श्री राधा स्तुति अर्थ सहित

|| श्री राधा स्तुति अर्थ सहित || नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।। रासमण्डल में निवास करने वाली हे परमेश्वरि ! आपको नमस्कार है। श्रीकृष्ण को प्राणों से भी अधिक प्रिय हे रासेश्वरि ! आपको नमस्कार है। नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।। ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं के द्वारा वन्दित चरणकमल वाली हे त्रैलोक्यजननी !…

श्री महालक्ष्मी स्तुति

|| श्री महालक्ष्मी स्तुति || आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि। यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।। सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि। पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।। विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि। विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।। धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि। धनं देहि श्रियं देहि…

एकादशी महात्मय

एकादशी महात्मय

एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, सभी पापों का नाश होता, मोह-माया के बंधन खत्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी का व्रत पूरे मन से किया जाना चाहिए और ऐसा नहीं लगना चाहिये कि ये व्रत करके आप अपने शरीर…

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति

|| Nagendra Haraya Trilochanaya || नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय॥१॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै ‘म’ काराय नमः शिवाय॥२॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द- सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै ‘शि’ काराय नमः शिवाय॥३॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य- मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै ‘व’ काराय नमः शिवाय॥४॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै ‘य’ काराय नमः…

श्री सरस्वती कवच

॥ सरस्वती कवच ॥ श्रणु वत्स प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वकामदम्। श्रुतिसारं श्रुतिसुखं श्रुत्युक्तं श्रुतिपूजितम्॥ उक्तं कृष्णेन गोलोके मह्यं वृन्दावने वने। रासेश्वरेण विभुना रासे वै रासमण्डलै॥ अतीव गोपनीयं च कल्पवृक्षसमं परम्। अश्रुताद्भुतमन्त्राणां समूहैश्च समन्वितम्॥ यद् धृत्वा पठनाद् ब्रह्मन् बुद्धिमांश्च बृहस्पति:। यद् धृत्वा भगवाञ्छुक्र: सर्वदैत्येषु पूजितः॥ पठनाद्धारणाद्वाग्मी कवीन्द्रो वाल्मिको मुनिः। स्वायम्भुवो मनुश्चैव यद् धृत्वा सर्वपूजितः॥ कणादो गौतमः कण्वः…

श्री नील सरस्वती स्तोत्रम्

॥ श्री नील सरस्वती स्तोत्रम् ॥ ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्। ॥ ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्। ॥ जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्। ॥ सौम्यक्रोधधरे रुपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते। सृष्टिरुपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्। ॥ जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।…

श्री सरस्वती अष्टकम्

॥ श्री सरस्वती अष्टकम् ॥ ॥ शतानीक उवाच ॥ महामते महाप्राज्ञसर्वशास्त्रविशारद। अक्षीणकर्मबन्धस्तुपुरुषो द्विजसत्तम॥1॥ मरणे यज्जोपेज्जाप्यंयं च भावमनुस्मरन्। परं पदमवाप्नोतितन्मे ब्रूहि महामुने॥2॥ ॥ शौनक उवाच ॥ इदमेव महाराजपृष्टवांस्ते पितामहः। भीष्मं धर्मविदां श्रेष्ठंधर्मपुत्रो युधिष्ठिरः॥3॥ ॥ युधिष्ठिर उवाच ॥ पितामह महाप्राज्ञसर्वशास्त्रविशारदः। बृहस्पतिस्तुता देवीवागीशेन महात्मना। आत्मायं दर्शयामासंसूर्य कोटिसमप्रभम्॥4॥ ॥ सरस्वत्युवाच ॥ वरं वृणीष्व भद्रंते यत्ते मनसि विद्यते। ॥ बृहस्पतिरूवाच…

सरस्वती वंदना

|| Saraswati Vandana || मुझको नवल उत्थान दो माँ सरस्वती वरदान दो. तेरी करूं माँ प्रार्थना . पूरी करो माँ साधना नव गति नवल लय ताल दो माँ सरस्वती वरदान दो… मुझको नवल उत्थान दो माँ सरस्वती वरदान दो माया मुझे नहीं छल सके… विद्या विनय का ज्ञान दो माँ सरस्वती वरदान दो. मुझको नवल…

सरस्वती पूजा विधि मंत्र (Saraswati Puja Book)

Saraswati puja book

सरस्वती माता की पूजा करने वाले को सबसे पहले मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप और अगरबत्ती जलानी चाहिए। इसके बाद पूजन आरंभ करनी चाहिए। सबसे पहले अपने आपको तथा आसन को इस मंत्र से शुद्घ करें- “ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:॥”…

ईशावास्योपनिषद् (Ishavasyopanishad)

ईशावास्योपनिषद् (Ishavasyopanishad)

ईशावास्योपनिषद्, जिसे ईशोपनिषद् भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण उपनिषद है जो शुक्ल यजुर्वेद का भाग है। यह उपनिषद अपने छोटे आकार (केवल 18 मंत्र) के बावजूद, वेदान्त दर्शन के गूढ़ तत्वों को सरलता से प्रस्तुत करता है। ईशावास्योपनिषद् का मुख्य विषय आत्मा और ब्रह्म की एकता का प्रतिपादन करना है। इसमें बताया गया है…

फाल्गुन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

|| फाल्गुन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा || प्रत्येक माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश को समर्पित है। इस दिन विधिपूर्वक भगवान श्री गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के…

उच्छिष्ट गणेश कवचम्

|| उच्छिष्ट गणेश कवचम् || अथ श्रीउच्छिष्टगणेशकवचं प्रारम्भः देव्युवाच ॥ देवदेव जगन्नाथ सृष्टिस्थितिलयात्मक । विना ध्यानं विना मन्त्रं विना होमं विना जपम् ॥ १॥ येन स्मरणमात्रेण लभ्यते चाशु चिन्तितम् । तदेव श्रोतुमिच्छामि कथयस्व जगत्प्रभो ॥ २॥ ईश्वर उवाच ॥ श्रुणु देवी प्रवक्ष्यामि गुह्याद्गुह्यतरं महत् । उच्छिष्टगणनाथस्य कवचं सर्वसिद्धिदम् ॥ ३॥ अल्पायासैर्विना कष्टैर्जपमात्रेण सिद्धिदम् । एकान्ते…

64 Tantra Book

64 Tantra Book

64 तंत्र हिंदी – 64 Tantra हिंदू तंत्र में कुल 92 ग्रंथ हैं; इनमें से, 64 भैरव तंत्र या कश्मीर शैव तंत्र के रूप में जाने जाते हैं, जो विशुद्ध रूप से अभेदा (शाब्दिक अर्थ “बिना भेदभाव के” या अद्वैतवादी) हैं। इसके अलावा, 18 भेदभेद हैं (शाब्दिक अर्थ “भेदभाव के साथ और बिना भेदभाव के”…

गणेश कवचम्

|| गणेश कवचम् || एषोति चपलो दैत्यान् बाल्येपि नाशयत्यहो । अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम ॥ 1 ॥ दैत्या नानाविधा दुष्टास्साधु देवद्रुमः खलाः । अतोस्य कंठे किंचित्त्यं रक्षां संबद्धुमर्हसि ॥ 2 ॥ ध्यायेत् सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहु माद्ये युगे त्रेतायां तु मयूर वाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् । ई द्वापरेतु गजाननं युगभुजं रक्तांगरागं विभुं तुर्ये तु…

श्री गणेशाष्टकम्

॥ श्री गणेशाष्टकम् ॥ यतोऽनन्तशक्तेरनन्ताश्च जीवायतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते। यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतश्चाविरासीज्जगत्सर्वमेतत्तथाऽब्जासनो विश्वगो विश्वगोप्ता। तथेन्द्रादयो देवसङ्घा मनुष्याः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतो वह्निभानू भवो भूर्जलं च यतः सागराश्चन्द्रमा व्योम वायुः। यतः स्थावरा जङ्गमा वृक्षसङ्घा सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतो दानवाः किन्नरा यक्षसङ्घा यतश्चारणा वारणाः श्वापदाश्च। यतः…

धन्वंतरि मंत्र

॥ ॐ धन्वंतराये नमः॥ आरोग्य प्राप्ति हेतु धन्वंतरि देव का पौराणिक मंत्र ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥ अर्थात् :- परम भगवन को, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरि कहते हैं, जो अमृत कलश लिए हैं, सर्व भयनाशक…

सुखकर्ता दुखहर्ता – श्री गणेश आरती

|| सुखकर्ता दुखहर्ता – श्री गणेश आरती || सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची कंठी झलके माल मुकताफळांची जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति जय देव जय देव रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा चंदनाची उटी कुमकुम केशरा हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा रुन्झुनती नूपुरे…

श्री गणेश आरती

|| श्री गणेश आरती || जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।…

गणेश अंग पूजा मंत्र

|| गणेश अंग पूजा मंत्र || गणेश अंग पूजा भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष पूजा विधि है। इसमें भगवान के प्रत्येक अंग को अलग-अलग मंत्रों से पूजा जाता है। यह माना जाता है कि इस पूजा से भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सनातन धर्म में…

मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे – भजन

|| मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे – भजन || मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे भोले बाबा जी की आँखों के तारे प्रभु सभा बीच में आ जाना आ जाना ॥ मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे ॥ तेरी काया कंचन कंचन, किरणों का है जिसमे बसेरा। तेरी सूंड सुंडाली मूरत, तेरी आँखों मे खुशियों का डेरा…

गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी – भजन

|| गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी – भजन || गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी । सुरहिन गैया को गोबर मनागौं, दिग धर अगना लीपाऊं, आज सुध लीजे हमारी । गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी ।…

मनसा देवी व्रत कथा एवं पूजा विधि

|| मनसा देवी पूजा विधि || साधना सामग्री लाल चन्दन की लकड़ी के टुकड़े नीला और सफ़ेद धागा (लगभग 8-8 उंगल का) कलश के लिए नारियल सफ़ेद व लाल वस्त्र पूजन में फल, पुष्प, धूप, दीप, पाँच मेवा आदि स्थापना सबसे पहले पूजा स्थान में एक बाजोट पर सफ़ेद रंग का वस्त्र बिछा दें। उस…

श्री विजय पार्वती व्रत कथा और पूजन विधि

|| विजया-पार्वती व्रत का पूजन || आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। तत्पश्चात व्रत का संकल्प करके माता पार्वती का स्मरण करें। घर के मंदिर में शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। फिर शिव-पार्वती को कुमकुम, शतपत्र, कस्तूरी, अष्टगंध और फूल चढ़ाकर पूजा करें। नारियल,…

श्री सीता नवमी व्रत कथा और सीता नवमी पूजन विधि

|| सीता नवमी पूजन विधि || सीता नवमी के दिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान के पश्चात व्रत का संकल्प लें। एक लकड़ी के पटिये पर पीला वस्त्र बिछाकर माता सीता की श्रीराम सहित मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। राम-सीता की प्रतिमा पर श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। इस दिन दूध, पुष्प, धूप, दीप…

श्री रामनवमी व्रत कथा

|| श्री रामनवमी की पौराणिक कथा || त्रेता युग में चैत्र मास की नवमी तिथि के दिन भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के घर में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। श्रीराम को उनके सुशासन, मर्यादित व्यवहार और सदाचार युक्त शासन के…

श्री भैरवी व्रत कथा

|| माँ भैरवी की कथा || यह कथा भगवान शिव और उनकी पहली पत्नी माता सती से जुड़ी है। माता सती को ही उनकी दूसरी पत्नी माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म माना जाता है। भैरवी महाविद्या की कहानी के अनुसार, एक बार माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन…

गंगा अवतरण राजा भगीरथ की कथा

|| गंगा अवतरण राजा भगीरथ की कथा || अयोध्या के महाराजा सगर की दो पत्नियां थीं जिनका नाम था केशिनी और सुमति। जब वर्षों तक महाराज सगर के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने हिमालय में भृगु ऋषि की सेवा की। भृगु ऋषि ने उनकी सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने को कहा। सगर…

तारा रानी की कथा

|| तारा रानी की कथा || माता के जागरण में माता तारा रानी देवी की कथा कहने सुनने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है बिना इस कथा के जागरण को संपूर्ण नहीं माना जाता है| कथा इस प्रकार है महाराजा दक्ष की दो पुत्रियां तारा देवी और रुक्मण भगवती दुर्गा देवी…

कोकिला व्रत कथा

|| कोकिला व्रत कथा || कोकिला व्रत से जुड़ी कथा का संबंध भगवान शिव एवं माता सती से जुड़ा है। माता सती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए लम्बे समय तक कठोर तपस्या को करके उन्हें पाया था। कोकिला व्रत कथा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार देवी…

नृसिंह अवतरण पौराणिक कथा

|| नृसिंह अवतरण पौराणिक कथा || पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह न तो किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सके न ही किसी पशु द्वारा। न दिन में मारा जा सके, न रात में, न जमींन पर मारा जा सके, न आसमान में। इस वरदान के नशे में…

कालयवन वध कथा

|| कालयवन वध कथा || कालयवन वध की कथा का वर्णन विष्णु पुराण के पंचम अंश के तेईसवें अध्याय मे किया गया है। कालयवन ऋषि शेशिरायण का पुत्र था। गर्ग गोत्र के ऋषि शेशिरायण त्रिगत राज्य के कुलगुरु थे। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की और एक अजेय पुत्र के लिए वार माँगा। भगवान शिव…

आशा दशमी पौराणिक व्रत कथा

|| आशा दशमी पौराणिक व्रत कथा || आशा दशमी की पौराणिक व्रत कथा, जो भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई थी, इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में निषध देश में एक राजा राज्य करते थे, जिनका नाम नल था। उनके भाई पुष्कर ने युद्ध में जब उन्हें पराजित कर दिया, तब नल अपनी भार्या…

श्री रुक्मणी मंदिर प्रादुर्भाव पौराणिक कथा

|| श्री रुक्मणी मंदिर प्रादुर्भाव पौराणिक कथा || यदु वंशी श्रीकृष्ण दुर्वासा ऋषि को अपना कुलगुरु मानते थे। जब श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह हुआ तो वे अशीर्वाद प्राप्ति के लिए दुर्वासा ऋषि से मिलने के लिए उनके आश्रम पधारे, जो द्वारका से दूरी पर स्थित था। श्री कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा को महल आने…

हिंदू व्रत-त्यौहारों की पूरी सूची 2025, जानिए हिंदू व्रत-त्यौहार मासिक कैलेंडर

hindu festivals

हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। ये धार्मिक अनुष्ठान व्यक्ति को ईश्वर के करीब लाने और आध्यात्मिक विकास में सहायक होते हैं। 2025 में भी कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। 2025 में हिंदू व्रत-त्यौहारों की पूरी सूची और मासिक कैलेंडर आपके लिए प्रस्तुत है। यह कैलेंडर आपको वर्षभर के…

सीता अवतरण पौराणिक कथा

|| सीता अवतरण पौराणिक कथा || पौराणिक कथा के अनुसार मारवाड़ क्षेत्र में एक वेदवादी श्रेष्ठ धर्मधुरीण ब्राह्मण निवास करते थे। उनका नाम देवदत्त था। उन ब्राह्मण की बड़ी सुंदर रूपगर्विता पत्नी थी, उसका नाम शोभना था। ब्राह्मण देवता जीविका के लिए अपने ग्राम से अन्य किसी ग्राम में भिक्षाटन के लिए गए हुए थे।…

गीतादर्शन (Geeta Darshan)

गीतादर्शन (Geeta Darshan)

गीतादर्शन लाला कन्नोमल द्वारा रचित एक प्रभावशाली और गहन दार्शनिक पुस्तक है। यह ग्रंथ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों का गहन विश्लेषण और व्याख्या प्रस्तुत करता है। कन्नोमल जी ने इसे न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से लिखा है, बल्कि आधुनिक जीवन के संदर्भ में गीता की प्रासंगिकता को भी स्पष्ट…

भगवान गौतम बुद्ध (Bhagvan Gautam Buddha)

भगवान गौतम बुद्ध (Bhagvan Gautam Buddha)

भगवान गौतम बुद्ध चन्द्रिका प्रसाद जिज्ञासु द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पुस्तक है, जो भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों, और उनके द्वारा स्थापित बौद्ध धर्म की गहराई को समझने का प्रयास करती है। यह पुस्तक न केवल भगवान बुद्ध के ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण को उजागर करती है, बल्कि उनके विचारों और शिक्षाओं…

मरणकण्डिका (Marankandika)

मरणकण्डिका (Marankandika)

मरणकण्डिका एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है, जो विशेष रूप से अंतिम संस्कार के समय किए जाने वाले कर्मकांड और विधियों का वर्णन करता है। इस ग्रंथ का उपयोग मुख्य रूप से उन पंडितों और व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, जो पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। मरणकण्डिका का मुख्य उद्देश्य मृत आत्मा की शांति और…

दशावतार कथा (Dashavatar Katha)

दशावतार कथा (Dashavatar Katha)

दशावतार कथा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने वाला एक अनमोल ग्रंथ है, जिसकी रचना अक्षयवट मिश्र ने की है। यह पुस्तक भगवान विष्णु के दस अवतारों की कहानियों का एक प्रेरणादायक संग्रह है। पुस्तक में धार्मिक, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को रोचक कथा शैली में प्रस्तुत किया गया है, जो सभी आयु वर्ग…

भक्त श्रीधर की कथा

|| भक्त श्रीधर की कथा || माता से जुड़ी एक पौराणिक कथा काफी प्रसिद्ध है जो माता के एक भक्त श्रीधर से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार वर्तमान कटरा क़स्बे से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित हंसाली गांव में मां वैष्णवी के परम भक्त श्रीधर रहते थे, जो कि नि:संतान थे। संतान ना होने का…

गजलक्ष्मी व्रत कथा एवं पूजन विधि

|| गजलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि || यह व्रत शाम के समय किया जाता है। इसलिए, शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर में माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा की तैयारी केसर मिश्रित चंदन से अष्टदल बनाएं और उस पर चावल रखें। एक जल से भरा कलश अवश्य…

महानंदा नवमी व्रत कथा व पूजा विधि

।। महानंदा नवमी व्रत पूजा विधि ।। ब्रह्म मुहूर्त में उठें (सूर्योदय से पहले का समय)। घर का कूड़ा-कचरा इकट्ठा करके सूप में डालें और उसे घर से बाहर कर दें। यह क्रिया अलक्ष्मी (दरिद्रता) का विसर्जन मानी जाती है। नित्यकर्मों (शौच आदि) से निवृत्त होकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल…

श्री विट्ठल व्रत कथा व पूजा विधि

|| विट्ठल पूजा विधि || विट्ठल, जिन्हें विठोबा के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य क्षेत्रों में पूजे जाने वाले एक प्रमुख देवता हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से आषाढ़ी एकादशी और कार्तिक एकादशी के दिन बहुत धूमधाम से की जाती है। पूजा की तैयारी ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना…

गाज माता व्रत कथा एवं पूजन विधि

|| गाज माता पूजन || गाज माता पूजन, जिसे गाज बीज पूजन भी कहते हैं, भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को किया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य कुल देवता की पूजा करना और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना होता है। कुल देवता का पूजन दोपहर के समय किया जाता है। इस दिन कच्ची रसोई…

श्री हनुमान पचासा

|| Hanuman Pachasa || जय हनुमान दास रघुपति के। कृपामहोदधि अथ शुभ गति के।। आंजनेय अतुलित बलशाली। महाकाय रविशिष्य सुचाली।। शुद्ध रहे आचरण निरंतर। रहे सर्वदा शुचि अभ्यंतर।। बंधु स्नेह का ह्रास न होवे। मर्यादा का नाश न होवे।। बैरी का संत्रास न होवे। व्यसनों का अभ्यास न होवे।। मारूतनंदन शंकर अंशी। बाल ब्रह्मचारी कपि…

शिव अष्टोत्तर नामावली

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|| श्री शिव अष्टोत्तर नामावली || No Sanskrit Name Name Mantra नाम का अर्थ 1 शिव ॐ शिवाय नमः। पवित्रता का स्रोत 2 महेश्वर ॐ महेश्वराय नमः। देवताओं के भगवान 3 शंभवे ॐ शंभवे नमः। समृधि के प्रदाता 4 पिनाकिने ॐ पिनाकिने नमः। धनुष धारी 5 शशिशेखर ॐ शशिशेखराय नमः। ऐसे भगवान् जो अपने बालों…

चातुर्मास व्रत कथा एवं पूजा विधि

|| चर्तुमास पूजा विधि || चर्तुमास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। सबसे पहले चर्तुमास के दिनों मे जल्दी उठें । उसके बाद नहाकर साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। चर्तुमास के दिनों में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। चर्तुमास में भगवान विष्णु के मंत्र जाप करने से…

संतान सप्तमी व्रत की कथा

|| संतान सप्तमी व्रत की कथा || संतान सप्तमी व्रत संतान सुख प्रदान करने वाला व्रत है। इस व्रत से संतान को आरोग्य और दीघायु की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने एक बार पांडु पुत्र युधिष्ठिर को भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के महत्व को बताते हुए कहा था कि इस…

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