। इस दिन व्रत रखने और कुछ विशेष अनुष्ठान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य आता है।

क्या है कोजागरी पूर्णिमा का अर्थ? (Meaning of Kojagari Purnima)

“कोजागरी” शब्द संस्कृत के “को जागारति” से बना है, जिसका अर्थ है “कौन जाग रहा है?”। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी पूजा-अर्चना कर रहा है। जो लोग इस रात जागते हैं और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उन्हें देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसीलिए इस पूर्णिमा को जागरूकता का पर्व (Festival of Awakening) भी कहते हैं।

कोजागरी पूर्णिमा का महत्व (Significance of Kojagari Purnima)

इस पूर्णिमा को और भी कई नामों से जाना जाता है, जैसे शरद पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी पूर्णिमा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत की वर्षा करती हैं। इन किरणों में औषधीय गुण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माने जाते हैं। यही वजह है कि इस रात खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने का रिवाज है।

इस पूर्णिमा के मुख्य लाभ

  • माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य की कमी नहीं होती।
  • पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
  • चंद्रमा की किरणों से रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) मजबूत होती है।
  • यह व्रत मन को शांत और एकाग्र करने में मदद करता है।

कोजागरी पूर्णिमा की व्रत विधि (Rituals of Kojagari Purnima)

अगर आप इस दिन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन विधियों का पालन करें:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर को साफ करें और एक चौकी पर माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। माता लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल वस्त्र, रोली, चंदन, अक्षत, धूप और दीपक अर्पित करें। भगवान विष्णु और शिवजी की भी पूजा करें।
  • रात में चंद्रमा के पूर्ण उदय होने पर, एक चांदी या मिट्टी के बर्तन में खीर बनाएं। खीर को रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखें ताकि उसमें अमृत तत्व समा जाएं।
  • इस रात “को जागारति” का भाव रखते हुए, पूरी रात जागरण करें। आप माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं, जैसे “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः”। भजन और कीर्तन भी कर सकते हैं।
  • अगली सुबह, चंद्रमा की रोशनी में रखी हुई खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और परिवार के सदस्यों में बांटें। यह खीर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती है।

व्रत के चमत्कारी लाभ (Miraculous Benefits)

  • यह व्रत सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जिससे उसकी किरणें अधिक प्रभावशाली होती हैं। खीर को खुले में रखने से वह चंद्रमा की किरणों में मौजूद सूक्ष्म तत्वों (micro-elements) को सोख लेती है। इस प्रसाद को खाने से शरीर को ऊर्जा और शक्ति मिलती है।
  • इस दिन जागरण करने से मन एकाग्र होता है और नकारात्मक विचार (negative thoughts) दूर होते हैं। यह एक तरह का आध्यात्मिक अभ्यास (spiritual practice) है, जो हमें आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।
  • आश्विन पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा एक ऐसा पर्व है जो हमें प्रकृति से जुड़ने, स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अपनी आध्यात्मिक चेतना को जगाने का अवसर देता है। तो इस साल, आप भी इस अद्भुत रात का अनुभव जरूर करें।

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