तृष्णा ना जाए मन से
|| तृष्णा ना जाए मन से || तृष्णा ना जाये मन से ॥ दोहा – मथुरा वृन्दावन सघन, और यमुना के तीर, धन्य धन्य माटी सुघर, धन्य कालिंदी नीर ॥ कृष्णा बोलो कृष्णा, हरे कृष्णा राधे कृष्णा ॥ तृष्णा ना जाये मन से, कृष्णा ना आये मन में, जतन करूँ मैं हजार, कैसे लगेगी नैया…