यह सच है कि हम अक्सर त्योहारों की ऊपरी चमक-दमक में उनके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अर्थों को भूल जाते हैं। नृसिंह द्वादशी (जिसे कई क्षेत्रों में नृसिंह जयंती के रूप में भी मनाया जाता है) सिर्फ एक पौराणिक कथा मात्र नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना और बुराई के अंत का एक अत्यंत शक्तिशाली प्रतीक है। यहाँ इस विशेष दिन का वह सच है जो आमतौर पर धार्मिक विज्ञापनों या पंचांगों में नहीं मिलता।
हिंदू धर्म में ‘द्वादशी’ तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन जब यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है, तो यह भगवान विष्णु के सबसे उग्र और रक्षक अवतार ‘नृसिंह’ को समर्पित होती है। लेकिन क्या यह केवल एक हिरण्यकश्यप के वध की कहानी है? बिल्कुल नहीं।
‘नृसिंह’ अवतार का विज्ञान – संतुलन की शक्ति
नृसिंह अवतार न तो पूर्ण मानव थे और न ही पूर्ण सिंह। यह अवतार इस बात का प्रतीक है कि सत्य किसी सांचे में फिट नहीं होता।
- आधा शरीर मनुष्य (बुद्धि) – विवेक और कर्म का प्रतीक।
- आधा शरीर सिंह (शक्ति) – साहस और निडरता का प्रतीक।
यह मेल हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए ‘शक्ति’ और ‘बुद्धि’ का सटीक संतुलन (Balance) आवश्यक है।
वरदान की काट – “आउट ऑफ द बॉक्स” सोच
हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे न कोई मानव मार सके न पशु, न दिन में न रात में, न अस्त्र से न शस्त्र से।
नृसिंह अवतार भगवान की ‘क्रिएटिव प्रॉब्लम सॉल्विंग’ का चरम उदाहरण है। उन्होंने वरदान का सम्मान भी रखा और अधर्म का अंत भी किया। यह हमें सिखाता है कि जब परिस्थितियाँ चारों तरफ से बंद लगें, तब समाधान हमेशा ‘बीच के रास्ते’ (जैसे चौखट पर वध) में छिपा होता है।
आपके भीतर का ‘हिरण्यकश्यप’ और ‘नृसिंह’
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, हिरण्यकश्यप हमारे भीतर का अहंकार है, जो मानता है कि “मुझसे ऊपर कोई नहीं।” प्रहलाद हमारी अटूट आस्था है। जब अहंकार (हिरण्यकश्यप) आस्था (प्रहलाद) को प्रताड़ित करने लगता है, तब हमारे भीतर से ‘क्रोध और न्याय’ की ऊर्जा (नृसिंह) प्रकट होती है।
नृसिंह द्वादशी पर विशेष – ये 3 बातें आपको जाननी चाहिए
- विजय मुहूर्त – इस दिन किया गया संकल्प अटूट होता है क्योंकि यह न्याय की विजय का दिन है।
- प्रदोष काल – भगवान नृसिंह सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे, इसलिए शाम की पूजा का विशेष फल है।
- अभय दान – यह दिन डर (फोबिया) से मुक्ति पाने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
इस दिन क्या करें कि बदल जाए आपका भाग्य?
- क्रोध पर नियंत्रण – चूंकि भगवान नृसिंह अत्यंत उग्र थे, इस दिन अपने गुस्से को शांत रखने का संकल्प लेना उनकी सबसे बड़ी पूजा है।
- निर्धनों की सहायता – प्रहलाद की तरह निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करें।
- नृसिंह मंत्र का मानसिक जाप – “ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्॥”
नोट – नृसिंह द्वादशी केवल व्रत रखने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के ‘डर’ को खत्म करके ‘न्याय’ के साथ खड़े होने का संकल्प लेने का दिन है।
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