नमस्ते पाठकों! क्या आपके घर के मंदिर में भी विराजते हैं भोलेनाथ? अगर हाँ, तो यह जानना आपके लिए अत्यंत आवश्यक (Extremely Important) है कि घर में शिवलिंग रखने के नियम क्या हैं, खासकर जब बात पारद (Mercury) या स्फटिक (Crystal) शिवलिंग की हो।
शिवलिंग को घर में रखना बहुत शुभ माना जाता है, यह सुख-समृद्धि और शांति लाता है, लेकिन अगर नियमों का पालन न किया जाए तो यही शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का कारण बन सकता है। आज हम आपको भारतीय शैली में, पूरे विस्तार से, वो 5 बड़े नियम बताएंगे, जो आपको किसी भी हाल में नहीं तोड़ने चाहिए। ये जानकारी आपके घर में सकारात्मकता (Positivity) बनाए रखेगी और भोलेनाथ का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहेगा।
शिवलिंग का सही आकार और स्थान (Size and Direction)
घर के लिए शिवलिंग का आकार बहुत महत्वपूर्ण होता है। मंदिर या आश्रम के लिए बड़े शिवलिंग ठीक होते हैं, लेकिन घर में:
- शास्त्रों के अनुसार, घर में स्थापित शिवलिंग आपके अंगूठे के पहले पोर (First Joint of Thumb) से बड़ा नहीं होना चाहिए।
- यदि शिवलिंग बहुत बड़ा है, तो उसकी ऊर्जा को संभालना मुश्किल हो जाता है, जिससे घर में अशांति या वैराग्य की भावना बढ़ सकती है।
- शिवलिंग की स्थापना हमेशा ऐसे करें कि उसकी जलधारी (Jalhari) का मुख उत्तर दिशा की ओर हो।
- जलधारी का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना अशुभ माना जाता है।
पारद और स्फटिक – कौन-सा चुनें और क्यों? (Parad vs. Sphatik: Which to Choose?)
घर में पारद या स्फटिक शिवलिंग रखना सबसे उत्तम माना जाता है। दोनों के अपने विशेष लाभ हैं और इन्हें दिव्य (Divine) माना जाता है।
- पारद (Mercury) शिवलिंग – यह पारा (Mercury) और चाँदी के मिश्रण से बनता है। इसे अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। धन, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे ‘रसराज’ कहा जाता है।
- स्फटिक (Crystal) शिवलिंग – यह क्वार्ट्ज क्रिस्टल से बना होता है, जो शुद्धता का प्रतीक है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, मन को शांति देता है और सभी प्रकार की बाधाओं को खत्म करता है।
बड़ा नियम – आपको इनमें से किसी भी शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) घर में नहीं करवानी चाहिए। इनकी पूजा बिना प्राण प्रतिष्ठा के ही शुभ फल देती है।
नियमित और पूर्ण पूजा (Regular and Complete Worship)
घर में शिवलिंग रखने का सबसे बड़ा नियम है उसकी नियमित पूजा। भगवान शिव को गृहस्थ (Householder) माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में ये बातें ध्यान रखें:
- शिवलिंग का प्रतिदिन अभिषेक (Abhishek) करना अनिवार्य है, नहीं तो वह निष्क्रिय (Inactive) हो जाता है। सुबह-शाम दोनों समय पूजा करना सर्वोत्तम है।
- शिवलिंग को कभी भी अकेला न रखें। इसके साथ शिव परिवार (शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय) की तस्वीर या छोटी मूर्ति अवश्य रखें।
- अकेला शिवलिंग रखने से वैराग्य की भावना बढ़ती है और गृहस्थ जीवन में संतुलन (Balance) बिगड़ सकता है।
कभी न चढ़ाएं ये चीज़ें (Avoid These Offerings)
भगवान शिव की पूजा में कुछ चीज़ें वर्जित हैं, जिन्हें भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए, खासकर घर के शिवलिंग पर:
- शिवलिंग पर तुलसी का पत्ता कभी नहीं चढ़ाया जाता है।
- ये सौभाग्य की वस्तुएं हैं, जो शिवजी को अर्पित नहीं की जाती हैं। शिवलिंग पर हमेशा चंदन का तिलक लगाएं।
- केतकी का फूल शिवजी को अप्रिय है, इसलिए इसे भूलकर भी न चढ़ाएं।
शिवलिंग को कहाँ न रखें (Where Not to Place)
शिवलिंग को रखने के स्थान को लेकर वास्तु (Vastu) में बहुत सख्त नियम हैं:
- शिवलिंग को कभी भी बेडरूम या रसोई (Kitchen) में नहीं रखना चाहिए।
- शिवलिंग को किसी बंद कमरे या जगह पर नहीं रखें, जहां हवा न आती हो। शिवलिंग को हमेशा खुली और पवित्र जगह पर ही स्थापित करें।
- शिवलिंग को बेडरूम या अपवित्र जगह पर रखने से घर में रोग और दुर्भाग्य (Misfortune) आ सकता है।
Found a Mistake or Error? Report it Now

