पशुपतिनाथ व्रत भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली और पवित्र व्रत है। यह व्रत भक्तों को भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने इस व्रत की महिमा और विधि को सरल और सुलभ तरीके से समझाया है।
पाशुपतिनाथ व्रत भगवान शिव की आराधना का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिसे पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने विशेष रूप से प्रचारित किया है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि जीवन में अनेक अद्भुत लाभ प्रदान करता है।
पशुपतिनाथ व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा बताई गई विधि का पालन करके भक्त इस व्रत का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं।
पशुपतिनाथ व्रत का महत्व
पशुपतिनाथ व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक विशेष अवसर है। यह व्रत भक्तों को मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। इस व्रत को करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पंडित प्रदीप मिश्रा जी के अनुसार, पाशुपतिनाथ व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी साधन है। नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
पशुपतिनाथ व्रत पूजा विधि
- इस व्रत को किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार से प्रारंभ करें। यदि संभव हो, तो पूर्णिमा के दिन जो सोमवार हो, उसी दिन से व्रत शुरू करें।
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पीतल, तांबे या कांसे की थाली में सफेद चंदन, फूल, बेलपत्र, दूर्वा, आंकड़े का फूल और पत्ता, शमी का फूल और पत्ता, पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, शहद), गंगाजल, भस्म, इत्र, कलावा, जनेऊ, घी का दीपक आदि रखें।
- शिवालय में जाकर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें, फिर पंचामृत से स्नान कराएं और पुनः गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद, चंदन, इत्र, जनेऊ, वस्त्र (मौली), फूल, बेलपत्र, शमी पत्र, आंकड़े के पत्ते और फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और भोग अर्पित, पशुपतिनाथ जी की आरती करें।
- शाम को पुनः मंदिर जाएं, छह दीपक साथ ले जाएं। पांच दीपक मंदिर में जलाएं और एक दीपक घर लाकर प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर जलाएं।
- भोग की सामग्री को तीन भागों में बांटें; दो भाग मंदिर में छोड़ें और एक भाग घर लाकर स्वयं ग्रहण करें।
- इस व्रत को लगातार पांच सोमवार तक करें। पांचवें सोमवार को व्रत का उद्यापन करें, जिसमें विशेष पूजा और ब्राह्मणों को दान दें।
पाशुपतिनाथ व्रत के अद्भुत लाभ
- इस व्रत के माध्यम से साधक की आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
- जीवन में आने वाले विभिन्न कष्टों, बाधाओं और रोगों से मुक्ति मिलती है।
- सच्चे मन से व्रत करने पर इच्छित फल की प्राप्ति होती है, जैसे विवाह, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि आदि।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन के पापों का नाश होता है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा (Pt. Pradeep Mishra) द्वारा बताई गई व्रत विधि
पशुपतिनाथ व्रत का संकल्प
- सोमवार के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव के मंदिर में जाकर या घर पर ही शिवलिंग की स्थापना करें।
- भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें और अपनी मनोकामना कहें।
पशुपतिनाथ व्रत के नियम
- यह व्रत पांच सोमवार तक किया जाता है।
- व्रत के दौरान केवल एक समय भोजन करें।
- भोजन में फल, दूध, दही, साबूदाना और अन्य सात्विक पदार्थ शामिल करें।
- व्रत के दौरान भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करें।
पशुपतिनाथ व्रत का उद्यापन
- पांच सोमवार के बाद पशुपतिनाथ व्रत का उद्यापन करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
- गरीबों को भोजन कराएं।
- व्रत के दौरान क्रोध, लोभ और अहंकार से बचें।
- मन को शांत और स्थिर रखें।
- भगवान शिव के प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें।
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