Magh Purnima 2026 Date and Time – हिंदू धर्म में माघ मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्वर्ग से देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और प्रयागराज में गंगा स्नान करते हैं।
यदि आप भी इस पावन अवसर पर पुण्य कमाना चाहते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि साल 2026 में माघ पूर्णिमा किस दिन पड़ रही है और स्नान-दान के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है।
माघ पूर्णिमा 2026 की सही तिथि (Magh Purnima 2026 Date)
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026, रविवार को मनाई जाएगी। चूँकि पूर्णिमा तिथि का उदय और स्नान का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से संबंधित होता है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार 1 फरवरी का दिन ही शास्त्र सम्मत है। इसी दिन संगम तट पर एक महीने से चल रहे ‘कल्पवास’ का समापन भी होगा।
पूर्णिमा तिथि का समय
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 31 जनवरी 2026 को रात 09:25 बजे से।
- पूर्णिमा तिथि समाप्त – 1 फरवरी 2026 को रात 08:40 बजे तक।
स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
माघ पूर्णिमा पर ‘ब्रह्म मुहूर्त’ में स्नान करना करोड़ों यज्ञों के फल के बराबर माना जाता है। 1 फरवरी 2026 को शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान – सुबह 05:24 से 06:16 तक
- अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए) – दोपहर 12:13 से 12:58 तक
- चंद्रोदय का समय – शाम 05:52 बजे (स्थान के अनुसार थोड़ा बदलाव संभव)
माघ पूर्णिमा पर चंद्रोदय का महत्व और अर्घ्य
माघ पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है।
- क्यों दें चंद्रमा को अर्घ्य? जिन लोगों की कुंडली में ‘चंद्र दोष’ है या जिनका मन अशांत रहता है, उन्हें इस दिन कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।
- 2026 चंद्रोदय मुहूर्त – 1 फरवरी की शाम को जैसे ही चंद्र दर्शन हों, “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें। इससे मानसिक शांति और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
इस दिन क्या दान करें? (Importance of Daan)
माघ मास में दान का फल अनंत गुना हो जाता है। 2026 की माघ पूर्णिमा पर इन वस्तुओं का दान विशेष फलदायी रहेगा:
- भगवान विष्णु की कृपा के लिए काले तिल का दान श्रेष्ठ है।
- चूंकि यह शीत ऋतु का समय होता है, इसलिए ऊनी वस्त्र या कंबल का दान महादान माना जाता है।
- सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए घी और गुड़ का दान करें।
- किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराना या कच्चा राशन (सीधा) देना अत्यंत शुभ है।
माघ पूर्णिमा की पौराणिक कथा और महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास में स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से स्नान और व्रत करता है, उसे न केवल इस जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसे पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
प्रयागराज (इलाहाबाद) में चल रहे माघ मेले का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु ‘सत्यनारायण भगवान’ की कथा सुनते हैं और रात्रि में मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं ताकि घर में कभी दरिद्रता न आए।
माघ पूर्णिमा 2026 पर क्या करें और क्या न करें?
क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करें।
- पितरों के निमित्त तर्पण करें।
- घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं और स्वास्तिक बनाएं।
क्या न करें
- इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से परहेज करें।
- किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें और न ही झूठ बोलें।
- देर सुबह तक न सोएं, क्योंकि यह ऊर्जा के क्षय का कारण बनता है।
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