मासिक कार्तिगाई व्रत कथा PDF हिन्दी
Download PDF of Masik Karthigai Vrat Katha
Shri Karthikeya ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
मासिक कार्तिगाई व्रत कथा हिन्दी Lyrics
मासिक कार्तिकेय व्रत, जिसे कार्तिगाई दीपम के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तब भगवान शिव एक अनंत ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में प्रकट हुए। इस व्रत को करने से जीवन के सभी अंधकार और बाधाएं दूर होती हैं। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और शाम को मिट्टी के दीपक जलाकर घर को रोशन करते हैं।
यह व्रत आध्यात्मिक शुद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आप इस पावन व्रत की संपूर्ण विधि और पौराणिक कहानी विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो Masik karthigai Vrat Katha PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें और भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करें। हर महीने पड़ने वाली मासिक कार्तिगाई व्रत कथा का पाठ और श्रवण भक्तों को विशेष पुण्य प्रदान करता है। यह व्रत भगवान शिव और முருக/कार्तिकेय को समर्पित है, जो शांति, समृद्धि और विजय के प्रतीक हैं।
इस व्रत को करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान का स्मरण करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। मासिक कार्तिगाई व्रत कथा PDF के माध्यम से आप इस पवित्र कथा को आसानी से पढ़कर इसके महत्व को समझ सकते हैं और व्रत के नियमों का पालन कर सकते हैं। यह PDF आपको व्रत से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करती है, जिससे आप विधि-विधान से पूजा कर सकें।
|| कार्तिगाई व्रत कथा (Masik karthigai Vrat Katha PDF) ||
कार्तिगाई दीपम का त्योहार दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान शिव की पूजा को समर्पित है और दीपों के प्रज्वलन द्वारा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
कार्तिगाई दीपम की कथा भगवान मुरुगन (जिन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है) के जन्म से जुड़ी है, जो भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं। कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के बीच एक भीषण युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवता हार रहे थे और उन्होंने भगवान शिव से मदद की गुहार लगाई।
भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से एक प्रचंड अग्नि उत्पन्न की, जो इतनी तीव्र थी कि सभी देवता और असुर भी उससे भयभीत हो गए। इस अग्नि से एक अद्भुत प्रकाश उत्पन्न हुआ, जिसने भगवान मुरुगन का रूप धारण किया। भगवान मुरुगन ने असुरों को पराजित किया और देवताओं को विजय दिलाई।
कार्तिगाई दीपम के दिन, तिरुवन्नामलई के अन्नामलाई पहाड़ पर एक विशाल दीप जलाया जाता है, जो भगवान शिव की ज्योति का प्रतीक है। इस पर्व पर भक्त अपने घरों और मंदिरों में दीप जलाते हैं और भगवान शिव और भगवान मुरुगन की पूजा करते हैं। यह पर्व यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की सदा विजय होती है और अंधकार पर प्रकाश की जीत होती है।
कार्तिकेय, जिन्हें कार्तिगाई के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में युद्ध के देवता हैं। उन्हें भगवान शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में जाना जाता है। कार्तिकेय को स्कंद या मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें युद्ध में बुद्धि और कौशल का देवता माना जाता है।
कार्तिकेय से जुड़े कई लोकप्रिय कहानियां हैं। एक कहानी में, कार्तिकेय का तारकासुर नामक राक्षस से युद्ध होता है। तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसे किसी ऐसे व्यक्ति के हाथों से ही मृत्यु होगी जो अभी पैदा नहीं हुआ था और न ही माता का दूध पिया था। कार्तिकेय ने तारकासुर को युद्ध में हरा दिया और देवताओं को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।
|| कार्तिगाई पूजा विधि ||
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नानादि से निवृत्त हों।
- सूर्य देव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
- पूजा घर की सफाई करें और पूजा की तैयारी करें।
- चौकी पर कपड़ा बिछाकर महादेव, मां पार्वती और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें।
- फिर पंचोपचार से पूजा करें।
- भगवान शिव का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से करें।
Join HinduNidhi WhatsApp Channel
Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!
Join Nowमासिक कार्तिगाई व्रत कथा

READ
मासिक कार्तिगाई व्रत कथा
on HinduNidhi Android App
DOWNLOAD ONCE, READ ANYTIME
Your PDF download will start in 15 seconds
CLOSE THIS
