क्या आपने कभी सोचा है कि एक संत, जो दुनिया भर में हनुमान जी के अवतार माने जाते हैं, वे हमेशा एक मोटा कंबल (Blanket) क्यों ओढ़े रहते थे? चाहे जेठ की तपती गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्यार से ‘महाराज जी’ कहते हैं, हमेशा उस चेक वाले कंबल में लिपटे नजर आते थे।
आम लोगों के लिए यह सिर्फ एक ऊनी कपड़ा (Woolen cloth) हो सकता है, लेकिन बाबा के भक्तों के लिए यह कंबल ‘बुलेटप्रूफ ढाल’ (Shield) और साक्षात् चमत्कार है। आइए जानते हैं उस कंबल के पीछे की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ और गहरे आध्यात्मिक रहस्य।
वह “बुलेटप्रूफ” कंबल जिसने गोलियां रोक लीं
बाबा के कंबल से जुड़ी सबसे मशहूर कहानी द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय की है। यह किस्सा आज भी कैंची धाम आने वाले भक्तों की जुबान पर रहता है।
एक बुजुर्ग दम्पति बाबा के बहुत बड़े भक्त थे। उनका इकलौता बेटा ब्रिटिश फौज में सैनिक था और बर्मा बॉर्डर पर तैनात था। एक रात, बाबा अचानक उस दम्पति के घर पहुंचे और कहा कि वे आज रात वहीं रुकेंगे। रात को बाबा ने एक चारपाई पर अपना कंबल ओढ़ा और सो गए, लेकिन पूरी रात वे कराहते रहे (Groaning in pain), जैसे उन्हें बहुत तकलीफ हो रही हो।
सुबह होते ही बाबा ने वह कंबल समेटा और उस परिवार को दिया। उन्होंने सख्त हिदायत दी, “इसे खोलकर मत देखना, बस सीधे जाकर नदी में प्रवाहित (Flow in river) कर दो।”
दम्पति ने बाबा की आज्ञा मानी, लेकिन मन में सवाल थे। कुछ हफ़्तों बाद जब उनका बेटा जंग से लौटा, तो उसने जो बताया उसे सुनकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने बताया, “एक रात हम दुश्मनों से घिर गए थे। चारों तरफ से गोलियों की बारिश (Rain of bullets) हो रही थी। मेरे सारे साथी मारे गए, लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे चारों तरफ एक लोहे की दीवार खड़ी कर दी हो। मैं अकेला ज़िंदा बचा।”
जब तारीख और समय मिलाया गया, तो वह वही रात थी जब बाबा उस दम्पति के घर रुके थे और कराह रहे थे। भक्तों का मानना है कि बाबा ने उस रात अपने कंबल के जरिए उन गोलियों को अपने ऊपर ले लिया था और अपने भक्त की रक्षा की थी।
क्या कंबल में ब्रह्मांड छिपता था?
बाबा के विदेशी भक्त, ‘राम दास’ (पूर्व में रिचर्ड एलपर्ट), जो हार्वर्ड के प्रोफेसर थे, उन्होंने अपनी किताब में एक और दिलचस्प घटना (Incident) का जिक्र किया है।
जब राम दास पहली बार भारत आए थे, तो वे पश्चिमी विज्ञान (Western Science) के घमंड में थे। वे एक साइकेडेलिक ड्रग (LSD) लेकर आए थे, जो इंसान के दिमाग को बहुत ज्यादा उत्तेजित कर देता है। उन्हें लगा कि यह ‘दवाई’ बाबा पर क्या असर करेगी?
बाबा ने उनसे वह गोलियां मांगी और एक साथ कई हाई डोज़ खा लीं। राम दास डर गए कि अब बाबा को कुछ हो जाएगा। लेकिन बाबा ने बस अपना कंबल ओढ़ा और शांत बैठे रहे। थोड़ी देर बाद उन्होंने कंबल हटाया और मुस्कुराए। उन पर उस खतरनाक ड्रग का रत्ती भर भी असर नहीं हुआ था।
यह घटना बताती है कि बाबा का वह कंबल सिर्फ सर्दी-गर्मी से बचने के लिए नहीं था, बल्कि वह उस अवस्था (State of consciousness) को ढकने का काम करता था जहाँ भौतिक दुनिया के नियम (Laws of physics) काम नहीं करते।
दूसरों के कर्मों का बोझ (Absorbing Bad Karma)
भारतीय अध्यात्म (Indian Spirituality) में माना जाता है कि एक सच्चा गुरु अपने शिष्यों के दुखों और रोगों को अपने ऊपर ले लेता है।
पुराने भक्त बताते हैं कि कई बार बाबा का कंबल अचानक बहुत भारी (Heavy) हो जाता था या उससे बहुत तेज गर्मी निकलती थी। दादा मुखर्जी (बाबा के अनन्य भक्त) ने एक बार कहा था कि बाबा जब भी किसी दुखी व्यक्ति को देखते, तो वे उसे अपने कंबल के नीचे बुला लेते या अपना कंबल उसे ओढ़ा देते। ऐसा करते ही उस व्यक्ति का दुख गायब हो जाता, लेकिन बाबा का शरीर तप रहा होता था।
यह कंबल एक फ़िल्टर की तरह काम करता था, जो भक्तों की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को सोख लेता था ताकि भक्त चैन की सांस ले सकें।
वैराग्य का प्रतीक (Symbol of Detachment)
आज के जमाने में जहाँ साधु-संत रेशमी वस्त्रों और सोने-चांदी में लिपटे दिखते हैं, वहां नीम करोली बाबा का वह साधारण, कई जगहों से उधड़ा हुआ कंबल ‘वैराग्य’ का सबसे बड़ा सन्देश (Message) है।
यह हमें सिखाता है कि:
- सादगी (Simplicity) – ईश्वर को पाने के लिए महंगे कपड़ों की नहीं, साफ़ मन की जरूरत है।
- सुरक्षा (Protection) – जब आप ईश्वर की शरण में होते हैं, तो एक साधारण कंबल भी वज्र (Indestructible weapon) बन जाता है।
आज भी जारी है आस्था (Faith Continues Today)
अगर आप नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम (Kainchi Dham) जाएंगे, तो देखेंगे कि वहां आज भी भक्त बाबा को कंबल चढ़ाते हैं। मान्यता है कि अगर कोई बीमार है या बहुत बड़ी मुसीबत में है, और वह सच्चे मन से बाबा को कंबल अर्पित करता है, तो बाबा आज भी उसी तरह रक्षा करते हैं जैसे उन्होंने उस सैनिक की थी।
बहुत से लोग उस चढ़ाए हुए कंबल को ‘प्रसाद’ (Blessing) के रूप में घर लाते हैं और उसे बहुत संभाल कर रखते हैं। कहते हैं, उस कंबल में बाबा की ‘वाइब्स’ (Vibes) आज भी महसूस होती हैं।
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