बृहस्पति कवच पाठ

बृहस्पति कवच पाठ (Brihaspati Kavach Path) देवगुरु बृहस्पति को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी स्तोत्र है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभावों को बढ़ाना और उनके नकारात्मक असर को कम करना है। जो व्यक्ति नियमित रूप से, विशेषकर गुरुवार के दिन, इस कवच का पाठ करता है, उसे ज्ञान, बुद्धि,…

Monday Fast – सोमवार व्रत एवं पूजा के लिए शक्तिशाली शिव मंत्र – अर्थ और लाभ सहित

Lord Shiva Mantra

सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन मंत्र जाप का विशेष महत्व है। भक्तों को “महामृत्युंजय मंत्र” ( ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ ) जपने की सलाह दी जाती है। यह मंत्र आरोग्य, दीर्घायु और भय से मुक्ति प्रदान करता है। इसके अलावा, पंचक्षरी मंत्र “ॐ नमः…

Matsya Puran Part 1 (मत्स्य पुराण – भाग 1)

Matsya Puran Part 1 (मत्स्य पुराण - भाग 1)

मत्स्य पुराण हिंदू धर्म के 18 प्रमुख पुराणों में से एक है और इसका नाम ‘मत्स्य’ (मत्स्य = मछली) से लिया गया है। यह पुराण भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से संबंधित कथाओं और धार्मिक शिक्षा का स्रोत है। मत्स्य पुराण का पहला भाग प्राचीन भारतीय धर्म, संस्कृति, और ज्योतिष का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें…

Matsya Puran Part 2 (मत्स्य पुराण – भाग 2)

Matsya Puran Part 2 (मत्स्य पुराण - भाग 2)

मत्स्य पुराण का दूसरा भाग धार्मिक, ऐतिहासिक, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें पौराणिक कथाओं, धार्मिक अनुष्ठानों, और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस भाग में मुख्य रूप से धार्मिक शिक्षाओं, विभिन्न देवी-देवताओं की कहानियों, और यथार्थ के बारे में गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। मत्स्य पुराण की…

कालभैरवाष्टकम्

|| कालभैरवाष्टकम् (Kalbhairav Ashtakam Sanskrit PDF) || देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् । नारदादियोगिबृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ १ ॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ २ ॥ शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् । भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ ३ ॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थिरं समस्तलोकविग्रहम् । निक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥…

कालभैरव सहस्रनामावली

कालभैरव सहस्रनामावली भगवान कालभैरव के 1000 पवित्र और दिव्य नामों का संग्रह है। कालभैरव को समय के अधिपति, मृत्यु के रक्षक और शिव के अंशावतार के रूप में पूजा जाता है। उनकी शक्ति और भयानक रूप बुराई और नकारात्मकता को समाप्त करते हैं। कालभैरव सहस्रनामावली में उनके अद्वितीय नामों के माध्यम से उनकी महिमा, शक्ति…

श्री जगद्धात्री स्तोत्रम्

श्री जगद्धात्री स्तोत्रम् माँ जगद्धात्री को समर्पित एक दिव्य स्तुति है। ‘जगद्धात्री’ का अर्थ है संसार को धारण करने वाली। यह स्तोत्र देवी के आधार-स्वरूप और पालनकर्ता रूप का गुणगान करता है। इसमें माँ को शक्तिरूपेण और जगदानन्दे (जगत को आनंद देने वाली) कहकर नमन किया गया है। भक्त उन्हें दुःखमोचनी और सर्वापत्तारिका (सभी विपत्तियों…

श्री तुलसी कवच

श्री तुलसी कवच एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र है जो देवी तुलसी को समर्पित है। इसे पढ़ने से साधक को तुलसी माता का सुरक्षा चक्र प्राप्त होता है। यह कवच व्यक्ति को हर तरह के भय, रोग, और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। भारतीय घरों में तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप मानकर…

तुलसी मंत्र

तुलसी मंत्र, माँ तुलसी को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जिन्हें हिंदू धर्म में एक देवी और भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। तुलसी के पौधे को ‘वृंदा’ भी कहा जाता है और यह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति, सौभाग्य…

तुलसी सहस्रनामावली

तुलसी सहस्रनामावली में माता तुलसी के 1000 खास नाम लिखे गए हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। तुलसी माता विष्णु जी की बहुत बड़ी भक्त हैं और उनका पौधा ही देवी का रूप है। इस नामावली में तुलसी माता की पवित्रता, शक्ति और उनके गुणों के बारे…

छठ पूजा मंत्र

|| छठ पूजा मंत्र (Chhath Puja Mantra PDF) || छठ पूजा के मंत्रों का PDF दस्तावेज़ भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह पवित्र पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जिसमें व्रतधारी चार दिनों तक कठोर उपवास करते हैं। PDF में मुख्य रूप से सूर्य अर्घ्य मंत्र जैसे ‘ॐ ऐहि सूर्य…

श्रीकमलाम्बाष्टकम्

श्रीकमलाम्बाष्टकम् देवी श्री कमलाम्बा को समर्पित एक संस्कृत स्तोत्र है, जो माँ लक्ष्मी का ही एक रूप हैं। यह स्तोत्र विशेष रूप से संगीतकार मुत्तुस्वामी दीक्षितर द्वारा रचित ‘कमलाम्बा नववक्र कृति’ नामक प्रसिद्ध रचनाओं का एक भाग हो सकता है। “श्रीकमलाम्बाष्टकम् PDF” हिंदी में उपलब्ध एक दस्तावेज़ को संदर्भित करता है। इस PDF में आमतौर…

श्री कमला कवचम्

श्री कमला कवचम् (Shri Kamala Kavacham) एक शक्तिशाली हिंदू स्तोत्र है जो देवी कमला, दस महाविद्याओं में से एक और धन-समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी का आह्वान करता है। यह कवच (अभेद मंत्र) भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह के शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करने के लिए रचा गया है। ‘श्री कमला कवचम् PDF’…

सिद्धशारदास्तुतिः

“सिद्धशारदास्तुतिः” एक संस्कृत स्तोत्र है जो विद्या और ज्ञान की देवी माँ शारदा (सरस्वती) की स्तुति में रचा गया है। यह स्तुति साधकों द्वारा माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से पढ़ी जाती है ताकि वे ज्ञान, बुद्धि और कला के क्षेत्र में सिद्धि प्राप्त कर सकें। इसका नाम ‘सिद्धशारदा’ इंगित…

श्रीशारदादेवीस्तुतिः

श्रीशारदादेवीस्तुतिः PDF स्वामी रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी और आध्यात्मिक सहधर्मिणी, माँ शारदा देवी (श्री माँ) को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। यह संस्कृत पाठ उनकी अलौकिक दिव्यता, मातृ-प्रेम और त्यागपूर्ण जीवन की महिमा का वर्णन करता है। स्तुति में उन्हें साक्षात ‘परमा प्रकृति’ और देवी सरस्वती का अवतार बताया गया है। इस स्तुति का हिंदी…

श्री शारदा भुजङ्ग प्रयाताष्टकम्

श्री शारदा भुजङ्ग प्रयाताष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो विद्या और कला की देवी माँ शारदा (सरस्वती) की स्तुति में रचा गया है। ‘भुजंगप्रयात’ एक विशेष छंद का नाम है, जिसका अर्थ है ‘सर्प की चाल’। इस अष्टकम् में आठ श्लोक हैं जिनके माध्यम से भक्त देवी से बुद्धि, ज्ञान और अज्ञान के नाश की…

श्री कमलाष्टोत्तरशतनामावली

श्री कमलाष्टोत्तरशतनामावली PDF माँ कमला (दश महाविद्याओं में से एक) को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें उनके 108 नामों का वर्णन है। यह PDF भक्तों के लिए एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक संसाधन है, जो उन्हें इस स्तोत्र का पाठ करने और देवी कमला का पूजन करने में सहायता करता है। यह नामावली देवी लक्ष्मी का…

देवी कमला सहस्रनामावली

देवी कमला सहस्रनामावली देवी कमला के 1000 दिव्य नामों का संग्रह है, जो धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। देवी कमला, महालक्ष्मी का एक रूप हैं और उनकी पूजा से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। सहस्रनामावली में उनके विभिन्न नामों का उल्लेख उनकी महिमा,…

श्री राधाकुण्ड अष्टकम

श्री राधाकुण्ड अष्टकम – श्री राधाकुण्ड की महिमा का गुणगान करने वाली आठ श्लोकों की एक स्तुति है। यह अष्टकम ब्रजभूमि में स्थित परम पावन श्री राधाकुण्ड के दिव्य स्वरूप, उसके महत्त्व और वहाँ होने वाली श्री राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करता है। हिंदी PDF प्रारूप में यह स्तोत्र अर्थ (अर्थात अनुवाद) सहित आसानी…

अट्टालसुन्दराष्टकम्

|| अट्टालसुन्दराष्टकम् (Attala Sundara Ashtakam PDF) || विक्रमपाण्ड्य उवाच- कल्याणाचलकोदण्डकान्तदोर्दण्डमण्डितम् । कबलीकृतसंसारं कलयेऽट्टालसुन्दरम् ॥ १ ॥ कालकूटप्रभाजालकलङ्कीकृतकन्धरम् । कलाधरं कलामौलिं कलयेऽट्टालसुन्दरम् ॥ २ ॥ कालकालं कलातीतं कलावन्तं च निष्कलम् । कमलापतिसंस्तुत्यं कलयेऽट्टालसुन्दरम् ॥ ३ ॥ कान्तार्धं कमनीयाङ्गं करुणामृतसागरम् । कलिकल्मषदोषघ्नं कलयेऽट्टालसुन्दरम् ॥ ४ ॥ कदम्बकाननाधीशं काङ्क्षितार्थसुरद्रुमम् । कामशासनमीशानं कलयेऽट्टालसुन्दरम् ॥ ५ ॥ सृष्टानि मायया येन…

श्री अनन्तपद्मनाभ अष्टोत्तरशतनामावलिः

श्री अनन्तपद्मनाभ अष्टोत्तरशतनामावलि भगवान विष्णु के अनन्तपद्मनाभ स्वरूप की महिमा का गुणगान करने वाली 108 नामों की एक पवित्र नामावलि है। “अष्टोत्तरशत” का अर्थ 108 होता है, और “नामावलि” का अर्थ नामों की माला। यह नामावलि मुख्य रूप से तिरुवनंतपुरम (केरल) के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के आराध्य देव, भगवान अनन्तपद्मनाभ को समर्पित है। यह…

भोर भई दिन चढ़ गया – नवरात्रि माता के भजन

|| भोर भई दिन चढ़ गया – भजन || भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे, हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ । हे दरबारा वाली आरती जय माँ । ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ काहे दी मैया तेरी आरती बनावा, काहे दी पावां विच बाती, मंदिर विच आरती…

हिमालयराजकृत शैलपुत्रीस्तुतिः

शैलपुत्री माता नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं, जिनकी आराधना से साधक का जीवन पवित्र और ऊर्जावान बनता है। शैलपुत्री स्तुति में भक्त मां का स्मरण करते हुए उन्हें हिमालय की कन्या, समस्त शक्ति का आधार और सच्चे भक्ति मार्ग की प्रेरणा के रूप में वंदन करते हैं। माता के चरणों में पुष्प अर्पण कर, धूप-दीप…

ऋषिकृता कात्यायनीस्तुतिः

कात्यायनी स्तुति देवी दुर्गा के छठे स्वरूप की स्तुति है, जिसे श्रद्धा और भक्ति से गाया जाता है। इस स्तुति का पाठ करने से साधक को विवाह, संतान सुख और जीवन में हर प्रकार की सफलता की प्राप्ति होती है। कात्यायनी माता की स्तुति करने से मनोवांछित फल मिलता है और नारी जाति को विशेष…

श्री विश्वकर्मा स्तुति

|| श्री विश्वकर्मा स्तुतिः (Vishwakarma Stuti Mantra PDF) || पञ्चवक्त्रं जटाजूटं पञ्चादशविलोचनम् । सद्योजाताननं श्वेतं वामदेवं तु कृष्णकम् ॥ १ अघोरं रक्तवर्णं तत्पुरुषं पीतवर्णकम् । ईशानं श्यामवर्णं च शरीरं हेमवर्णकम् ॥ २ दशबाहुं महाकायं कर्णकुण्डलमण्डितम् । पीताम्बरं पुष्पमाला नागयज्ञोपवीतनम् ॥ ३ रुद्राक्षमालाभरणं व्याघ्रचर्मोत्तरीयकम् । अक्षमालां च पद्मं च नागशूलपिनाकिनम् ॥ ४ डमरुं वीणां बाणं च…

भैरवरूप शिव स्तुति

|| भैरवरूप शिव स्तुति (Bhairavroop Shiv Stuti PDF) || देव, भीषणाकार, भैरव, भयंकर, भूत-प्रेत-प्रमथाधिपति, विपति-हर्ता । मोह-मूषक-मार्जार, संसार-भय-हरण, तारण-तरण, अभय कर्ता ॥ अतुल बल, विपुलविस्तार, विग्रहगौर, अमल अति धवल धरणीधराभं । शिरसि संकुलित-कल-जूट पिंगलजटा, पटल शत-कोटि-विद्युच्छटाभं ॥ भ्राज विबुधापगा आप पावन परम, मौलि-मालेव शोभा विचित्रं । ललित लल्लाटपर राज रजनीशकल, कलाधर, नौमि हर धनद-मित्रं ॥…

धन्वन्तरि सहस्रनामावली

श्री धन्वन्तरि भगवान को आयुर्वेद के जनक और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है। उनका प्रकट होना समुद्र मंथन के समय अमृत कलश के साथ हुआ था। वे सभी रोगों के निवारणकर्ता और आरोग्य के संरक्षक माने जाते हैं। श्री धन्वन्तरि सहस्रनामावली में उनके एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है, जो उनकी शक्ति, करुणा…

श्री रमापत्यष्टकम्

|| श्री रमापत्यष्टकम् (Ramapati Ashtakam PDF) || जगदादिमनादिमजं पुरुषं शरदम्बरतुल्यतनुं वितनुम् । धृतकञ्जरथाङ्गगदं विगदं प्रणमामि रमाधिपतिं तमहम् ॥ १ ॥ कमलाननकञ्जरतं विरतं हृदि योगिजनैः कलितं ललितम् । कुजनैः सुजनैरलभं सुलभं प्रणमामि रमाधिपतिं तमहम् ॥ २ ॥ मुनिबृन्दहृदिस्थपदं सुपदं निखिलाध्वरभागभुजं सुभुजम् । हृतवासवमुख्यमदं विमदं प्रणमामि रमाधिपतिं तमहम् ॥ ३ ॥ हृतदानवदृप्तबलं सुबलं स्वजनास्तसमस्तमलं विमलम् । समपास्त…

श्री विष्ण्वष्टकम्

|| श्री विष्ण्वष्टकम् (Vishnu Ashtakam PDF) || विष्णुं विशालारुणपद्मनेत्रं विभान्तमीशाम्बुजयोनिपूजितम् । सनातनं सन्मतिशोधितं परं पुमांसमाद्यं सततं प्रपद्ये ॥ १ ॥ कल्याणदं कामफलप्रदायकं कारुण्यरूपं कलिकल्मषघ्नम् । कलानिधिं कामतनूजमाद्यं नमामि लक्ष्मीशमहं महान्तम् ॥ २ ॥ पीताम्बरं भृङ्गनिभं पितामह- -प्रमुख्यवन्द्यं जगदादिदेवम् । किरीटकेयूरमुखैः प्रशोभितं श्रीकेशवं सन्ततमानतोऽस्मि ॥ ३ ॥ भुजङ्गतल्पं भुवनैकनाथं पुनः पुनः स्वीकृतकायमाद्यम् । पुरन्दराद्यैरपि वन्दितं सदा…

श्री भुवनेश्वरी कवच

|| श्री भुवनेश्वरी कवचम् (Bhuvneshwari Kavacham PDF) || ॥ देव्युवाच ॥ देवेश भुवनेश्वर्या या या विद्याः प्रकाशिताः । श्रुताश्चाधिगताः सर्वाः श्रोतुमिच्छामि साम्प्रतम् ॥ त्रैलोक्यमङ्गलं नाम कवचं यत्पुरोदितम् । महादेव मम प्रीतिकरं परम् ॥ ॥ ईश्वर उवाच ॥ श्रृणु पार्वति वक्ष्यामि सावधानावधारय । त्रैलोक्यमङ्गलं नाम कवचं मन्त्रविग्रहम् ॥ सिद्धविद्यामयं देवि सर्वैश्वर्यसमन्वितम् । पठनाद्धारणान्मर्त्यस्त्रैलोक्यैश्वर्यभाग्भवेत् ॥ ॐ अस्य…

Vaman Puran (वामन पुराण)

Vaman Puran (वामन पुराण)

वामन पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक महत्वपूर्ण पुराण है। इस पुराण का नाम भगवान विष्णु के वामन अवतार के नाम पर रखा गया है। वामन पुराण में भगवान विष्णु के इस अवतार की महिमा, उनकी लीलाओं, धर्म, भक्ति, तीर्थ यात्रा, और पौराणिक कथाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। वामन पुराण की…

श्रीराधाष्टकम्

|| श्रीराधाष्टकम् (Radha Ashtakam PDF) || श्रीश्रीवृन्दावनेश्वर्यै नमः । दिशि दिशि रचयन्ती सञ्चरन्नेत्रलक्ष्मी विलसितखुरलीभिः खञ्जरीटस्य खेलाम् । हृदयमधुपमल्लीं वल्लवाधीशसूनो- रखिलगुणगभीरां राधिकामर्चयामि ॥ पितुरिह वृषभानोरन्ववायप्रशस्तिं जगति किल समस्ते सुष्ठु विस्तारयन्तीम् । व्रजपतिकुमारं खेलयन्तीं सखीभिः सुरभिणि निजकुण्डे राधिकामर्चयामि ॥ शरदुपचितराकाकौमुदीनाथकीर्ति प्रकरदमनदीक्षादक्षिणस्मेरवक्त्राम् । नटदघभिदपाङ्गोत्तुङ्गितानङ्गरङ्गां कलितरुचितरङ्गां राधिकामर्चयामि ॥ विविधकुसुमवृन्दोत्फुल्लधम्मिल्लघाटी विघटितमदघूर्णत्केकिपिच्छप्रशस्तिम् । मधुरिपुमुखबिम्बोद्गीर्णताम्बूलराग स्फुरदमलकपोलां राधिकामर्चयामि ॥ अमलिनललितान्तःस्नेहसिक्तान्तराङ्गां अखिलविधविशाखासख्यविख्यातशीलाम् । स्फुरदघभिदनर्घप्रेममाणिक्यपेटीं…

राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र

राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और भावपूर्ण प्रार्थना है जो भगवान श्रीकृष्ण की प्रियतमा, देवी राधा को समर्पित है। इस स्तोत्र की रचना, ‘राधा तंत्र’ नामक ग्रंथ में वर्णित है, और इसे स्वयं भगवान शिव ने नारद मुनि को सुनाया था। इसका पाठ करने से साधक को राधा रानी की विशेष कृपा प्राप्त…

श्री राधा अष्टोत्तरशतनामावली

श्री राधा अष्टोत्तरशतनामावली, देवी राधा के 108 नामों का संग्रह है, जिसका उल्लेख कई हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है। यह नामावली राधा रानी की स्तुति और महिमा का गान करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन नामों में राधा के विभिन्न गुणों, रूपों, और लीलाओं का वर्णन किया गया है। प्रत्येक नाम राधा…

श्री राधा कवचम्

|| श्री राधा कवचम् (Radha Kavacham PDF) || श्रीगणेशाय नमः । पार्वत्युवाच कैलासिअवासिन् भगवन् भक्तानुग्रहकारक । राधिकाकवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १॥ यद्यस्ति करुणा नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् । त्वमेव शरणं नाथ शूलपाणे पिनाकधृक् ॥ २॥ शिव उवाच शृणुष्व गिरिजे तुभ्यं कवचं पूर्वसूचितम् । सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वहत्याहरं परम् ॥ ३॥ हरिभक्तिप्रदं साक्षाद्भुक्तिमुक्तिप्रसाधनम् ।…

राधा सहस्रनाम

|| राधा सहस्रनाम (Radha Sahasranama Stotram PDF) || वन्दे वृन्दावनानन्दा राधिका परमेश्वरी । गोपिकां परमां श्रेष्ठां ह्लादिनीं शक्तिरूपिणीम् ॥ श्रीराधां परमाराज्यां कृष्णसेवापरायणाम् । श्रीकृष्णाङ्ग सदाध्यात्री नवधाभक्तिकारिणी ॥ येषां गुणमयी-राधा वृषभानुकुमारिका । दामोदरप्रिया-राधा मनोभीष्टप्रदायिनी ॥ तस्या नामसहस्रं त्वं श्रुणु भागवतोत्तमा ॥ मानसतन्त्रे अनुष्टुप्छन्दसे अकारादि क्षकारान्तानि श्रीराधिकासहस्रनामानि ॥ अथ स्तोत्रम् । ॐ अनन्तरूपिणी-राधा अपारगुणसागरा । अध्यक्षरा आदिरूपा…

देवी राधा सहस्रनामावली

देवी राधा सहस्रनामावली राधा रानी के 1000 दिव्य और मधुर नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावलि उनके प्रेम, भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक स्वरूप को समर्पित है। राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रेयसी और भक्ति के उच्चतम आदर्श का प्रतीक मानी जाती हैं। इस सहस्रनामावलि का पाठ करने से साधक राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेमलीला और…

श्रीललिता त्रिपुरसुन्दरी अपराधक्षमापणस्तोत्रम्

|| श्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी अपराध क्षमापण स्तोत्रम् (Tripurasundari Aparadha Kshamapana Stotram PDF) || श्रीगणेशाय नमः । ॐ कञ्जमनोहर पादचलन्मणि नूपुरहंस विराजिते कञ्जभवादि सुरौघपरिष्टुत लोकविसृत्वर वैभवे । मञ्जुळवाङ्मय निर्जितकीर कुलेचलराज सुकन्यके पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके ॥ १॥ एणधरोज्वल फालतलोल्लस दैणमदाङ्क समन्विते शोणपराग विचित्रित कन्दुक सुन्दरसुस्तन शोभिते । नीलपयोधर कालसुकुन्तल निर्जितभृङ्ग कदम्बके पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके ॥…

ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्र

|| ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्र (Lalita Aparadh Kshamapana Stotram PDF) || कञ्जमनोहरपादचलन्मणिनूपुरहंसविराजिते कञ्जभवादिसुरौघपरिष्टुतलोकविसृत्वरवैभवे। मञ्जुलवाङ्मयनिर्जितकीरकुलेचलराजसुकन्यके पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके। एणधरोज्वलफालतलोल्लसदैणमदाङ्कसमन्विते शोणपरागविचित्रितकन्दुकसुन्दरसुस्तनशोभिते। नीलपयोधरकालसुकुन्तलनिर्जितभृङ्गकदम्बके पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके। ईतिविनाशिनि भीतिनिवारिणि दानवहन्त्रि दयापरे शीतकराङ्कितरत्नविभूषितहेमकिरीटसमन्विते। दीप्ततरायुधभण्डमहासुरगर्वनिहन्त्रि पुराम्बिके पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके। लब्धवरेण जगत्रयमोहनदक्षलतान्तमहेषुणा लब्धमनोहरसालविषण्णसुदेहभुवा परिपूजिते। लङ्घितशासनदानवनाशनदक्षमहायुधराजिते पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके। ह्रीम्पदभूषितपञ्चदशाक्षरषोडशवर्णसुदेवते ह्रीमतिहादिहामनुमन्दिररत्नविनिर्मितदीपिके। हस्तिवराननदर्शितयुद्धसमादरसाहसतोषिते पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके। हस्तलसन्नवपुष्पसरेक्षुशरासनपाशमहाङ्कुशे हर्यजशम्भुमहेश्वरपादचतुष्टयमञ्चनिवासिनि। हंसपदार्थमहेश्वरि…

श्री ललिता पञ्चरत्नं स्तोत्र

|| श्री ललिता पञ्चरत्नं स्तोत्र (Lalitha Pancharatnam Stotram PDF) || प्रातः स्मरामि ललितावदनारविन्दं बिम्बाधरं पृथुलमौक्तिकशोभिनासम् । आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढ्यं मन्दस्मितं मृगमदोज्ज्वलफालदेशम् ॥ प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं रक्ताङ्गुलीयलसदङ्गुलिपल्लवाढ्याम् । माणिक्यहेमवलयाङ्गदशोभमानां पुण्ड्रेक्षुचापकुसुमेषुसृणीर्दधानाम् ॥ प्रातर्नमामि ललिताचरणारविन्दं भक्तेष्टदाननिरतं भवसिन्धुपोतम् । पद्मासनादिसुरनायकपूजनीयं पद्माङ्कुशध्वजसुदर्शनलाञ्छनाढ्यम् ॥ प्रातः स्तुवे परशिवां ललितां भवानीं त्रय्यन्तवेद्यविभवां करुणानवद्याम् । विश्वस्य सृष्टिविलयस्थितिहेतुभूतां विद्येश्वरीं निगमवाङ्मनसातिदूराम् ॥ प्रातर्वदामि ललिते तव पुण्यनाम कामेश्वरीति कमलेति…

श्री ललिता हृदय स्तोत्रम्

|| श्रीललिताहृदयस्तोत्रम् (Lalita Hridaya Stotram PDF) || श्रीललिताम्बिकायै नमः । देव्युवाच । देवदेव महादेव सच्चिदानन्दविग्रहा । सुन्दर्याहृदयं स्तोत्रं परं कौतूहलं विभो ॥ ईश्वरौवाच । साधु साधुत्वया प्राज्ञे लोकानुग्रहकारकम् । रहस्यमपिवक्ष्यामि सावधानमनाःश‍ृणु ॥ श्रीविद्यां जगतां धात्रीं सर्ग्गस्थितिलयेश्वरीम् । नमामिललितां नित्यां भक्तानामिष्टदायिनीम् ॥ बिन्दुत्रिकोणसम्युक्तं वसुकोणसमन्वितम् । दशकोणद्वयोपेतं चतुर्द्दश समन्वितम् ॥ दलाष्टकेसरोपेतं दलषोडशकान्वितम् । वृत्तत्रययान्वितम्भूमिसदनत्रयभूषितम् ॥ नमामि ललिताचक्रं…

श्री ललिता सहस्रनामावली

श्री ललिता सहस्रनामावली देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी की स्तुति में रचित 1000 पवित्र नामों का संग्रह है। यह ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण का एक अंश है और अद्वैत वेदांत में इसकी विशेष महिमा है। देवी ललिता को सर्वोच्च शक्ति और सृष्टि की माँ माना जाता है। वे सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी उपासना…

श्री ललिता पुष्पाञ्जलि स्तोत्रम्

|| श्रीललितापुष्पाञ्जलिस्तोत्रम् (Lalita Pushpanjali-Stotram PDF) || ॐ समस्तमुनियक्षकिम्पुरुषसिद्धविद्याधर- ग्रहासुरसुराप्सरोगणमुखैर्गणैः सेविते! । निवृत्तितिलकाम्बराप्रकृतिशान्तिविद्याकला- कलापमधुराकृते कलित एष पुष्पाञ्जलिः ॥ त्रिवेदकृतविग्रहे, त्रिविधकृत्यसन्धायिनि, त्रिरूपसमवायिनि त्रिपुरमार्गसञ्चारिणि! । त्रिलोचनकुटुम्बिनि त्रिगुणसंविदुद्युत्पदे त्रयि, त्रिपुरसुन्दरि, त्रिजगदीशि! पुष्पाञ्जलिः ॥ पुरन्दरजलाधिपान्तककुबेररक्षोहर- प्रभञ्जनधनञ्जयप्रभृतिवन्दनानन्दिते! । प्रवालपदपीठीकानिकटनित्यवर्तिस्वभू- विरिञ्चिविहितस्तुते! विहित एष पुष्पाञ्जलिः ॥ यदानतिबलादहङ्कृतिरुदेति विद्यावय- स्तपोद्रविणरूपसौरभकवित्वसंविन्मयि! । जरामरणजन्मजं भयमुपैति तस्यै समा- खिलसमीहितप्रसवभूमि! तुभ्यं नमः ॥ निरावरणसंविदुद्भ्रमपरास्तभेदोल्लसत्- परात्परचिदेकतावरशरीरिणि, स्वैरिणि! । रसायनतरङ्गिणीरुचितरङ्गसञ्चारिणि!,…

उच्छिष्टगणपति पंचांग (Uchchishtaganpati Panchang)

उच्छिष्टगणपति पंचांग (Uchchishtaganpati Panchang)

उच्छिष्ट गणपति पंचांग एक अनमोल पुस्तक है जिसे पंडित खेमा राज कृष्णदास जी ने लिखा है। यह पुस्तक विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक साधकों के लिए तैयार की गई है, जो उच्छिष्ट गणपति की साधना और उनसे जुड़ी तांत्रिक विधियों को समझने और अपनाने में रुचि रखते हैं। उच्छिष्ट गणपति कौन हैं? उच्छिष्ट गणपति…

श्री विनायक स्तुतिः

|| श्री विनायक स्तुतिः (Vinayaka Stuti PDF) || सनकादय ऊचुः । नमो विनायकायैव कश्यपप्रियसूनवे । अदितेर्जठरोत्पन्नब्रह्मचारिन्नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥ गणेशाय सदा मायाधार चैतद्विवर्जित । भक्त्यधीनाय वै तुभ्यं हेरम्बाय नमो नमः ॥ २ ॥ त्वं ब्रह्म शाश्वतं देव ब्रह्मणां पतिरोजसा । योगायोगादिभेदेन क्रीडसे नात्र संशयः ॥ ३ ॥ आदिमध्यान्तरूपस्त्वं प्रकृतिः पुरुषस्तथा । नादानादौ च सूक्ष्मस्त्वं…

श्री भानुविनायक स्तोत्रम्

|| श्री भानुविनायक स्तोत्रम् (bhanu Vinayaka Stotram PDF) || अरुण उवाच । नमस्ते गणनाथाय तेजसां पतये नमः । अनामयाय देवेश आत्मने ते नमो नमः ॥ १ ॥ ब्रह्मणां पतये तुभ्यं जीवानां पतये नमः । आखुवाहनगायैव सप्ताश्वाय नमो नमः ॥ २ ॥ स्वानन्दवासिने तुभ्यं सौरलोकनिवासिने । चतुर्भुजधरायैव सहस्रकिरणाय च ॥ ३ ॥ सिद्धिबुद्धिपते तुभ्यं सञ्ज्ञानाथाय ते…

श्री अष्टविनायकस्तोत्रम्

|| श्री अष्टविनायकस्तोत्रम् (Ashta Vinayaka Stotram PDF) || स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥ इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

श्री गदाधर स्तोत्रम् (वराह पुराणे)

|| श्री गदाधर स्तोत्रम् (वराह पुराणे) – Gadadhara Stotram PDF || रैभ्य उवाच । गदाधरं विबुधजनैरभिष्टुतं धृतक्षमं क्षुधित जनार्तिनाशनम् । शिवं विशालाऽसुरसैन्यमर्दनं नमाम्यहं हतसकलाऽशुभं स्मृतौ ॥ १ ॥ पुराणपूर्वं पुरुषं पुरुष्टुतं पुरातनं विमलमलं नृणां गतिम् ।a त्रिविक्रमं हृतधरणिं बलोर्जितं गदाधरं रहसि नमामि केशवम् ॥ २ ॥ विशुद्धभावं विभवैरुपावृतं श्रियावृतं विगतमलं विचक्षणम् । क्षितीश्वरैरपगतकिल्बिषैः स्तुतं गदाधरं प्रणमति…

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