जब ते राम भाए घर आए
|| जब ते राम भाए घर आए || जब तें रामु ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए ॥ भुवन चारिदस भूधर भारी । सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी ॥1॥ रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई । उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई ॥ मनिगन पुर नर नारि सुजाती । सुचि अमोल सुंदर सब भाँती…