हनुमानजी का शाबर मंत्र

|| हनुमानजी का शाबर मंत्र (Hanuman ji Shabar Mantra PDF) || आत्म सुरक्षा हेतु श्री हनुमानजी का शाबर मंत्र ॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥ शत्रु दमन हेतु श्री हनुमानजी का शाबर मंत्र हनुमान पहलवान…

हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ सहित

|| हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ सहित || || दोहा || श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायकु फल चारि। अर्थ- श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों…

पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम् अर्थ सहित

|| श्री पंचमुखहनुमत्कवच स्तोत्र एवं अर्थ || श्री गणेशाय नमः। ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:। गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं। क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:। अर्थ: इस पंचमुख हनुमत कवच स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख विराट हनुमान जी हैं, ह्रीं बीज मंत्र…

श्री पवनसुत हनुमान आरती

॥ श्री पवनसुत हनुमान आरती (Pawansuta Hanuman Aarti PDf) ॥ जयति मंगलागार, संसार, भारापहर, वानराकार विग्रह पुरारी। राम-रोषानल, ज्वालमाला मिषध्वान्तचर-सलभ-संहारकारी॥ जयति मरुदन्जनामोद-मन्दिर, नतग्रीवसुग्रीव-दुःखैकबन्धो। यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर, सिद्ध-सुर-सज्जनानन्दसिन्धो॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति रुद्राग्रणी, विश्ववन्द्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती। सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी, रामहित, रामभक्तानुवर्ती॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति संग्रामजय, रामसन्देशहर, कौशला-कुशल-कल्याणभाषी। राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि नर-नारि-शीतलकरणकल्पशाषी॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति सिंहासनासीन सीतारमण, निरखि निर्भर हरष नृत्यकारी।…

श्री हनुमान अष्टक

|| हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak PDF) || बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो । देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ बालि…

Kamada Ekadashi 2025 – जानिए कामदा एकादशी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और पूजा विधि

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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘कामदा एकादशी’ कहा जाता है। यह हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी होती है। इसे फलदा एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि इसे बहुत ही फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत रखने से व्रती को प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल सकती है।…

श्री चामुण्डा देवी आरती

|| श्री चामुण्डा देवी आरती || जय चामुंडा माता मैया जय चामुंडा माता I सरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता II मैया जय चामुंडा माता II चाँद मूंद दो राक्षस हुए है बलसाली I उनको तूने मारा क्रोध दृष्टि डाली II मैया जय चामुंडा माता II चौसठ योगिनी आकर तांडव नृत्य करे I…

श्री नैना देवी आरती

|| श्री नैना देवी आरती || तेरा अदभुत रूप निराला, आजा ! मेरी नैना माई ए | तुझपै तन मन धन सब वारूं, आजा ! मेरी नैना माई ए || सुन्दर भवन बनाया तेरा, तेरी शोभा न्यारी | नीके नीके खम्भे लागे, अद्-भुत चित्तर करी तेरा रंग बिरंगा द्वारा || आजा ! मेरी नैना माई…

दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला स्तोत्र लाभ सहित

|| श्री दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला स्तोत्र के लाभ || श्री दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला स्तोत्र का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी कष्ट दूर होते है यह स्तोत्र बड़ा ही चमत्कारी है इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी दुखो का अंत होता है…

श्री दुर्गा सहस्रनामावली

श्री दुर्गा सहस्रनामावली माँ दुर्गा के 1000 दिव्य और शक्तिशाली नामों का संकलन है। इन नामों में माँ दुर्गा के अनंत स्वरूपों, उनकी महिमा, शक्ति, करुणा और उनके भक्तों पर कृपा का वर्णन है। यह सहस्रनामावलि देवी के भक्तों को अद्भुत ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती है। नवरात्रि और विशेष पर्वों में इसका पाठ अत्यधिक…

श्रीदुर्गासप्तशत्याम (Shridurgasaptshatyam)

श्रीदुर्गासप्तशत्याम (Shridurgasaptshatyam)

श्रीदुर्गासप्तशती, जिसे चंडी पाठ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। यह ग्रंथ देवी दुर्गा की महिमा और उनकी शक्तियों का वर्णन करता है। श्रीदुर्गासप्तशती मुख्य रूप से 700 श्लोकों का संग्रह है, जो मार्कंडेय पुराण का एक हिस्सा है। यह ग्रंथ न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता…

दुर्गा दकार सहस्रनामावली

दुर्गा दकार सहस्रनामावली देवी दुर्गा के दिव्य स्वरूप और गुणों का वर्णन करने वाला ग्रंथ है। इसमें माँ दुर्गा के नामों को “द” अक्षर से प्रारंभ करके संकलित किया गया है। यह सहस्रनामावली देवी के शक्ति, करुणा, और संरक्षणकारी रूप का प्रतीक है। इसका पाठ भक्तों को न केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान करता है, बल्कि…

श्री दुर्गा स्तुति (Shri Durga Stuti)

श्री दुर्गा स्तुति (Shri Durga Stuti)

श्री दुर्गा स्तुति देवी दुर्गा की महिमा और स्तुतियों का संग्रह है। यह पुस्तक प्रदीप पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित की गई है और यह भक्तों के लिए देवी दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और उनसे शक्ति, साहस, और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है। इस पुस्तक में देवी दुर्गा की आराधना से…

दुर्गा आराधना (Durga Aaradhana)

दुर्गा आराधना (Durga Aaradhana)

दुर्गा आराधना एक अद्वितीय पुस्तक है, जो मां दुर्गा की पूजा, आराधना, और साधना के सभी आवश्यक पहलुओं को समर्पित है। इस पुस्तक का प्रकाशन राजौरी इन्वेस्टमेंट एंड सेविंग कॉर्प द्वारा किया गया है। यह पुस्तक देवी दुर्गा के प्रति भक्ति भाव को प्रकट करने, उनकी पूजा विधि समझने और उनके आशीर्वाद से जीवन को…

नवदुर्गा (Navdurga PDF Book)

नवदुर्गा (Navdurga)

नवदुर्गा गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक विशेष पुस्तक है, जो हिंदू धर्म की नवदुर्गा परंपरा पर आधारित है। यह पुस्तक देवी दुर्गा के नौ रूपों का परिचय, उनकी उपासना पद्धतियों, और उनके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाती है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य भक्तों को नवदुर्गा की महिमा और उनके पूजन विधानों की…

माँ दुर्गा शाबर मंत्र लाभ सहित

|| माँ दुर्गा शाबर मंत्र || डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड। प्रगट देवि! तुहि झुण्डन के झुण्ड। खगर दिखा खप्पर लियां, खड़ी कालका। तागड़दे मस्तंग, तिलक मागरदे् मस्तंग। चोला जरी का, फागड़ दीफू, गले फुल माल, जय जय जयन्त। जय आदि शक्ति। जय कालका खपर-धनी। जय मचकुट छन्दनी देव। जय-जय महिरा, जय मरदिनी। जय-जय चुण्ड-मुण्ड,…

नवदुर्गा स्तोत्रम्

|| नवदुर्गा स्तोत्रम् || ॥ देवी शैलपुत्री ॥ वन्दे वाञ्छितलाभायचन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढाम् शूलधरांशैलपुत्री यशस्विनीम्॥1॥ ॥ देवी ब्रह्मचारिणी ॥ दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयिब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥2॥ ॥ देवी चन्द्रघण्टा ॥ पिण्डजप्रवरारूढाचन्दकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम्चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥3॥ ॥ देवी कूष्माण्डा ॥ सुरासम्पूर्णकलशम्रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्याम्कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥4॥ ॥ देवी स्कन्दमाता ॥ सिंहासनगता नित्यम्पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवीस्कन्दमाता यशस्विनी॥5॥ ॥ देवी कात्यायनी…

दुर्गा पुष्पाञ्जलि स्तोत्र

|| दुर्गा पुष्पाञ्जलि स्तोत्र || भगवति भगवत्पदपङ्कजं भ्रमरभूतसुरासुरसेवितम् । सुजनमानसहंसपरिस्तुतं कमलयाऽमलया निभृतं भजे ॥ ते उभे अभिवन्देऽहं विघ्नेशकुलदैवते । नरनागाननस्त्वेको नरसिंह नमोऽस्तुते ॥ हरिगुरुपदपद्मं शुद्धपद्मेऽनुरागाद्- विगतपरमभागे सन्निधायादरेण । तदनुचरि करोमि प्रीतये भक्तिभाजां भगवति पदपद्मे पद्यपुष्पाञ्जलिं ते ॥ केनैते रचिताः कुतो न निहिताः शुम्भादयो दुर्मदाः केनैते तव पालिता इति हि तत् प्रश्ने किमाचक्ष्महे । ब्रह्माद्या अपि…

दुर्गा नमस्कार स्तोत्र

|| दुर्गा नमस्कार स्तोत्र || नमस्ते हे स्वस्तिप्रदवरदहस्ते सुहसिते महासिंहासीने दरदुरितसंहारणरते । सुमार्गे मां दुर्गे जननि तव भर्गान्वितकृपा दहन्ती दुश्चिन्तां दिशतु विलसन्ती प्रतिदिशम् ॥ अनन्या गौरी त्वं हिमगिरि-सुकन्या सुमहिता पराम्बा हेरम्बाकलितमुखबिम्बा मधुमती । स्वभावैर्भव्या त्वं मुनिमनुजसेव्या जनहिता ममान्तःसन्तापं हृदयगतपापं हर शिवे ॥ अपर्णा त्वं स्वर्णाधिकमधुरवर्णा सुनयना सुहास्या सल्लास्या भुवनसमुपास्या सुलपना । जगद्धात्री पात्री प्रगतिशुभदात्री भगवती…

नव दुर्गा स्तोत्र

|| नव दुर्गा स्तोत्र || चन्द्रार्धधारकतनूं च वरां चराणां वाचालवाङ्मयकरां च विभवां विभूषाम्। विद्याज्ञवन्दितवरां व्रतपर्वपुण्यां वन्दे शुभां शिवसखीं हिमशैलपुत्रीम्। ॐ शैलपुत्र्यै नमः। दोर्भ्यां कमण्डलुसितस्फटिके दधानां ब्रह्मप्रचारनियुतां सुरसेव्यमानाम्। वेदेषु वर्णितवरां विकटस्वरूपां वन्दे हि चोत्तमगुणां श्रुतिवादिनीं ताम्। ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः। कोपप्रतापशरमौर्वियुतां पुराणां चन्द्रप्रकाशसदृशानलभालयुक्ताम्। वीराभिवाञ्छितसमस्तवरप्रदां तां वन्दे विशालवसनां श्रुतचन्द्रघण्टाम्। ॐ चन्द्रघण्टायै नमः। सत्त्वां सुवर्णवदनां सततं सुतप्तां यज्ञक्रियासु वरदां…

दुर्गा पंचरत्न स्तोत्र

|| दुर्गा पंचरत्न स्तोत्र || ते ध्यानयोगानुगताः अपश्यन् त्वामेव देवीं स्वगुणैर्निगूढाम्। त्वमेव शक्तिः परमेश्वरस्य मां पाहि सर्वेश्वरि मोक्षदात्रि। देवात्मशक्तिः श्रुतिवाक्यगीता महर्षिलोकस्य पुरः प्रसन्ना। गुहा परं व्योम सतः प्रतिष्ठा मां पाहि सर्वेश्वरि मोक्षदात्रि। परास्य शक्तिर्विविधा श्रुता या श्वेताश्ववाक्योदितदेवि दुर्गे। स्वाभाविकी ज्ञानबलक्रिया ते मां पाहि सर्वेश्वरि मोक्षदात्रि। देवात्मशब्देन शिवात्मभूता यत्कूर्मवायव्यवचोविवृत्या। त्वं पाशविच्छेदकरी प्रसिद्धा मां पाहि सर्वेश्वरि मोक्षदात्रि।…

दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati PDF)

दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati)

दुर्गा सप्तशती pdf देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का एक प्रमुख धार्मिक ग्रंथ है, जिसे गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह ग्रंथ देवी महात्म्य के रूप में भी प्रसिद्ध है और इसे मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत शामिल किया गया है। दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक हैं, जो मां दुर्गा के स्वरूप,…

श्री दुर्गा के 108 नाम

|| श्री दुर्गा के 108 नाम || सती- अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली साध्वी- आशावादी भवप्रीता- भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली भवानी- ब्रह्मांड की निवास भवमोचनी- संसार बंधनों से मुक्त करने वाली आर्या- देवी दुर्गा- अपराजेय जया- विजयी आद्य- शुरूआत की वास्तविकता त्रिनेत्र- तीन आँखों वाली शूलधारिणी- शूल धारण करने वाली…

माँ दुर्गा के 32 नाम (देवी दुर्गा की द्वात्रिंश नामावली)

|| माँ दुर्गा के 32 नाम (देवी दुर्गा की द्वात्रिंश नामावली) || दुर्गा दुर्गातिशमनी दुर्गापद्धिनिवारिणी दुर्गमच्छेदनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी दुर्गमासुरसंहन्त्रि दुर्गमायुधधारिणी दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ॥ इति श्रीदुर्गाद्वात्रिंशनामावलिः सम्पूर्णा ॥ 

अक्षय तृतीया श्रीकृष्ण का मुंडन कथा

|| अक्षय तृतीया श्रीकृष्ण का मुंडन कथा || प्राचीन काल में व्रज के लोगों का मुख्य व्यवसाय गौ-चारण ही था इसलिए मुख्य व्यवसाय से सम्बंधित कुछ वर्जनाएं भी थी। अब इसे वर्जनाएं कहें या सामाजिक नियम बालक का जब तक मुंडन नहीं हो जाता तब तक उसे जंगल में गाय चराने नहीं जाने दिया जाता…

जग जननी जय जय आरती

|| Jagjanni Jay Jay Aarti || जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय! भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी… तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा। सत्य सनातन, सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी… आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी। अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी… अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी। कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी… तू विधिवधू, रमा, तू…

अंबे तू है जगदंबे काली आरती

|| Kali Maiya ki Aarti || अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती। तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को…

गौ माता के सभी मंत्र

|| गौ माता के सभी मंत्र || गौ रक्षा का मंत्र ॐ नमो भगवते त्र्यम्बकायोपशमयोपशमय चुलु चुलु मिलि मिलि भिदि भिदि गोमानिनि चक्रिणि हूँ फट् । अस्मिन्प्रामे गोकुलस्य रक्षां कुरु शान्तिं कुरु कुरु ठ ठ ठ ।। (अग्नि पुराण: ३०२.२९-३०) गौ नमस्कार मंत्र – गौ माता को नमस्कार करने के मन्त्र नमो गोभ्यः श्रीमतीभ्यः सौरभेयीभ्य…

Shri Girija Mata Aarti

|| Shri Girija Mata Aarti || Om Jay Girija Maiyya, Maa Jay Girija Maiyya, Jo Jan Tumko Dhyaata, Jo Jan Tumko Dhyaata, Anupam Sukh Paata, Om Jay Girija Maiyya, Om Jay Girija Maiyya, Maa Jay Girija Maiyya, Jo Jan Tumko Dhyaata, Jo Jan Tumko Dhyaata, Anupam Sukh Paata, Om Jay Girija Maiyya, Koshi Nadi Suhaavani,…

संकटा माता की आरती

|| संकटा माता की आरती || जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी । शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥ || जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता, सुर-नर-मुनि सब टेरी । कष्ट निवारण करहु हमारा, लावहु तनिक न देरी ॥ || जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु…

Bajreshwari Mata Ki Aarti

|| Bajreshwari Mata Ki Aarti || Om Jai Bajreshwari Mata, Maiya Jai Bajreshwari Mata. Kangra Mandir Tera, Sabke Man Bhata. || Om Jai Bajreshwari Mata…|| Shaktidham Hai Aanchal, Pindi Roop Liya. Palanahari Bankar, Jag Kalyan Kiya. || Om Jai Bajreshwari Mata…|| Jagmag Jyoti Jage, Andhiyara Harti. Annapurna Tu Hi, Bhandare Bharti. || Om Jai Bajreshwari…

बज्रेश्वरी माता आरती

|| बज्रेश्वरी माता आरती || ॐ जय बज्रेश्वरी माता, मैया जय बज्रेश्वरी माता। कांगड़ा मंदिर तेरा, सबके मन भाता॥ || ॐ जय बज्रेश्वरी माता…|| शक्तिधाम है आंचल, पिंडी रूप लिया। पालनहारी बनकर, जग कल्याण किया॥ || ॐ जय बज्रेश्वरी माता…|| जगमग ज्योति जागे, अंधियारा हरती। अन्नपूर्णा तू ही, भंडारे भरती॥ || ॐ जय बज्रेश्वरी माता…||…

माता छिन्‍नमस्‍ता की आरती

|| माता छिन्‍नमस्‍ता की आरती || आइए हम छिन्‍नमस्‍ता की उतारें आरती। भैरवी भी भक्ति से दिनरात चरण पखारती।। संग है विजया जया का रक्‍त धारा बह रही। लोक मंगल के लिए मां कष्‍ट भारी सह रही। सिर हथेली पर रख सदा रख भक्‍तगण को तारती। आइए हम छिन्‍नमस्‍ता की उतारें आरती।। रक्‍त वसना सिर…

श्री भैरवी माता आरती

|| श्री भैरवी माता आरती || जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया सहज सुमति वर दियउ गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया वासर रैनि सबासन शोभित चरण चन्‍द्रमणि चूड़ा कतओक दैत्‍य मारि मुख मेलल कतओ उगिलि कएल कूड़ा सामर बरन नयन अनुरंजित जलद जोग फुलकोका कट-कट विकट ओठ पुट पांडरि लिधुर फेन उठ फोंका घन-घन-घनय…

श्री ब्राह्मणी माता की आरती

|| श्री ब्राह्मणी माता की आरती || जय अम्बे गौरी, मइया जय आनन्द करनी । तुमको निश-दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री ॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृग मद को । कमल सरीखे दाऊ नैना, चन्द्र बदन नीको ॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै । रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै ॥ केहरि वाहन राजत,…

श्री जिनवाणी माता आरती

|| श्री जिनवाणी माता आरती || ॐ जय जिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता, तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी ॥ श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम वाणी, जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी ॥ ॐ जय जिनवाणी माता… कुमत कुलाचल चूरन, वज्र सम सरधानी। नव नियोग निक्षेपन, देखत दरपानी ॥ ॐ जय जिनवाणी माता… पातक…

कांगड़ा माता आरती

॥ कांगड़ा माता आरती ॥ ॐ जय बज्रेश्वरी माता मैया जय बज्रेश्वरी माता । कांगड़ा मंदिर तेरा सबके मन भाता ॥ ॐ जय बज्रेश्वरी माता… शक्तिधाम है आंचल पिंडी रूप लिया । पालनहारी बनकर जग कल्याण किया ॥ ॐ जय बज्रेश्वरी माता… जगमग ज्योति जागे अंधियारा हरती । अन्नपूर्णा तू ही भंडारे भरती ॥ ॐ…

गौमाता आरती

|| गौमाता आरती || आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥ अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनि, अविचल अमल मुक्तिपददायिनि । सुर मानव सौभाग्य विधायिनि, प्यारी पूज्य नंद छैय्या की ॥ आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥ अख़िल विश्‍व प्रतिपालिनी माता, मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता । रोग शोक संकट…

श्री चिंतपूर्णी माता आरती

|| श्री चिंतपूर्णी माता आरती || चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जग को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ, काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥ ॥ भोली माँ ॥ सिन्हा पर भाई असवार, भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥ ॥ भोली माँ ॥ एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा, तीजे त्रिशूल सम्भालो ॥…

भारत माता आरती

|| भारत माता आरती || आरती भारत माता की, जगत के भाग्य विधाता की । सिर पर हिम गिरिवर सोहै, चरण को रत्नाकर धोए, देवता गोदी में सोए, रहे आनंद, हुए न द्वन्द, समर्पित छंद, बोलो जय बुद्धिप्रदाता की, जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की, जगत के भाग्यविधाता की । जगत में…

शैल सुता की आरती

|| शैल सुता की आरती || आरती कीजे शैल सुता की, जगदम्बा की आरती कीजे, आरती कीजे जगदम्बा की, || आरती कीजे शैंल सुता की || स्नेह सुधा सुख सुन्दर लीजै, जिनके नाम लेट दृग भीजै, ऐसी वह माता वसुधा की, जगदम्बा की आरती कीजे, || आरती कीजे शैंल सुता की || पाप विनाशिनी कलिमल…

श्री गणाधिपत स्तोत्रम्

|| श्री गणाधिप स्तोत्र || सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं, सुरासुरैर्नमस्कृतं जरादिमृत्युनाशकम्॥ गिरा गुरु श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्थका, नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम्॥ गिरीन्द्रजामुखाम्बुजप्रमोददानभास्करं, करीन्द्रवक्त्रमानताघसंघवारणोद्यतम्। सरीसृपेशबद्धकुक्षिमाश्रयामि संततं, शरीरकान्तिनिर्जिताब्जबन्धुबालसंततिम्॥ शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं, प्रकाममिष्टदायिनं सकामनम्रपङ्क्तये। चकासनं चतुर्भुजैर्विकासिपद्मपूजितं, प्रकाशितात्मतत्त्वकं नमाम्यहं गणाधिपम्॥ नराधिपत्वदायकं स्वरादिलोकदायकं, जरादिरोगवारकं निराकृतासुरव्रजम्। कराम्बुजैर्धरन्सृणीन् विकारशून्यमानसैर्हृदा, सदा विभावितं मुदा नमामि विघ्नपम्॥ श्रमापनोदनक्षमं समाहितान्तरात्मना, समाधिभिः सदार्चितं क्षमानिधिं गणाधिपम्। रमाधवादिपूजितं यमान्तकात्मसम्भवं, शमादिषड्गुणप्रदं नमामि…

श्री कनकधारा स्तोत्र

|| श्री कनकधारा स्तोत्र || अङ्ग हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् । अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥ मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥ विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्ष – मानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि । ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्ध – मिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः ॥ आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्द – मानन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम् । आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः…

श्री राम स्तुति

|| श्री राम स्तुति लिरिक्स || ॥ दोहा ॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द…

राम नवमी व्रत कथा

|| राम नवमी व्रत कथा || भगवान श्री विष्णु ने अपने सातवें अवतार के रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र के रूप में जन्म लेकर अनेक अद्भुत लीलाएं रचीं। अंततः उन्होंने अहंकारी रावण का संहार कर धर्म की विजय स्थापित की। श्री राम जी के जन्मोत्सव को राम नवमी के रूप में श्रद्धा और हर्षोल्लास…

वैशाख अमावस्या व्रत कथा

|| वैशाख अमावस्या व्रत कथा || वैशाख मास की अमावस्या को वैशाख अमावस्या कहा जाता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का दूसरा माह होता है। शास्त्रों में इस दिन को धर्म-कर्म, स्नान-दान एवं पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। वैशाख अमावस्या को विशेष रूप से पितरों की मुक्ति के…

श्री वाराही सहस्त्रनाम

|| श्री वाराही सहस्त्रनाम || ॐ ऐं ग्लौं वाराह्यै नमः । ॐ ऐं ग्लौं वामन्यै नमः । ॐ ऐं ग्लौं वामायै नमः । ॐ ऐं ग्लौं बगळायै नमः । ॐ ऐं ग्लौं वासव्यै नमः । ॐ ऐं ग्लौं वसवे नमः । ॐ ऐं ग्लौं वैदेह्यै नमः । ॐ ऐं ग्लौं विरसुवे नमः । ॐ ऐं…

गर्भ गीता (Garbh Geeta)

गर्भ गीता (Garbh Geeta)

गर्भ गीता एक दुर्लभ और आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसमें गर्भस्थ शिशु और माता-पिता के कर्तव्यों से संबंधित गूढ़ रहस्यों का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ हमें यह समझाता है कि गर्भ में ही शिशु को संस्कार कैसे दिए जाएं और माता-पिता को उसके पालन-पोषण की प्रारंभिक अवस्थाओं में क्या ध्यान रखना चाहिए। गर्भ गीता…

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