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सप्ताह के व्रत और उनके देवता – कौन सा व्रत किस दिन रखें?

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क्या आप जानते हैं कि सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना एक विशेष महत्व होता है? हमारे सनातन धर्म में, हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, और उनसे संबंधित व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ये व्रत न केवल हमें आध्यात्मिक रूप से मजबूत करते हैं, बल्कि शारीरिक और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं।

आज हम सप्ताह के सातों दिनों के लिए समर्पित व्रत, उनके संबंधित देवी-देवताओं और इन व्रतों को रखने के लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे। तो आइए, अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दैवीय आशीर्वाद लाने की इस यात्रा पर निकलें!

सोमवार – भगवान शिव को समर्पित

सोमवार का दिन भगवान शिव शंकर और देवी पार्वती को समर्पित है। ‘सोम’ शब्द का अर्थ चंद्रमा भी है, और चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इसलिए, सोमवार का व्रत मन की शांति और मानसिक संतुलन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

  • कौन रखें – अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी अपनी इच्छाओं की पूर्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह व्रत जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और मोक्ष प्राप्त करने में भी सहायक है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प और फल चढ़ाएं। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। आरती करें और दिन में एक बार फलाहार करें।

मंगलवार – हनुमान जी और देवी दुर्गा को समर्पित

मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और देवी दुर्गा को समर्पित है। यह दिन ऊर्जा, शक्ति और साहस का प्रतीक है।

  • कौन रखें – जो लोग शारीरिक बल, साहस और आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते हैं, या मंगल दोष से पीड़ित हैं, वे यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – मंगलवार का व्रत रखने से भय और संकटों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाते हैं और सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करते हैं। यह व्रत कर्ज मुक्ति और संतान प्राप्ति में भी सहायक है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र पहनें। हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़ और चना चढ़ाएं। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। शाम को हनुमान जी की आरती करें। देवी दुर्गा की पूजा भी लाभकारी होती है।

बुधवार – भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित

बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है। बुध ग्रह बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक है।

  • कौन रखें – जो लोग अपनी बुद्धि और एकाग्रता बढ़ाना चाहते हैं, व्यापार में सफलता चाहते हैं या जिनकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है, वे यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – बुधवार का व्रत रखने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि प्रदान करते हैं। यह व्रत व्यापार में उन्नति, वाणी में मधुरता और शिक्षा में सफलता दिलाने में सहायक है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर भगवान गणेश को दूर्वा घास, मोदक या लड्डू चढ़ाएं। गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यकारी होता है।

गुरुवार/बृहस्पतिवार – भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है। बृहस्पति ग्रह ज्ञान, विवाह, संतान और धन का कारक है।

  • कौन रखें – अविवाहित कन्याएं शीघ्र विवाह के लिए, विवाहित स्त्रियां पति की उन्नति और संतान सुख के लिए, और पुरुष धन-समृद्धि व ज्ञान प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – गुरुवार का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है, संतान प्राप्ति में सहायता करता है और ज्ञान में वृद्धि करता है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और केले के पेड़ की पूजा करें। केले के पेड़ में जल चढ़ाएं और हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। ब्राह्मणों को पीली वस्तुओं का दान करें।

शुक्रवार – देवी लक्ष्मी और देवी संतोषी को समर्पित

शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी, धन की देवी, और देवी संतोषी को समर्पित है। यह दिन सौंदर्य, कला, प्रेम और भौतिक सुखों का प्रतीक है।

  • कौन रखें – जो लोग धन, वैभव, सुख-समृद्धि और संतोष प्राप्त करना चाहते हैं, वे यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – शुक्रवार का व्रत रखने से देवी लक्ष्मी और संतोषी माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों को धन, समृद्धि और शांति प्रदान करती हैं। यह व्रत पारिवारिक सुख, प्रेम और भौतिक इच्छाओं की पूर्ति में सहायक है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें। देवी लक्ष्मी को कमल का फूल, कौड़ी और मिश्री चढ़ाएं। श्री सूक्त का पाठ करें। संतोषी माता की पूजा में खटाई का सेवन वर्जित होता है। गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं।

शनिवार – शनि देव और भगवान हनुमान को समर्पित

शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और भगवान हनुमान को समर्पित है। शनि देव हमारे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।

  • कौन रखें – जिन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है, या जो शनि दोष से पीड़ित हैं, वे यह व्रत रख सकते हैं। हनुमान जी की पूजा भी शनि के प्रकोप से बचाती है।
  • महत्व और लाभ – शनिवार का व्रत रखने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनके नकारात्मक प्रभावों को कम करते हैं। यह व्रत जीवन में स्थिरता, अनुशासन और सफलता दिलाता है। हनुमान जी की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर काले वस्त्र पहनें। शनि मंदिर जाकर शनि देव को सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल और लोहे की वस्तुएं अर्पित करें। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि चालीसा का पाठ करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी करें।

रविवार – भगवान सूर्य को समर्पित

रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य को समर्पित है। सूर्य देव ऊर्जा, स्वास्थ्य, तेज और यश के प्रतीक हैं।

  • कौन रखें – जो लोग उत्तम स्वास्थ्य, तेज, आत्म-विश्वास और मान-सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं, वे यह व्रत रख सकते हैं।
  • महत्व और लाभ – रविवार का व्रत रखने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आरोग्य, तेज और प्रसिद्धि प्रदान करते हैं। यह व्रत नेत्र रोगों को दूर करने और सरकारी कार्यों में सफलता दिलाने में भी सहायक है।
  • पूजा विधि – सुबह स्नान कर लाल वस्त्र पहनें। सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें (जल चढ़ाएं)। ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • किसी भी व्रत का फल तभी मिलता है जब उसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन (फल, दूध, सब्जियां) का सेवन करें और मांस-मदिरा से दूर रहें।
  • प्रत्येक व्रत के अपने नियम होते हैं, उनका ठीक से पालन करें।
  • व्रत के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
  • व्रत के दिनों में शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें।
  • अपनी क्षमता अनुसार दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

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