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पितृ दोष हो तो करियर रुकता है – जानें श्राद्ध पक्ष में क्या करें

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अक्सर लोग अपनी असफलताओं के लिए किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे कोई और वजह भी हो सकती है? हमारे ज्योतिषशास्त्र में ऐसी ही एक स्थिति का वर्णन किया गया है, जिसे पितृ दोष कहते हैं। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों से जुड़े कर्मों और ऊर्जा का एक गहरा प्रभाव है।

आइए, इस लेख में हम विस्तार से समझते हैं कि पितृ दोष क्या है, इसका सीधा संबंध आपके करियर से कैसे हो सकता है और सबसे महत्वपूर्ण, श्राद्ध पक्ष के दौरान आप इससे मुक्ति पाने के लिए क्या खास उपाय कर सकते हैं।

पितृ दोष क्या है और इसका करियर से क्या संबंध है?

पितृ दोष का मतलब है, हमारे पूर्वजों (माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी आदि) के अधूरे कर्मों, असंतुष्ट आत्माओं या किसी कारणवश उनके प्रति हमारी उपेक्षा के कारण उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का दोष। यह दोष कुंडली में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों के कारण बनता है।

लेकिन, इसका करियर से क्या लेना-देना है? दरअसल, हमारे पूर्वज हमारी जड़ों की तरह होते हैं। अगर जड़ें कमजोर या अस्वस्थ होंगी, तो पेड़ पर फल नहीं लगेंगे। इसी तरह, जब पितृ दोष होता है, तो व्यक्ति को हर काम में असफलता मिलती है।

पितृ दोष के कारण करियर में आने वाली कुछ आम समस्याएं

  • लगातार असफल होना – लाख कोशिशों के बाद भी सफलता का मुंह न देख पाना।
  • नौकरी का न लगना या बार-बार छूटना – एक जगह टिककर काम न कर पाना।
  • व्यापार में भारी नुकसान – बिजनेस में सिर्फ घाटा ही घाटा होना।
  • प्रमोशन में रुकावटें – योग्यता होने पर भी पदोन्नति न मिलना।
  • अचानक पैसों का नुकसान – बिना किसी कारण के आर्थिक स्थिति का बिगड़ना।
  • मेहनत का सही फल न मिलना – परिश्रम के अनुसार परिणाम न मिलना।
  • यह सब संकेत हो सकते हैं कि कहीं न कहीं आपके जीवन की ऊर्जा को पितृ दोष ने रोक रखा है।

श्राद्ध पक्ष – पितृ दोष निवारण का सबसे शुभ समय

श्राद्ध पक्ष वह 16 दिन की अवधि है, जो भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक चलती है। यह समय हमारे पूर्वजों को याद करने, उनका सम्मान करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष रूप से समर्पित है। ज्योतिष के अनुसार, इस दौरान किए गए उपाय बहुत जल्दी फल देते हैं। अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है, तो यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं।
श्राद्ध पक्ष में पूर्वज पृथ्वी पर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध स्वीकार करने आते हैं। अगर आप इस समय सही तरीके से उनके लिए कुछ करते हैं, तो वे प्रसन्न होकर आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इससे पितृ दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।

पितृ दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष में क्या करें?

श्राद्ध पक्ष में कुछ विशेष उपाय करके आप न सिर्फ अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं, बल्कि अपने करियर की रुकावटों को भी दूर कर सकते हैं।

  • तर्पण और पिंड दान करें – अगर संभव हो तो किसी योग्य पंडित की मदद से पूरे विधि-विधान से तर्पण और पिंड दान करें। यह पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने का सबसे उत्तम तरीका है। अगर आप विधिपूर्वक नहीं कर सकते, तो कम से कम जल और काले तिल से तर्पण करें।
  • गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराएं – श्राद्ध के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार भोजन कराएं। खासतौर पर, अगर आपके पूर्वज किसी खास पकवान को पसंद करते थे, तो उसे बनाकर गरीबों को खिलाएं। यह एक बहुत ही पुण्य का काम है।
  • गाय को भोजन और पक्षियों को दाना – गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। श्राद्ध के दिनों में गाय को रोटी, हरा चारा या गुड़ खिलाएं। साथ ही, छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें। यह माना जाता है कि पूर्वज इन रूपों में भोजन ग्रहण करते हैं।
  • पीपल के पेड़ की पूजा – पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। श्राद्ध पक्ष में पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम को सरसों के तेल का दीया जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आपको आशीर्वाद देते हैं।
  • भागवत गीता का पाठ – श्राद्ध पक्ष में श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे पितरों को शांति मिलती है और दोष का निवारण होता है।
  • अपने पूर्वजों को याद करें और क्षमा मांगे – शांत मन से बैठकर अपने सभी पूर्वजों को याद करें। उनसे जाने-अनजाने हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें। यह एक भावनात्मक उपाय है, जो आपके मन को भी शांति देगा और पितरों को भी।

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