ज्ञानप्रसूनाम्बास्तोत्रम्

|| ज्ञानप्रसूनाम्बास्तोत्रम् || माणिक्याञ्चितभूषणां मणिवरां माहेन्द्रनीलोज्ज्वलां मन्दारद्रुममाल्यभूषितकचां मत्तेभकुम्भस्तनीम् । मौलिस्तोमनुतां मराळगमनां माध्वीरसानन्दिनीं ध्याये चेतसि काळहस्तिनिलयां ज्ञानप्रसूनाम्बिकाम् ॥ १॥ श्यामां राजनिभाननां रतिहितां राजीवपत्रेक्षणां राजत्काञ्चनरत्नभूषणयुतां राज्यप्रदानेश्वरीम् । रक्षोगर्वनिवारणां त्रिजगतां रक्षैकचिन्तामणिं ध्याये चेतसि काळहस्तिनिलयां ज्ञानप्रसूनाम्बिकाम् ॥ २॥ कल्याणीं करिकुम्भभासुरकुचां कामेश्वरीं कामिनीं कल्याणाचलवासिनीं कलरवां कन्दर्पविद्याकलाम् । कञ्जाक्षीं कलबिन्दुकल्पलतिकां कामारिचित्तप्रियां ध्याये चेतसि काळहस्तिनिलयां ज्ञानप्रसूनाम्बिकाम् ॥ ३॥ भावातीतमनःप्रभावभरितां ब्रह्माण्डभाण्डोदरीं बालां बालकुरङ्गनेत्रयुगलां…

अम्बास्तोत्रं स्वामी विवेकानन्दरचितम्

|| अम्बास्तोत्रं स्वामी विवेकानन्दरचितम् || का त्वं शुभकरे सुखदुःखहस्ते आघूर्णितं भवजलं प्रबलोर्मिभङ्गैः । शांतिं विधातुमिह किं बहुधा विभग्नाम् मतः प्रयत्नपरमासि सदैव विश्वे ॥ १॥ सम्पादयत्यविरतं त्वविरामवृता या वै स्थिता कृतफलं त्वकृतस्य नेत्री । सा मे भवत्वनिदिनं वरदा भवानी जानाम्यहं ध्रुवमिदं धृतकर्मपाशा ॥ २॥ को वा धर्मः किमकृतं क्वः कपाललेखः किंवादृष्टं फलमिहास्ति हि यां विना भोः…

श्रीअन्नपूर्णासहस्रनामस्तोत्रम्

|| श्रीअन्नपूर्णासहस्रनामस्तोत्रम् || श्रीरुद्रयामले कैलासशिखरासीनं देवदेवं महेश्वरम् । प्रणम्य दण्डवद्भूमौ पार्वती परिपृच्छति ॥ १॥ श्रीपार्वत्युवाच । अन्नपूर्णा महादेवी त्रैलोक्ये जीवधारिणी । नाम्नां सहस्रं तस्यास्तु कथयस्व महाप्रभो ॥ २॥ श्रीशिव उवाच । श‍ृणु देवि वरारोहे जगत्कारणि कौलिनि । आराधनीया सर्वेषां सर्वेषां परिपृच्छसि ॥ ३॥ सहस्रैर्नामभिर्दिव्यैस्त्रैलोक्यप्राणिपूजितैः । अन्नदायास्स्तवं दिव्यं यत्सुरैरपि वाञ्छितम् ॥ ४॥ कथयामि तव स्नेहात्सावधानाऽवधारय ।…

शनि अमावस्या का रहस्य – कैसे पाएं शनि की विशेष कृपा?

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भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शनि देव का एक विशेष स्थान है। न्याय और कर्मफल के दाता माने जाने वाले शनि देव की कृपा प्राप्त करना हर व्यक्ति की इच्छा होती है। ऐसे में, शनि अमावस्या का संयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ अवसर लेकर आता है। यह वह दिन है जब अमावस्या तिथि…

श्री नवदुर्गास्वरूपानुसन्धानस्तुतिः

|| श्री नवदुर्गास्वरूपानुसन्धानस्तुतिः || वक्ष्येऽहं नव दुर्गायाः स्वरूपाण्यधुना क्रमात् । प्रथमा वन दुर्गा स्यात् शूलिन्याख्या द्वितीयिका ॥ १॥ तृतीया जातवेदास्तु शान्तिदुर्गा चतुर्थिका । पञ्चमी शबरी दुर्गा ज्वलद् दुर्गा च षष्ठिका ॥ २॥ सप्तमी लवणाभिख्या दीपदुर्गा तथाऽष्टमी । नवमी ह्यासुरी दुर्गा प्रोक्ता एता नवाम्बिकाः ॥ ३॥ पुरा भण्डमहायुद्धे ललिताम्बाऽट्टहासतः । आविर्भूता इमा देव्यः मध्वाद्यसुरभीकराः ॥ ४॥…

नवदुर्गा स्तुतिः

|| नवदुर्गा स्तुतिः || १. शैलपुत्री (मूलाधारचक्र) ध्यानं – वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥ पूर्णेन्दुनिभाङ्गौरीं मूलाधारस्थितां प्रथमदुर्गां त्रिनेत्राम् । पटाम्बरपरिधानां रत्नकिरीटां नानालङ्कारभूषिताम् ॥ प्रफुल्लवदनां पल्लवाधरां कान्तकपोलां तुङ्गकुचाम् । कमनीयां लावण्यस्नेहमुखीं क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ॥ स्तोत्रम् – प्रथमदुर्गा त्वं हि भवसागरतारिणी । धन ऐश्वर्यदायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम् ॥ त्रिलोकजननी त्वं हि परमानन्दप्रदायिनी । सौभाग्यारोग्यदायनी…

Shri Rani Sati Dadi Chalisa

|| Shri Rani Sati Dadi Chalisa || ॥ Doha ॥ Sri Guru Pad Pankaj Naman, Dushit Bhav Sudhar, Ranisati Suvimal yash, Barnau Mati Anusar, Kaam Krodh mad lobh me, Bharam rahyo sansar, Sharan gahi karunamayi, Sukh sampatti sanchar॥ ॥ Chaupai ॥ Namo Namo Sri Sati Bhavani, Jag vikhyat sabhi man manni। Namo Namo Sanktakun harni,…

श्री राणी सती दादी जी आरती

|| श्री राणी सती दादी जी आरती || ॐ जय श्री राणी सती माता, मैया जय राणी सती माता । अपने भक्त जनन की, दूर करन विपत्ती ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता, मैया जय राणी सती माता ॥ अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत, मंडितचहुँक कुंभा । दुर्जन दलन खडग की, विद्युतसम प्रतिभा ॥ ॐ…

Shri Rani Sati Dadi Ji Aarti

|| Shri Rani Sati Dadi Ji Aarti || Om Jai Sri Ranisatiji Mata, Maiya Jai Rani Sati Mata । Apne Bhakt Janan Ki, Door Karan Vipada ॥ Avani Anantar Jyoti Akhandit, Mandit Chahunk Kumbha । Durjan Dalan Khadg ki, Vidhut Sam Pratibha ॥ Om Jai Sri Ranisatiji Mata, Maiya Jai Rani Sati Mata ॥ Markat…

Shri Badrinath Aarti

|| Shri Badrinath Aarti PDF || Pawan Mand Sugandh Sheetal, Hem Mandir Shobhitam । Nikat Ganga Bahat Nirmal, Shri Badrinath Vishwmbharam ॥ Shesh Sumiran Karat Nishadin, Dharat Dhyan Maheshwaram । Ved Brahma Karat Stuti, Shri Badrinath Vishwambharam ॥ ॥ Pawan Mand Sugandh Sheetal…॥ Shakti Gauri Ganesh Sharad, Narad Muni Uchcharanam । Jog Dhyan Apar Leela,…

Shri Indra Baisa Ki Aarti

|| Shri Indra Baisa Ki Aarti || Om Jai Jai Indraani, Maa Jai Jai Indraani. Marudhar Mein Maa Pragatiya, Jag Saare Jaani. Om Jai Jai Indraani…. Sagar Suta Sulochani, Mochini Dukh Mata. Dhapu Kokh Janamiya, Dhani-Dhani Dhanadatta. Om Jai Jai Indraani…. Maha Shakti Jag Mano, Purush Prakriti Roopa. Saval Vadan Sukomal, Sevat Bhav Bhoopa. Om…

Shri Indra Baisa Chalisa

|| Shri Indra Baisa Chalisa PDF || || Doha || Namo Namo Gaj Badan Ne, Riddh-Siddh Ke Bhandar. Namo Saraswati Sharada, Maa Karni Avtar. Indra Baisa Aparo, Khudar Dhaam Badh Khambh. Sankat Meto Sevaga, Sharan Padaya Bhuj Lamb. || Choupaii || Avadji Aru Raja Baisa, Aur Deshane Karni Mai. Chautho Avtar Khudar Mein Lino, Charan…

श्री उमा देवी आरती

|| श्री उमा देवी आरती PDF || देवी दुर्गा उमा, विश्व जननी रमा, मात तारा, एक जगदम्बा तेरा सहारा, देवि दुर्गा उमा, विश्व जननी रमा, मात तारां, एक जगदम्बा तेरा सहारा, तू ही वैष्णवी मोह माया, तूने सारे जग को बनाया, चरण कमलों में माँ, रहता मस्तक नवाँ, यह हमारा, एक जगदम्बा तेरा सहारा, देवी…

Shri Tara Devi Aarti

|| Shri Tara Devi Aarti || Jai Tara tum jag vikhyaat, Brahmani roop sundar bhaat. Chandrama kohni bhraajat, Hans roop ban Maa tum aai. Kanakvaale keshon mein, Dhoop-deep phir saje. Kambal neela, vastra sundar, Charano mein angoor saje. Chandan basam bilochan par, Bel patraani mala dharu. Bhakton ke kaaj raakho, Shankar mandir vishesh aayun. Jai…

श्रीदुर्गा पञ्जरस्तोत्रम्

|| श्रीदुर्गा पञ्जरस्तोत्रम् || विनियोगः ॐ अस्य श्रीदुर्गा पञ्जरस्तोत्रस्य सूर्य ऋषिः, त्रिष्टुप्छन्दः, छाया देवता, श्रीदुर्गा पञ्जरस्तोत्र पाठे विनियोगः । ध्यानम् । ॐ हेम प्रख्यामिन्दु खण्डात्तमौलिं शङ्खाभीष्टा भीति हस्तां त्रिनेत्राम् । हेमाब्जस्थां पीन वस्त्रां प्रसन्नां देवीं दुर्गां दिव्यरूपां नमामि । अपराध शतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् । यां गतिं समवाप्नोति नतां ब्रह्मादयः सुराः । सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां…

श्री तारा देवी आरती

|| श्री तारा देवी आरती PDF || जय तारा तुम जग विख्यात, ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात। चंद्रमा कोहनी भ्राजत, हंस रूप बन माँ तुम आई। कनकवाले केशों में, धूप-दीप फिर सजे। कंबल नीला, वस्त्र सुंदर, चरणों में अंगूर सजे। चन्दन बासम बिलोचन पर, बेल पत्रानि मला धरू। भक्तों के काज राखो, शंकर मन्दिर विशेष आयूं।…

श्रीदीपदुर्गा कवचम्

|| श्रीदीपदुर्गा कवचम् || श्रीभैरव उवाच । श‍ृणु देवि जगन्मातर्ज्वालादुर्गां ब्रवीम्यहम् । कवचं मन्त्रगर्भं च त्रैलोक्यविजयाभिधम् ॥ १॥ अप्रकाश्यं परं गुह्यं न कस्य कथितं मया । विनामुना न सिद्धिः स्यात्कवचेन महेश्वरि ॥ २॥ अवक्तव्यमदातव्यं दुष्टाया साधकाय च । निन्दकायान्यशिष्याय न वक्तव्यं कदाचन ॥ ३॥ श्री देव्युवाच । त्रैलोक्यनाथ वद मे बहुधा कथितं मया । स्वयं…

श्रीदाक्षायणीस्तोत्रम्

|| श्रीदाक्षायणीस्तोत्रम् || गम्भीरावर्तनाभिर्मृगमदतिलका वामबिम्बाधरोष्ठी श्रीकान्ता काञ्चिदाम्ना परिवृतजघना कोकिलालापवाणी । कौमारी कम्बुकण्ठी प्रहसितवदना धूर्जटिप्राणकान्ता रम्भोरूः सिंहमध्या हिमगिरितनया शाम्भवी नः पुनातु ॥ १॥ दद्यात् कल्मषहारिणी शिवतनुः पाशाङ्कुशालङ्कृता शर्वाणी शशिसूर्यवह्निनयना कुन्दाग्रदन्तोज्ज्वला । कारुण्यामृतपूर्णवाग्विलसिता मत्तेभकुम्भस्तनी लोलाक्षी भवबन्धमोक्षणकरी निश्रेयसं सन्ततम् ॥ २॥ मध्येसुधाब्धि मणिमण्टपरत्नवेद्यां सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णाम् । पीताम्बराभरणमाल्यविचित्रगात्रीं देवीं भजामि दृढबुद्धतलेडजिह्वां (?) ॥ ३॥ सन्नद्धां विविधायुधैः परिवृतामालीकुमारीगणैः ध्यायेदीप्सितदायिनीं त्रिनयनां…

तीव्रचण्डिकास्तोत्रम्

|| तीव्रचण्डिकास्तोत्रम् || अथवा श्रीमार्कण्डेयपुराणोक्त चण्डिकास्तोत्रम् । ॥ ध्यानम् ॥ चामुण्डा प्रेतगा विकृता चाऽहि भूषणा दंष्ट्रालि क्षीणदेहा च गर्ताक्षी कामरूपिणी । दिग्बाहुः क्षामकुक्षि मुशलं चक्रचामरे अङ्कुशं विभ्रती खड्गं दक्श्ःइणे चाथ वामके ॥ खेटं पाशं धनुर्दण्डं कुठारं चापि बिभ्रती या देवी खड्गहस्ता सकलजनपदव्यापिनी विश्वदुर्गा श्यामाङ्गी शुक्लपाशा द्विजगणगणिता ब्रह्मदेहार्थवासा । var शुक्लनासा द्विजगणनमिता ज्ञानानां साधयन्ती यतिगिरिगमनज्ञान दिव्य…

जयदुर्गास्तोत्रम्

|| जयदुर्गास्तोत्रम् || विनियोगः ॐ अस्य श्रीजयदुर्गा महामन्त्रस्य, मार्कण्डयो मुनिः, बृहती छन्दः, श्रीजयदुर्गा देवता, प्रणवो बीजं, स्वाहा शक्तिः । श्रीदुर्गा प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । हृदयादिन्यासः ॐ दुर्गे हृदयाय नमः । ॐ दुर्गे शिरसि स्वाहा । ॐ दुर्गायै शिखायै वषट् । ॐ भूतरक्षिणी कवचाय हुं । ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षिणि नेत्रत्रयाय वौषट । ॐ दुर्गे दुर्गे…

Varuthini Ekadashi 2025 – कब है वरुथिनी एकादशी, जानें व्रत कथा, पूजा विधि, अनुष्ठान और शुभ मुहूर्त

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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। वर्ष भर में 24 एकादशी मनाई जाती हैं, जैसे की वरुथिनी एकादशी, जो साल 2025 में 24 अप्रैल को है। इस पृष्ठ पर, हम वरुथिनी एकादशी के महत्व, व्रत के शुभ मुहूर्त, विधि और इस पवित्र तिथि के दौरान किए जाने वाले उपायों के बारे में…

कैलाश मानसरोवर झील – आध्यात्मिकता, सौंदर्य और दुर्लभता का अद्वितीय संगम

हिमालय की विशाल पर्वतमाला में, समुद्र तल से कई मीटर ऊपर स्थित मानसरोवर झील (जिसे मानस सरोवर भी कहा जाता है) तिब्बत में कैलाश पर्वत के समीप स्थित है। यह पवित्र झील ल्हासा से लगभग 2000 किलोमीटर दूर है और विश्व की सबसे ऊँची मीठे जल की झील मानी जाती है। संस्कृत में इसका नाम…

महालिंगाष्टकम्

|| महालिङ्गाष्टकम् || महालिङ्गं महादेवं महेश्वरमुमापतिम् । साम्बं मध्यार्जुनेशं तं गुरुं देवं नतोऽस्म्यहम् ॥ १॥ ज्योतिरूपं कृष्णरूपं सर्वरूपं जगत्पतिम् । इष्टार्थसिद्धिदं शम्भुं महालिङ्गं नतोऽस्म्यहम् ॥ २॥ काशिक्षेत्रसमानञ्च कैलासादधिकं प्रियम् । शाश्वतस्थिरवासं च महालिङ्गं नतोऽस्म्यहम् ॥ ३॥ बृहद्कुचाम्बासहितं मूकाम्बा तपसाफलम् । गणाध्यक्षं षण्मुखञ्च महालिङ्गं नतोऽस्म्यहम् ॥ ४॥ प्रदक्षिणादश्वमेधं नमनात्वाजपेयकम् । स्तोत्रात्श्रीराजसूयाख्यं स्मराणत्मुक्तिदायकम् ॥ ५॥ क्षेत्रवासश्च निर्मुक्त…

चिन्मय लिंगाष्टकम्

|| चिन्मयलिङ्गाष्टकम् || (श्रीरुद्रकृतम्) ब्रह्ममुखामरपूजितलिङ्गं जिह्मगभूषणभूषितलिङ्गम् । सिंहमहामदमर्दनलिङ्गं चित्त सदा भज चिन्मयलिङ्गम् ॥ १॥ कनकधराधरकार्मुकलिङ्गं सनकमुखादिसुसन्नुतलिङ्गम् । दिनकरकोटिसुदीधितिलिङ्गं चित्त सदा भज चिन्मयलिङ्गम् ॥ २॥ अष्टविभूतिदमिष्टदलिङ्गं सृष्टजगत्त्रयरक्षकलिङ्गम् । अष्टमहाभयशिक्षकलिङ्गं चित्त सदा भज चिन्मयलिङ्गम् ॥ ३॥ मत्तगजाजिनवेष्टितलिङ्गं दग्धजगत्कृतपञ्चकलिङ्गम् । उत्तमपूरुषवत्सललिङ्गं चित्त सदा भज चिन्मयलिङ्गम् ॥ ४॥ अङ्गभवाङ्गसुभङ्गदलिङ्गं तुङ्गजटाभरशोभितलिङ्गम् । मङ्गलदायकमद्भुतलिङ्गं चित्त सदा भज चिन्मयलिङ्गम् ॥ ५॥ पङ्कजनेत्रसमर्चितलिङ्गं…

श्री लिंगाष्टकम स्तोत्र

|| श्री लिंगाष्टकम स्तोत्र || ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्ग तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धन कारणलिङ्गम्। सिद्धसुराऽसुरवन्दितलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्। दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्ग तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ कुंकुमचन्दनलेपितलिङ्गं पंकजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटि प्रभाकरलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ अष्टदलोपरि वेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भव कारणलिङ्गम्। अष्टदरिद्र विनाशितलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्…

Kailash Mansarovar Yatra 2025 – कैलाश मानसरोवर यात्रा जानिए तारीखें, रूट और आवेदन प्रक्रिया

Kailash Mansarovar Yatra

हर साल मई से अक्टूबर के बीच, हज़ारों श्रद्धालु विश्व के विभिन्न कोनों से आकर कैलाश पर्वत, मानसरोवर झील, अष्टपद और अन्य पवित्र स्थलों की यात्रा पर निकलते हैं। यह यात्रा शिवभक्तों के लिए न केवल एक धार्मिक अनुभव होता है, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक साधना भी होती है। हम हर वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा…

गायत्रीतत्त्वस्तोत्रम्

|| गायत्रीतत्त्वस्तोत्रम् || श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीगायत्र्यै नमः । श्रीगायत्रीतत्त्वमालामन्त्रस्य विश्वामित्र ऋषिः, अनुष्टुप्छदः, परमात्मा देवता, हलो बीजानि, स्वराः शक्तयः, अव्यक्तं कीलकम्, मम समस्तपापक्षयार्थे गायत्रीतत्त्वपाठे विनियोगः । चतुर्विशतितत्त्वानां यदेकं तत्त्वमुत्तमम् । अनुपाधि परम्ब्रह्म तत्परञ्ज्योतिरोमिति ॥ १॥ यो वेदादौ स्वरः प्रोक्तो वेदान्ते च प्रतिष्ठितः । तस्य प्रकृतिलीनस्य तत्परञ्ज्योतिरोमिति ॥ २॥ तत्सदादिपदैर्वाच्यं परमं पदमव्ययम् । अभेदत्वं पदार्थस्य तत्परञ्ज्योतिरोमिति…

श्रीगायत्र्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्

|| श्रीगायत्र्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् || हरिः ॐ । तरुणादित्यसङ्काशा सहस्रनयनोज्ज्वला । विचित्रमाल्याभरणा तुहिनाचलवासिनी ॥ १॥ वरदाभयहस्ताब्जा रेवातीरनिवासिनी । प्रणित्ययविशेषज्ञा यन्त्राकृतविराजित ॥ २॥ भद्रपादप्रिया चैव गोविन्दपथगामिनी । देवर्षिगणसन्तुष्टा वनमालाविभूषिता ॥ ३॥ स्यन्दनोत्तमसंस्था च धीरजीमूतनिःस्वना । मत्तमातङ्गगमना हिरण्यकमलासना ॥ ४॥ दीनजनोद्धारनिरता योगिनी योगधारिणी । नटनात्यैकनिरता प्रणवाद्यक्षरात्मिका ॥ ५॥ घोराचारा क्रियासक्ता दारिद्र्यच्छेदकारिणी । यादवेन्द्रकुलोद्भूता तुरीयपदगामिनी ॥ ६॥ गायत्री गोमती गङ्गा…

महागायत्रीलीलास्तुती

|| महागायत्रीलीलास्तुती || ॐ अथ महागायत्रीलीलास्तुतिः । सदा गवेषयन् जगत्रयेषु वेदमातरं चिदात्मना कृतस्थितं समत्र चाद्य लब्धवान् । उदस्रु गददं महोदयात्प्रणौमि भक्तिनौकया सुदुस्तरं द्रुतं तितीर्षुरापदर्णवम् ॥ १॥ सुहीनलोकपातिनी सतां कृपाऽतिशोभते ह्यत्सुधांशुचक्षुषे क्षयाम्ब ! माद्यशं जनम् । नवापि हीयते तवेषदीशि ! पालनेननो भवाद्यतः कुपुत्रता न भासते प्रसूह्रदि ॥ २। नमामि मुक्तविद्रुमप्रतप्तहाटकाऽसिता- वदातवर्णसुन्दरैः षडर्धलोललोचनैः । सरोजषण्डबान्धवप्रतप्तपावकप्रभैः किरीटरत्नरञ्जितैः सुधांशुखण्डमण्डितैः…

जिनदेवदर्शनस्तोत्रम्

|| जिनदेवदर्शनस्तोत्रम् || दर्शनं देवदेवस्य दर्शनं पापनाशनम् । दर्शनं स्वर्गसोपानं दर्शनं मोक्षसाधनम् ॥ १॥ दर्शनेन जिनेन्द्राणां साधूनां वन्दनेन च । न चिरं तिष्ठते पापं छिद्रहस्ते यथोदकम् ॥ २॥ वीतरागमुखं दॄष्ट्वा पद्मरागसमप्रभम् । जन्मजन्मकृतं पापं दर्शनेन विनश्यति ॥ ३॥ दर्शनं जिनसूर्यस्य संसार-ध्वान्त-नाशनम् । बोधनं चित्त-पद्मस्य समस्तार्थ-प्रकाशनम् ॥ ४॥ दर्शनं जिनचन्द्रस्य सद्धर्मामृत-वर्षणम् । जन्म-दाह-विनाशाय वर्धनं सुख-वारिधे ॥…

अर्जुनद्वादशनामस्तोत्रम्

|| अर्जुनद्वादशनामस्तोत्रम् || अर्जुनः फाल्गुनो जिष्णुः किरीटी श्वेतवाहनः ॥ बीभत्सुर्विजयी पार्थः सव्यसाची धनञ्जयः ॥ १॥ कपिध्वजो गुडाकेशो गाण्डीवी कृष्णसारथिः । एतान्यर्जुननामानि गवां गोष्ठे च यो लिखेत् ॥ २॥ न तत्र पशुरोगादि शुभं शीघ्रं प्रजायते ॥ इति अर्जुनद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्रीप्रणवाष्टकस्तोत्रम्

|| श्रीप्रणवाष्टकस्तोत्रम् || अचतुराननमुस्वभुवं हरिं महरमेव सुनादमहेश्वरम् । परममुज्वलबिन्दुसदाशिवम् ॥ प्रणवकारमहं प्रणमामितम् ॥ १॥ अरचनाख्यकलामुसुपाकलां मकृतिनाशकलां लयनादगाम् । परमबिन्दुरनुग्रहगां कलां प्रणवकारमहं प्रणमामितम् ॥ २॥ अगणनाथमुकारजनार्दनं मरविमेव सुनादपराम्विकाम् । परमबिन्दुशिवं परमेश्वरं प्रणवकारमहं प्रणमामि तम् ॥ ३॥ अपृथिवीमुजलं मकृशानुजं परमनादमयं परबिन्दुखम् । भुवनबीजमहापरमेश्वरं प्रणवकारमहं प्रणमामि तम् ॥ ४॥ अनिनदं क्षितिचक्रसमुद्भवं हृदयचक्रजमुध्वनिमुज्वलम् । मखमेवसहस्रदले गतं प्रणवकारमहं प्रणमामि तम्…

पूर्णब्रह्मस्तोत्रम्

|| पूर्णब्रह्मस्तोत्रम् || पूर्णचन्द्रमुखं नीलेन्दुरूपं उद्भाषितं देवं दिव्यंस्वरूपं पूर्णं त्वं स्वर्णं त्वं वर्णं त्वं देवं पिता माता बन्धु त्वमेव सर्वं जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहं जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥ १॥ कुञ्चितकेशं च सञ्चितवेशं वर्तुलस्थूलनयनं ममेशं पिनाकनीनिका नयनकोशं जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहं जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥ २॥ नीलाचले चञ्चलया सहितं नन्दनन्दनं त्वं इन्द्रस्य इन्द्रं जगन्नाथस्वामी…

व्यासकृतं पितृस्तोत्रम्

|| व्यासकृतं पितृस्तोत्रम् || जाबालिरुवाच । गुरून् वद महाभाग वेदव्यास जगद्गुरो । गुरूणां तारतम्यञ्च कस्मात् किं फलमुच्यते ॥ १॥ व्यास उवाच । माता पिता गुरुः श्रेयान् ज्येष्ठभ्राता पितामहः । श्वशुरो मातुलश्चैव तथा मातामहः स्मृतः ॥ २॥ पितुर्ज्येष्ठः कनिष्ठश्च भ्राता ज्येष्ठा निजस्वसा । पितुःस्वसा जनन्याश्च स्वसा गुरुजनाः स्मृताः ॥ ३॥ पत्न्यः पितामहादीनां तथैव गुरवः स्मृताः ।…

पार्श्वनाथसहस्रनामस्तोत्रम्

|| पार्श्वनाथसहस्रनामस्तोत्रम् || श्रीकल्याणसागरसूरिकृत श्रीसरस्वत्यै नमः ॥ पार्श्वनाथो जिनः श्रीमान् स्याद्वादी पार्श्वनायकः । शिवतातिर्जनत्राता दद्यान्मे सौख्यमन्वहम् ॥ १॥ नमस्यन्ति नराः सर्वे शीर्षेण भक्तिभासुराः । पापस्तोममपाकर्तुं तं पार्श्वं नौमि सर्वदम् ॥ २॥ यथार्थवादिना येनोन्मूलिताः क्लेशपादपाः । तेनानुभूयते ऋद्धिधीमता सूक्ष्मदर्शिना ॥ ३॥ शम्भवे पार्श्वनाथाय श्रीमते परमात्मने । नमः श्रीवर्द्धमानाय विश्वव्याधिहराय वै ॥ ४॥ दर्वीकरः शुभध्यानाद्धरणेन्द्रमवाप सः ।…

आत्मरक्षाकरं श्रीवज्रपञ्जरस्तोत्रम्

|| आत्मरक्षाकरं श्रीवज्रपञ्जरस्तोत्रम् || ॐ परमेष्ठिनमस्कारं सारं नवपदात्मकम् । आत्मरक्षाकरं वज्रपञ्जराभं स्मराम्यहम् ॥ १॥ ॐ नमो अरिहन्ताणं शिरस्कं शिरसि स्थितम् । ॐ नमो सव्वसिधाणं मुखे मुखपटं वरम् ॥ २॥ ॐ नमो आयरियाणं अङ्गरक्षाऽतिशायिनी । ॐ नमो उवज्झायाणं आयुधं हस्तयो दृढम् ॥ ३॥ ॐ नमो लोए सव्वसाहूणं मोचके पादयोः शुभे । एसो पञ्च नमुक्कारो शिला वज्रमयी…

देवकृता ब्रह्मस्तुतिः

|| देवकृता ब्रह्मस्तुतिः || त्वमोङ्कारोऽस्यङ्कुराय प्रसूतो विश्वस्यात्मानन्तभेदस्य पूर्वम् । सम्भूतस्यानन्तरं सत्त्वमूर्ते संहारेच्छोस्ते नमो रुद्रमूर्त्ते ॥ १॥ व्यक्तिं नीत्वा त्वं वपुः स्वं महिम्ना तस्मादण्डात् स्वाभिधानादचिन्त्यः । द्यावापृथिव्योरूर्ध्वखण्डावराभ्यां ह्यण्डादस्मात्त्वं विभागं करोषि ॥ २॥ व्यक्तं मेरौ यज्जनायुस्तवाभूदेवं विद्मस्त्वत्प्रणीतश्चकास्ति । व्यक्तं देवा जन्मनः शाश्वतस्य द्यौस्ते मूर्धा लोचने चन्द्रसूर्यौ ॥ ३॥ व्यालाः केशाः श्रोत्ररन्ध्रा दिशस्ते पादौ भूमिर्नाभिरन्ध्रे समुद्राः । मायाकारः…

श्रीब्रह्मकवचम्

|| श्रीब्रह्मकवचम् || ॐ श्रीब्रह्मणे नमः । कवचं श‍ृणु चार्वङ्गि जगन्मङ्गलनामकम् । पठनाद्धारणाद्यस्य ब्रह्मज्ञो जायते ध्रुवम् ॥ १॥ परमात्मा शिरः पातु हृदयं परमेश्वरः । कण्ठं पातु जगत्त्राता वदनं सर्वदृग्विभुः ॥ २॥ करौ मे पातु विश्वात्मा पादौ रक्षतु चिन्मयः । सर्वाङ्गं सर्वदा पातु परब्रह्म सनातनम् ॥ ३॥ श्रीजगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य सदाशिवः । ऋषिश्छन्दोऽनुष्टुबिति परब्रह्म च देवता ॥…

श्रीनारदभगवान् स्तुतिः

|| श्रीनारदभगवान् स्तुतिः || भवजलनिधिमग्नं जीवजातं निरीक्ष्य परमकरुणमूर्तिः श्रीमुकुन्दो महीयान् । कृत मुनिवर मूर्तिः पञ्चरात्रं वित्तन्वन् स जयति गुरुवर्य्यो नारदो नारदाता ॥ १॥ संसार सागर में निमग्न जीव समूह को देखकर करुणामूर्ति भगवान् मुकुन्द ने देवर्षी श्रीनारद का अवतार धारण किया और संसार में पाँचरात्र शास्त्र का विस्तार किया । उन भक्त प्राणियों के अज्ञान…

नवनागनामस्तोत्रम्

|| नवनागनामस्तोत्रम् || श्रीगणेशाय नमः । अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् । शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥ १॥ एतानि नवनामानि नागानां च महात्मनाम् । सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः ॥ २॥ तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ३॥ ॥ इति श्रीनवनागनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Lingashtakam

|| Lingashtakam || Brahma Muraari Sura Aarcita Linggam Nirmala Bhaasita Shobhita Linggam। Janmaja Duhkha Vinaashaka Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥ Deva Muni Pravara Aarcita Linggam Kaama Dahan Karunnaa Kara Linggam। Raavanna Darpa Vinaashana Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥ Sarva Sugandhi Sulepita Linggam Buddhi Vivardhana Kaaranna Linggam। Siddha Sura Asura Vandita Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥…

Shri Lingashtakam Stotra

|| Shri Lingashtakam Stotra || Brahma murari surarchita lingam Nirmala bhasita shobhita lingam। Janmaja duhkha vinasha kalinga Tat pranamami sadashiva lingam ॥ Devamuni pravararchita lingam Kamadaham karunakara lingam। Ravanadarpavinashana lingam Tat pranamami sadashiva lingam ॥ Sarvasugandhisulepita lingam Buddhivivardhana karana lingam। Siddhasura’suravandita lingam Tat pranamami sadashiva lingam ॥ Kanaka mahamanibhushita lingam Phanipativeshtitashobhita lingam। Dakshasuyajnavinashana lingam Tat…

શ્રી લિઙ્ગાષ્ટકમ્

|| શ્રી લિઙ્ગાષ્ટકમ્ (Lingashtakam Gujarati PDF) || બ્રહ્મમુરારિસુરાર્ચિતલિઙ્ગમ્ નિર્મલભાસિતશોભિતલિઙ્ગમ્ । જન્મજદુઃખવિનાશકલિઙ્ગમ્ તત્ પ્રણમામિ સદાશિવલિઙ્ગમ્ ॥ દેવમુનિપ્રવરાર્ચિતલિઙ્ગમ્ કામદહમ્ કરુણાકર લિઙ્ગમ્ । રાવણદર્પવિનાશનલિઙ્ગમ્ તત્ પ્રણમામિ સદાશિવ લિઙ્ગમ્ ॥ સર્વસુગન્ધિસુલેપિતલિઙ્ગમ્ બુદ્ધિવિવર્ધનકારણલિઙ્ગમ્ । સિદ્ધસુરાસુરવન્દિતલિઙ્ગમ્ તત્ પ્રણમામિ સદાશિવ લિઙ્ગમ્ ॥ કનકમહામણિભૂષિતલિઙ્ગમ્ ફનિપતિવેષ્ટિત શોભિત લિઙ્ગમ્ । દક્ષસુયજ્ઞ વિનાશન લિઙ્ગમ્ તત્ પ્રણમામિ સદાશિવ લિઙ્ગમ્ ॥ કુઙ્કુમચન્દનલેપિતલિઙ્ગમ્ પઙ્કજહારસુશોભિતલિઙ્ગમ્ । સઞ્ચિતપાપવિનાશનલિઙ્ગમ્ તત્ પ્રણમામિ સદાશિવ…

লিঙ্গস্তকম

|| লিঙ্গস্তকম (Lingashatkam Bengali PDF) || ব্রহ্মমুরারি সুরার্চিত লিঙ্গং নির্মলভাসিত শোভিত লিঙ্গম | জন্মজ দুঃখ বিনাশক লিঙ্গং তত-প্রণমামি সদাশিব লিঙ্গম || দেবমুনি প্রবরার্চিত লিঙ্গং কামদহন করুণাকর লিঙ্গম | রাবণ দর্প বিনাশন লিঙ্গং তত-প্রণমামি সদাশিব লিঙ্গম || সর্ব সুগংধ সুলেপিত লিঙ্গং বুদ্ধি বিবর্ধন কারণ লিঙ্গম | সিদ্ধ সুরাসুর বংদিত লিঙ্গং তত-প্রণমামি সদাশিব লিঙ্গম || কনক মহামণি…

ଲିଙ୍ଗଷ୍ଟାକମ୍ ଷ୍ଟ୍ରୋଟମ୍

‖ ଲିଙ୍ଗଷ୍ଟାକମ୍ (Lingashtakam PDF Odia) ‖ ବ୍ରହ୍ମମୁରାରି ସୁରାର୍ଚିତ ଲିଂଗଂ ନିର୍ମଲଭାସିତ ଶୋଭିତ ଲିଂଗମ୍ | ଜନ୍ମଜ ଦୁଃଖ ଵିନାଶକ ଲିଂଗଂ ତତ୍ପ୍ରଣମାମି ସଦାଶିଵ ଲିଂଗମ୍ ‖ ଦେଵମୁନି ପ୍ରଵରାର୍ଚିତ ଲିଂଗଂ କାମଦହନ କରୁଣାକର ଲିଂଗମ୍ | ରାଵଣ ଦର୍ପ ଵିନାଶନ ଲିଂଗଂ ତତ୍ପ୍ରଣମାମି ସଦାଶିଵ ଲିଂଗମ୍ ‖ ସର୍ଵ ସୁଗଂଧ ସୁଲେପିତ ଲିଂଗଂ ବୁଦ୍ଧି ଵିଵର୍ଧନ କାରଣ ଲିଂଗମ୍ | ସିଦ୍ଧ ସୁରାସୁର ଵଂଦିତ ଲିଂଗଂ ତତ୍ପ୍ରଣମାମି ସଦାଶିଵ ଲିଂଗମ୍ ‖ କନକ ମହାମଣି…

नतोपदेशस्तोत्रम्

|| नतोपदेशस्तोत्रम् || मनः समाधौ परमार्थरङ्गं विधाय निष्पन्दमनुत्तरङ्गम् । बुधा विधातुं भवभीतिभङ्गं विभुं भजध्वं गिरिजाभुजङ्गम् ॥ १॥ पाश्यावशेनेव महाविहङ्गं वल्गाबलेनेव महातुरङ्गम् । निरुध्य योगेन मनःप्लवङ्गं विभुं भजध्वं गिरिजाभुजङ्गम् ॥ २॥ मन्त्रौषधादिक्रियया भुजङ्गं यथा तथा वागुरया कुरङ्गम् । मनस्तदायम्य धियास्तसङ्गं विभुं भजध्वं गिरिजाभुजङ्गम् ॥ ३॥ भित्वालिकं सुभ्रुकुटीविभङ्गं यस्याग्निरुद्यद्रभसादनङ्गम् । ददाह तं मोहतमःपतङ्गं विभुं भजध्वं गिरिजाभुजङ्गम् ॥…

ലിംഗാഷ്ടകം

|| ലിംഗാഷ്ടകം (Lingashtakam PDF Malayalam) || ബ്രഹ്മമുരാരി സുരാര്ചിത ലിങ്ഗം നിര്മലഭാസിത ശോഭിത ലിങ്ഗമ് | ജന്മജ ദുഃഖ വിനാശക ലിങ്ഗം തത്-പ്രണമാമി സദാശിവ ലിങ്ഗമ് || ദേവമുനി പ്രവരാര്ചിത ലിങ്ഗം കാമദഹന കരുണാകര ലിങ്ഗമ് | രാവണ ദര്പ വിനാശന ലിങ്ഗം തത്-പ്രണമാമി സദാശിവ ലിങ്ഗമ് || സര്വ സുഗംധ സുലേപിത ലിങ്ഗം ബുദ്ധി വിവര്ധന കാരണ ലിങ്ഗമ് | സിദ്ധ സുരാസുര വംദിത ലിങ്ഗം തത്-പ്രണമാമി സദാശിവ ലിങ്ഗമ് || കനക മഹാമണി…

देवैः कृतं धर्मस्तोत्रम्

|| देवैः कृतं धर्मस्तोत्रम् || देवा ऊचुः । नमोऽस्तु शशिसङ्काश नमस्ते जगतः पते । नमोऽस्तु देवरूपाय स्वर्गमार्गप्रदर्शक । कर्ममार्गस्वरूपाय सर्वगाय नमो नमः ॥ २०॥ त्वयेयं पाल्यते पृथ्वी त्रैलोक्यं च त्वयैव हि । जनस्तपस्तथा सत्यं त्वया सर्वं तु पाल्यते ॥ २१॥ न त्वया रहितं किञ्चिज्जगत्स्थावरजङ्गमम् । विद्यते त्वद्विहीनं तु सद्यो नश्यति वै जगत् ॥ २२॥ त्वमात्मा…

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