योगेश्वर द्वादशी 2026 का पावन पर्व 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह तिथि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को आती है। इसे ‘चिलकु द्वादशी’ या ‘तुलसी द्वादशी’ के नाम से भी जाना जाता है।
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि (Dwadashi Tithi) को योगेश्वर द्वादशी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे अलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है।
यह व्रत आपको ‘योग’ (Yoga) यानी परमात्मा से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। क्या आप जानते हैं कि 2026 में यह व्रत किस दिन पड़ रहा है और इसके नियम क्या हैं? आइए, इस ब्लॉग (Blog) में योगेश्वर द्वादशी व्रत से जुड़ी संपूर्ण और विशेष जानकारी प्राप्त करें।
2026 योगेश्वर द्वादशी की शुभ तिथि और मुहूर्त
योगेश्वर द्वादशी का व्रत अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, इसलिए इसकी सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानना आवश्यक है।
- योगेश्वर द्वादशी 2026 – 21 नवंबर 2026 (शनिवार)
- द्वादशी तिथि आरंभ – नवम्बर 21, 2026 को 06:31 AM बजे
- द्वादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 22, 2026 को 04:56 AM बजे
- पूजा का शुभ समय (Pradosh Kaal) – 06:49 AM से 08:56 AM
योगेश्वर द्वादशी व्रत के 5 दिव्य लाभ (Divine Benefits)
यह व्रत न केवल आध्यात्मिक (Spiritual) बल्कि भौतिक जीवन में भी गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। यहां 5 ऐसे लाभ दिए गए हैं जो इस व्रत को करने से प्राप्त होते हैं:
- संपूर्ण पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति – माना जाता है कि योगेश्वर द्वादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का शमन हो जाता है। व्रती (Devotee) इस लोक में सुख भोगकर अंत में मोक्ष (Moksha) यानी जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त करता है।
- धन, वैभव और समृद्धि का आशीर्वाद – चूंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है, इसलिए भक्तों को धन (Wealth) और समृद्धि का विशेष आशीर्वाद मिलता है। घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक समस्याएं (Financial Problems) दूर होती हैं।
- तुलसी और आंवले की पूजा का दोगुना फल – कार्तिक मास में तुलसी (Tulsi) और आंवले (Amla) के पूजन का विशेष महत्व है। योगेश्वर द्वादशी पर इन दोनों की पूजा करने से भक्तों को स्वास्थ्य, आयु और सौभाग्य (Good Fortune) की दोगुनी वृद्धि होती है। यह एक विशेष ‘शुभ संयोग’ है।
- ग्रह दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति – शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के योगेश्वर स्वरूप का ध्यान करने से कुंडली (Kundli) में मौजूद कई प्रकार के ग्रह दोष और विशेष रूप से कालसर्प दोष (Kalsarpa Dosha) के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं।
- मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मिक शांति – इस दिन सच्चे मन से उपवास रखने और पूजा करने वाले भक्तों की सभी शुभ मनोकामनाएं (Wishes) पूर्ण होती हैं। व्रत के नियमों का पालन करने से मन शांत रहता है और व्यक्ति को आत्मिक बल (Inner Strength) की अनुभूति होती है।
योगेश्वर द्वादशी की सरल और सही पूजा विधि (Puja Vidhi)
इस पावन दिन की पूजा विधि अत्यंत सरल है, लेकिन इसमें श्रद्धा और नियम का होना अनिवार्य है:
- व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta) में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प (Vrat Sankalp) लें।
- एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं।
- इस दिन तुलसी और आंवले के पौधे के पास साफ-सफाई करें। तुलसी जी को वस्त्र (Cloth) ओढ़ाएं, श्रृंगार सामग्री अर्पित करें और घी का दीपक (Diya) जलाएं। आंवले के वृक्ष की भी रोली, मौली, अक्षत और मिठाई से पूजा करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। योगेश्वर द्वादशी या विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranama) का पाठ करें। व्रत कथा सुनें।
- अंत में भगवान विष्णु और तुलसी जी की आरती करें। भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में सभी में वितरित करें।
योगेश्वर द्वादशी व्रत उपवास के नियम (Vrat Rules)
व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता है:
- यह व्रत निर्जला (बिना जल के) या फलाहार (Fruits) के साथ रखा जाता है। व्रती को पूरे दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।
- यदि फलाहार कर रहे हैं, तो केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। प्याज, लहसुन, मांसाहार और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।
- व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण (Paran) करें। पारण में सात्विक भोजन (जैसे दही, मिश्री, दूध से बनी मिठाई) लें।
- इस दिन दान (Donation) का विशेष महत्व है। अपनी क्षमतानुसार अनाज, वस्त्र, या धन का दान करना शुभ माना जाता है।
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