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मकरविलक्कु 2026 – भगवान अयप्पा के दर्शन और 18 पवित्र सीढ़ियों का आध्यात्मिक महत्व।

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केरल के घने जंगलों और पंपा नदी के पावन तटों के बीच बसा शबरीमाला मंदिर केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। साल 2026 का मकरविलक्कु (Makaravilakku) उत्सव करीब है, और ‘स्वामी येयप्पा’ के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान होने लगा है।

यदि आप इस वर्ष भगवान अयप्पा के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो मकर संक्रांति पर होने वाले इस महापर्व और यहाँ की 18 पवित्र सीढ़ियों के महत्व को समझना आपके लिए एक आत्मिक अनुभव होगा।

मकरविलक्कु क्या है? (मकर ज्योति का रहस्य)

मकरविलक्कु, शबरीमाला में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। यह हर साल मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है।

  • तिरुवाभरणम यात्रा – उत्सव की शुरुआत भगवान अयप्पा के शाही आभूषणों (तिरुवाभरणम) की शोभायात्रा से होती है, जो पन्डलम महल से मंदिर तक लाई जाती है।
  • मकर ज्योति – सूर्यास्त के समय, जब भगवान को आभूषण पहनाकर महाआरती की जाती है, तब कान्तमला पहाड़ियों पर एक दिव्य ज्योति चमकती है। भक्तों का मानना है कि यह साक्षात भगवान का आशीर्वाद है।
  • आध्यात्मिक मिलन – यह समय जीवात्मा का परमात्मा से मिलन का प्रतीक माना जाता है, जहाँ भक्त 41 दिनों की कठिन तपस्या (मण्डला कालम) के बाद पहुँचते हैं।

18 पवित्र सीढ़ियाँ – ‘पथिनेटम पडी’ का आध्यात्मिक महत्व

शबरीमाला मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचने के लिए भक्तों को 18 स्वर्ण मंडित सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है, जिन्हें ‘पथिनेटम पडी’ कहा जाता है। इनका महत्व केवल वास्तुकला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के आध्यात्मिक विकास के चरणों को दर्शाता है:

  • ज्ञान की सीढ़ियाँ – ये सीढ़ियाँ मनुष्य के पांच ज्ञानेंद्रियों (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा), आठ रागों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य, दंभ, असूया), और तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) के त्याग का प्रतीक हैं।
  • कठिन अनुशासन – केवल वही भक्त इन सीढ़ियों पर कदम रख सकते हैं जिन्होंने 41 दिनों का कठिन व्रत रखा हो और अपने कंधे पर ‘इरुमुडी’ (दो पोटलियों वाला थैला) धारण किया हो।
  • अद्वैत का संदेश – 18वीं सीढ़ी पार करने का अर्थ है ‘अहम ब्रह्मास्मि’ (मैं ही ब्रह्म हूँ) का अनुभव करना, जहाँ भक्त और भगवान के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है।

नोट – प्राचीन काल में ये सीढ़ियाँ पत्थर की थीं, लेकिन अब इन पर पंचधातु (सोने के लेप के साथ) मढ़ी गई है।

मकरविलक्कु 2026 की तैयारी और यात्रा गाइड

यदि आप 2026 में यात्रा कर रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • वर्चुअल क्यू बुकिंग – शबरीमाला की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना ‘दर्शन स्लॉट’ पहले से बुक करना अनिवार्य है।
  • ड्रेस कोड – भक्तों को काले, नीले या भगवा रंग के वस्त्र धारण करने होते हैं।
  • पंपा स्नान – मुख्य मंदिर की चढ़ाई शुरू करने से पहले पंपा नदी में पवित्र स्नान की परंपरा है, जिसे पापों से मुक्ति का मार्ग माना जाता है।
  • कठिन मार्ग – पेरियार टाइगर रिजर्व के जंगलों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग शारीरिक और मानसिक शक्ति की परीक्षा लेता है।

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