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सौर नववर्ष की पौराणिक कथा

Saur Navvarsh Katha Hindi

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हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सोलर नववर्ष (सौर नववर्ष) का बहुत महत्व है। यह वह दिन होता है जब सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मेष संक्रांति’ भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे वैशाखी, बंगाल में पोइला बैशाख और दक्षिण में विशु या पुथांडु के नाम से मनाया जाता है। यहाँ सौर नववर्ष से जुड़ी पौराणिक कथा और उसका महत्व दिया गया है:

|| सौर नववर्ष की पौराणिक कथा ||

सौर नववर्ष की मुख्य कथा भगवान विष्णु के अवतार और राजा अंबरीष या गंगा अवतरण से जुड़ी मानी जाती है, लेकिन सबसे प्रचलित संदर्भ ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना और सूर्य देव के तेज से जुड़ा है।

सृष्टि का प्रारंभ

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। सतयुग का आरंभ भी इसी तिथि से माना जाता है। सूर्य देव को ‘जगत की आत्मा’ कहा गया है, और जब वे चक्र पूरा करके पुनः प्रथम राशि (मेष) में आते हैं, तो प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है।

मां गंगा का धरती पर आगमन

एक अन्य कथा के अनुसार, राजा भगीरथ की सदियों की तपस्या के बाद, इसी दिन मां गंगा शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर उतरी थीं। इसीलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि सौर नववर्ष पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पिछले जन्मों के पाप धुल जाते हैं।

सूर्य देव और न्याय

सौर नववर्ष सूर्य की शक्ति का प्रतीक है। कथाओं के अनुसार, सूर्य देव जब मेष राशि में होते हैं, तो वे अपने उच्चतम प्रभाव (Exalted position) में होते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को तेज, आरोग्य और यश की प्राप्ति होती है। किसान इस दिन अपनी नई फसल का भोग सूर्य देव को लगाते हैं क्योंकि उनकी कृपा से ही अन्न की प्राप्ति संभव हुई।

|| पूजन विधि और परंपराएं ||

सौर नववर्ष के दिन निम्नलिखित कार्य शुभ माने जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान – सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर में गंगाजल डालकर स्नान करें।
  • सूर्य अर्घ्य – तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, और अक्षत (चावल) डालकर सूर्य देव को (सामने) मुख करके जल अर्पित करें।
  • दान पुण्य – इस दिन सत्तू, घड़ा (मिट्टी का बर्तन), पंखा और मौसमी फलों का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • नया संकल्प – यह दिन नई शुरुआत का है, इसलिए नए व्यापार या कार्यों का शुभारंभ इसी दिन किया जाता है।

“ॐ सूर्याय नमः”

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