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शनि जयंती पर क्यों नहीं देखते हैं शनि को सीधा? जानिए वो कथा जिसने रचा यह नियम

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हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। यह दिन भगवान शनिदेव को समर्पित है, जो न्याय के देवता और कर्मों के फलदाता हैं। इस दिन भक्त शनिदेव की पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शनि जयंती पर या किसी भी दिन शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर को सीधा देखना शुभ क्यों नहीं माना जाता? इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण पौराणिक कथा छिपी है, जिसने इस नियम को जन्म दिया।

शनिदेव की तिरछी दृष्टि का रहस्य

अक्सर लोग शनिदेव को देखते समय अपनी दृष्टि झुका लेते हैं या परोक्ष रूप से देखते हैं। यह केवल एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक कारण है। शनिदेव को उनकी तपस्या और कठोर स्वभाव के लिए जाना जाता है, और उनकी दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। तो चलिए जानते हैं वह कथा जिसने इस नियम को स्थापित किया।

शिव पुराण में वर्णित कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार शनिदेव अपनी तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या इतनी गहन थी कि ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां उससे प्रभावित हो रही थीं। इसी समय भगवान शिव ने अपनी पत्नी पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर भ्रमण कर रहे थे। माता पार्वती ने देखा कि शनिदेव अपनी तपस्या में इतने लीन हैं कि उन्होंने उन्हें प्रणाम तक नहीं किया। माता पार्वती को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने शनिदेव से इसका कारण पूछा।

शनिदेव ने अत्यंत विनम्रता से उत्तर दिया, “हे माता! मैं इस समय अपनी तपस्या में लीन हूँ और मेरी दृष्टि किसी पर भी पड़ने से उसका अनिष्ट हो सकता है। मैंने अपनी पत्नी चित्रा के साथ भी यही नियम बनाया है कि मैं कभी भी उन्हें सीधे नहीं देखूंगा।”

माता पार्वती ने शनिदेव की बात पर विश्वास नहीं किया और उन्हें सीधे देखने पर जोर दिया। शनिदेव ने बार-बार समझाया, लेकिन माता पार्वती नहीं मानीं। अंततः, शनिदेव ने अपनी दृष्टि माता पार्वती पर डाली। जैसे ही उनकी दृष्टि माता पार्वती पर पड़ी, माता पार्वती के वाहन, सिंह, का पैर टूट गया और वह लंगड़ाने लगा। यह देखकर माता पार्वती को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने शनिदेव से क्षमा याचना की।

शनिदेव को श्राप मिलने की कथा

एक और लोकप्रिय कथा के अनुसार, शनिदेव का विवाह चित्रलेखा नामक एक अत्यंत तपस्वी और पतिव्रता स्त्री से हुआ था। एक बार चित्रलेखा संतान प्राप्ति की कामना से तपस्या कर रही थीं। ठीक उसी समय, शनिदेव को अपने पिता सूर्यदेव के बुलावे पर किसी महत्वपूर्ण कार्य से जाना पड़ा। शनिदेव को लौटने में थोड़ी देर हो गई, जिससे चित्रलेखा की तपस्या भंग हो गई।

क्रोधित होकर चित्रलेखा ने शनिदेव को श्राप दे दिया कि “जिस पर भी तुम्हारी दृष्टि पड़ेगी, उसका अनिष्ट होगा।” शनिदेव ने चित्रलेखा को बहुत समझाया कि वे किसी महत्वपूर्ण कार्य से गए थे, लेकिन श्राप वापस नहीं लिया जा सका। हालांकि, चित्रलेखा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्राप की तीव्रता को कम करते हुए कहा कि शनिदेव की दृष्टि तभी अनिष्टकारी होगी जब वे जानबूझकर किसी पर अपनी सीधी दृष्टि डालेंगे।

इस घटना के बाद से ही शनिदेव ने अपनी दृष्टि को नियंत्रित करना सीख लिया और वे किसी पर भी अपनी सीधी दृष्टि डालने से बचते हैं, ताकि किसी का अनिष्ट न हो।

आज भी प्रासंगिक है यह नियम

ये कथाएं हमें बताती हैं कि क्यों शनिदेव को सीधा देखना शुभ नहीं माना जाता। यह केवल शनिदेव के क्रोध या उनके नकारात्मक प्रभाव का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उनकी तपस्या, शक्ति और उनकी दृष्टि के अप्रत्याशित प्रभाव को दर्शाता है। यह एक प्रकार से हमें यह भी सिखाता है कि कुछ शक्तियां इतनी प्रबल होती हैं कि उन्हें सीधे ग्रहण करना भी हानिकारक हो सकता है।

शनि जयंती पर क्या करें?

शनि जयंती के दिन शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • शनिदेव की प्रतिमा को सीधे न देखें – उनकी दृष्टि से बचने के लिए आप उनकी प्रतिमा को परोक्ष रूप से देख सकते हैं, या फिर उनके चरणों के दर्शन कर सकते हैं।
  • तेल का दीपक जलाएं – शनिदेव को सरसों का तेल अत्यंत प्रिय है। शनि जयंती पर उनके सामने तेल का दीपक जलाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
  • पीपल के पेड़ की पूजा – पीपल के पेड़ को शनिदेव का निवास स्थान माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा और जल अर्पित करना शुभ होता है।
  • काली वस्तुओं का दान – काले तिल, काला उड़द, काले वस्त्र आदि का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
  • शनि मंत्रों का जाप – “ॐ शं शनैश्चराय नमः” या “शनि बीज मंत्र” का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें – शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। गरीबों और असहायों की मदद करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

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