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मार्गशीर्ष अमावस्या 2026 – पितृ तर्पण से धन-समृद्धि तक, जानिए संपूर्ण जानकारी और विशेष उपाय (Margashirsha Amavasya)

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वर्ष 2026 में मार्गशीर्ष अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह तिथि पितृ तर्पण, दान-पुण्य और पवित्र स्नान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मार्गशीर्ष मास को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया है, इसलिए इस दिन ‘गीता पाठ’ और विष्णु पूजन का विशेष फल मिलता है। 2026 में यह अमावस्या 8 दिसंबर को पड़ रही है।

भारतीय ज्योतिष और सनातन धर्म में अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है, खासकर जब यह मार्गशीर्ष (Margashirsha) मास में आती है। मार्गशीर्ष अमावस्या (Margashirsha Amavasya) को पितरों की शांति और मोक्ष के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान और उपाय न केवल पितरों को तृप्त करते हैं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में धन, समृद्धि, और सौभाग्य भी लाते हैं। आइए जानते हैं 2026 में मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, तिथि, और कुछ ऐसे विशेष उपाय जो आपके जीवन को सकारात्मकता से भर देंगे।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में, मार्गशीर्ष अमावस्या 8 दिसंबर को पड़ रही है।

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ – 8 दिसंबर 2026, 04:12 AM बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 9 दिसंबर 2026, 06:21 AM बजे

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व

यह अमावस्या ‘पौष अमावस्या’ के नाम से भी जानी जाती है, क्योंकि इस दिन से पौष मास की शुरुआत होती है। इस दिन का मुख्य महत्व है:

  • पितृ तर्पण – इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि पितृगण इस दिन धरती पर आकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
  • काल सर्प दोष निवारण – जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करने और विशेष अनुष्ठान करने से इस दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
  • लक्ष्मी प्राप्ति – इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

मार्गशीर्ष अमावस्या पर करें ये विशेष उपाय (Special Remedies on Margashirsha Amavasya)

मार्गशीर्ष अमावस्या पर कुछ सरल और प्रभावी उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं।

  • पितृ तर्पण और दान (Tarpan and Charity) – सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। पीपल के पेड़ के नीचे जाकर पितरों के नाम से जल, दूध, काला तिल और जौ मिलाकर तर्पण करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं या फिर किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • पीपल की पूजा (Worship of Peepal Tree)पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास माना जाता है। इस दिन सुबह पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और शाम को उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष, शनि दोष और अन्य ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • रुद्राभिषेक और शिव पूजा (Rudrabhishek and Shiva Pooja)भगवान शिव को पितरों का अधिष्ठाता देव (Presiding deity) माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। संभव हो तो रुद्राभिषेक कराएं, इससे पितरों को शांति मिलती है।
  • काल सर्प दोष निवारण उपाय – एक चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा लेकर किसी शिव मंदिर में चढ़ाएं। इसके बाद शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करें। ‘ॐ कालसर्प दोषाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • धन-समृद्धि के लिए उपाय (Remedies for Wealth) – अमावस्या की रात को घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा (Negative energy) घर में प्रवेश नहीं कर पाती। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए तुलसी के पौधे की पूजा करें और ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें।

सावधानी और महत्वपूर्ण बातें (Precautions)

  • मार्गशीर्ष अमावस्या पर तामसिक भोजन जैसे मांसाहार और शराब से बचें।
  • इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और गलत काम करने से बचें।
  • घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें।
  • जितना हो सके दान-पुण्य करें।

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